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Akhand Gahmari's Blog (81)

प्‍यार के इक पल



हुई क्‍यों दूर दिल से मैं मिले फुरसत बता देना

बनाना इक कहानी तुम मुझे फिर वो सुना देना



बनी दुल्‍हन चली आई सजन मैं साथ में तेरे

करोगे प्‍यार मुझको तुम यही अरमान थे मेरे

मगर टूटे सभी अरमा जला दिल मैं दिखाऊँ क्‍या

नजर के पास रह कर भी बढी दूरी बताऊँ क्‍या

न आना पास अब मेरे सभी सपने जला देना

बनाना इक कहानी तुम मुझे फिर वो सुना देना

हुई क्‍यों दूर दिल से तुम मिले फुरसत बता देना



मिला है तन तुझे मेरा नहीं क्‍यों मन लिया तुमने

कभी भी प्‍यार के इक…

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Added by Akhand Gahmari on January 15, 2015 at 10:29am — 8 Comments

चॉंद की महफिल

भले ही दर्द हो कितना नहीं उसको भुलाना है

मुझे अब गम जमाने को नहीं अपना दिखाना है

मिटाये से नहीं मिटती न जाने याद क्‍यों उसकी

बनी तस्‍वीर है प्‍यारी जिगर में आज भी जिसकी

न हो जब पास वो मेरे लगे ये जिन्‍दगी वैसे

सजी हो चॉंद की महफिल न हो पर चॉंदनी जैसे

बता यह बात दुनिया को नही मुझको हँसाना है

मुझे अब गम जमाने को नहीं अपना दिखाना है

भले ही दर्द हो कितना नहीं उसको भुलाना है

बना कर नाँव कागज की चला मैं ढूढ़ने…

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Added by Akhand Gahmari on January 10, 2015 at 7:09pm — 12 Comments

सज़ा दो मुझे

चोट दिल पे लगी है दवा दो मुझे
याद आये न उसकी दुआ दो मुझे

प्‍यार जिससे किया छुप गया वो कहीं
ऐ हवा तुम ही उसका पता दो मुझे

मर न जायें कहीं प्‍यार के दर्द से
दर्द कैसे सहें तुम सिखा दो मुझे

हर खुशी आपको तो दिया हूँ मगर
दिल दुखाया कभी तो सज़ा दो मुझे

अब जुदाई न मुझसे सही जाती है
मौत की नींद आकर सुला दो मुझे

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on December 20, 2014 at 2:08pm — 28 Comments

शिकायत हम करें किससे बता दो जिन्‍दगी मुझको

किया जो प्‍यार का वादा न जाने क्‍यों भुलाती है

अँधेरी रात में हमको नहीं राहें दिखाती है



छलक जाती न जाने क्‍यों कभी भी आँख ये मेरी

न जाती याद उसकी है मुझे हर पल रूलाती है



उसे दिल में बसाने की लिये चाहत मरेंगे क्‍या

बने अंजान वो यारो हमें पागल बताती है



मिले जब वो कभी हमसे बताये हाल दिल का क्‍या

न रहता होश अपना  जब हमें नगमे सुनाती है l



शिकायत हम करें किससे बता दो जिन्‍दगी मुझको

बसी जो दिल में मेरे क्‍यों वही हमको सताती है



अखंड…

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Added by Akhand Gahmari on October 21, 2014 at 8:53pm — No Comments

हमारे पास जो आता

हमारे पास आता जो वही दिल तोड़ जाता है

रहे जलता हमारा दिल मगर वो मुस्‍कुराता है

हमारी जिन्‍दगी में क्‍यों अधेरा ही रहे छाया

मिले न चैन दिल को क्‍यों भटकती है मेरी काया

न कोई दो कदम चल कर हमें जीना सिखाता है

रहे जलता हमारा दिल मगर वो मुस्‍कुराता है

हमारे पास आता जो वही दिल तोड़ जाता है

न नदियों को कभी देखा मिलाते दो किनारो को

बचाते फूल को मैने नहीं देखा बहारो को

जिसे हम खास कहते है वही हमको मिटाता…

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Added by Akhand Gahmari on October 2, 2014 at 10:21am — 6 Comments

रहने दो

तुम्‍हारी झील सी आँखे मुझे बस डूब मरने दो

न रोको तुम कभी मुझको मुझे बस प्‍यार करने दो



तुम्‍हारे बिन ये जीवन है जैसे फूल बिन धरती

मरे हम भी तुम्‍हारे पर मगर तुम क्‍यों नहीं मरती

बडा सूना पडा जीवन प्‍यार के रंग भरने दो

न रोको तुम कभी मुझको मुझे  बस प्‍यार करने दो

तुम्‍हारी झील सी आँखे मुझे बस डूब मरने दो



तुम्‍हारे पाव की पायल मुझे हरदम  सताती है

निगाहे रात दिन तुमको न जाने क्‍यो बुलाती है

छुपाना मत कभी ऑंखे मुझे पलको पे रहने दो

न रोको तुम कभी…

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Added by Akhand Gahmari on September 18, 2014 at 8:00pm — 4 Comments

सो जाता

हमें भी जिन्‍दगी से प्‍यार हो जाता।।।

हमारे प्यार मे गर कोई खो जाता

शिकायत भी नहीं उनसे दोष मेरा है

निभाते प्‍यार गर हम तो न वो जाता

तड़पता ही रहूँगा रात भर क्‍या मैं

मिलन की अास गर भी होती  सो जाता

न पाये रूह उसकी चैन जन्‍नत में

दिखा सपने सुहाने छोड़ जो जाता

बहे जो आज नफरत की हवा जग में

मिटा मैं काश नफरत प्‍यार बो जाता

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on September 11, 2014 at 3:45am — 5 Comments

हमारे दर्द को दुनिया

हमारे दर्द को दुनियाँ तमाशो में न गा जाये

बजा ताली सभी झूमें हमारा दर्द भा जाये

न आये है किनारे पर अभी ठहरा समुन्‍दर है।

बड़ी खामोश लहरे हैं कहीं तूफाँ न आ जाये।।

सहेगें जुल्‍म अब कितना बड़ा जालिम हुआ हाकिम।

पड़ी थी लाश सड़को पे कफन वो बेच खा जाये।।

सभालो अब वतन अपना तबाही का दिखे मंजर

घरों में आज खुशियाँ है कहीं मातम न छा जाये

जला कर आस का दीपक न जाओ छोड़ कर हमको '

कुचलने का हमारा सिर न दुश्‍मन मौका पा जाये

मौलिक…

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Added by Akhand Gahmari on September 8, 2014 at 11:00am — 11 Comments

बीते पल

न होना दूर नज़रों से कसम हमको खिलाती थी

न दे जब साथ लब उसके इशारो से बुलाती थी



किताबों में छुपाती थी दिया हमने जो दिल उसको

बचा नज़रे सभी की वो उसे दिल से लगाती थी



चुरा नज़रे सभी की हम मिले जब बाग में इक दिन

लगा कर वो गले हमको बढ़ी धड़कन सुनाती थी



कभी आँखों मे डाले अाँख कर देता शरारत तो

चुरा कर वो नज़र हमसे जरा सा मुस्‍कुराती थी



न भूलेगे कभी हम तो बिताये साथ पल उसके

छुपा कर चाँद सा मुखड़ा हमें हरदम सताती…

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Added by Akhand Gahmari on September 6, 2014 at 8:30pm — 20 Comments

केले में

मिला कंधा नहीं हमको पड़ी है लाश ठेले में

खिलाया क्यों ज़हर तुमने मिला कर हम को केले में

चली आ तू बहाने से मिलेगें आज हम दोनो

न आई तो समझ लेना फसा देगें झमेले में

न आती थी हमें नीदें कहें जब तक न गुडनाइट

किये हम रात भर बाते दिया जो फोन मेले में

पहन कर लाल जोड़ा तुम चली हो साथ क्‍याे उनके

करे हम ये दुआ रब से रहे तू तो तबेले में

सजाई मॉंग क्‍यों अपनी तड़पता छोड़…

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Added by Akhand Gahmari on August 23, 2014 at 8:17pm — 22 Comments

नाम हो जाये

मिले है आज हम दोनो हसीं इक शाम हो जाये

कसम दो तोड़ तुम उसकी चलो इक जाम हो जाये

पड़ा सूखा मरे भ्‍ूाखो नहीं कोई हमें पूछे

कही ऐसा न हो यारो कि कल्‍लेआम हो जाये

नहीं रखते कभ्‍ाी धीरज किसी भी काम में यारो

बचा लो नाम तुम मेरा न वो बदनाम हो जाये

तुम्‍हारे प्‍यार में जानम मरेगें डूब कर सुन लो

मरा पागल दिवाना है न चरचा आम हो जाये

मिलेगा अब नहीं जीवन मिला इक बार जो तुमको

करो कुछ काम अब ऐसा तुम्‍हारा नाम हो…

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Added by Akhand Gahmari on August 19, 2014 at 8:16pm — 15 Comments

जिन्‍दगी से प्‍यार

कभी तो प्‍यार हमको वो किया होता

वफा के नाम पे धोखा दिया होता

तड़पती रूह को भी चैन आ जाता

कफ़न उसने हमारा गर सिया होता

शिकायत जिन्‍दगी से हम नहीं करते

दवा बन दर्द वो मेरा लिया होता

न मैखाने कभी जाते भुलाने गम

हमारे अश्‍क उसने गर पिया होता

हमें तो जिन्‍दगी से प्‍यार हो जाता

अगर वो साथ दो पल बस जिया होता

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on August 4, 2014 at 12:16am — 6 Comments

मेरी अमरनाथ यात्रा के 2014

यात्रा का प्रथम चरण---गहमर से वाराणसी

मैं बाबा बरफानी की यात्रा का मन बना चुका था। परिवार से इजाजत और दोस्‍तो की सलाह के बाद यह इच्‍छा और बलवती हो गयी। मैने मन की सुनते हुए 23 जुलाई की तिथी निश्‍चित किया और अपने काम में लग गया। घर से महज 200 मीटर की दूरी पर भी अारक्षण केन्‍द्र होने के वावजूद मैं आरक्षण नहीं करा पाया आैर न ही किसी प्रकार की तैयारी कर रहा था।धीरे धीरे 18 जुलाई आ गया तब जा कर मैने अपना आरक्षण कराया, इस दौरान गहमर…

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Added by Akhand Gahmari on August 2, 2014 at 10:00pm — 12 Comments

भुला देना

मरा था मैं तड़प कर वो जमाना भी भुला देना

बसाया था तुझे दिल में फसाना भी भुला देना



जले खुद थे चरागो से बचाया था तुझे हमने

नहीं ये राह फूलो की बताना भी भुला देना



सहे है दर्द हम कितने पता हो तो जरा बोलो

छुपा कर दर्द मेरा  मुस्‍कुराना भी भुला देना



निगााहो में बसाया था तुझे आखे बनाया था

चली जो छोड़ कर अाँसू बहाना भी भुला देना





उड़े आंचल तुम्‍हारे थे सभाला था हवाओं से

कहा था कुछ हवाओं ने बताना भी भुला…

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Added by Akhand Gahmari on July 21, 2014 at 8:00pm — 23 Comments

एक खौफनाक रात

यह बात 24 जून 1989 की है मेरे पिता जी जनपद देवरिया के पडरौना में तैनात थे। हम लोग वही से अपनी कार यू0पी0के0 4038 से पडरौना से अपनी मौसी की शादी में भाग लेने धरहरा मुँगेर जा रहे थे। हमारे साथ हमारी माता जी, दो भाई, मामा और वह मौसी जिनकी शादी थी और उनकी एक मित्र रूबी थी। हम लोग सुबह 6 बजे पडरौना से निकल कर 12 बजे गोपालगंज बिहार के पास पहुँचे थे उसी समय हम लोगो की कार खराब हो गयी हमारे मामा गोपालगंज बिहार से लाये मगर शा वह कार किसी तरह को गोपालगंज के अपने गैरेज में लाया मगर वह कार को पूरी तरह…

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Added by Akhand Gahmari on July 20, 2014 at 4:17pm — 12 Comments

मेरी पहली अमरनाथ यात्रा

मेरी पहली अमरनाथ यात्रा

बात 22 जुलाई वर्ष 2009 की है। मेरे पिता अपनी डियुटी से घर आये हुए थे।घर का कोई काम न कर पाने के मेरे दुकान से आने के बाद मुझ पर नाराज हेा रहे थे। मैं चुपचाप खाना खाया और उनके नाराज होने पर घर से बाहर चले जाने की आदत के अनुसार घर से बाहर निकल कर अपनी दुकान पर आ गया। दुकान पर आरकुट खोल कर इधर उधर करने लगा। उसी समय मेरे मैसेज बाक्स में अमरनाथ यात्रा संबंधी रजिस्टेªशन का विज्ञापन आया। मैं उसे खोल कर देखने लगा, पता नहीं क्या दिमाग में आया मै उसमेें दिये लिंक केा क्लिक…

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Added by Akhand Gahmari on July 10, 2014 at 5:16pm — 10 Comments

गजल नफरत की दीवार

भुलाये तो भुलाये हम तुम्‍हारे प्‍यार को कैसे

सुनाये हाल दिल का हम बता संसार को कैसे

चली जाना जरा रुक जा मनाने दे हमें खुशियाँ

बिना तेरे मनायेगें  किसी त्‍यौहार को कैसे

लुटा कर जान भी अपनी बचा पाते मुहब्‍बत को

मिले खुशियाँ हमें कितनी बताये यार को कैसे

करो नफरत भले हमसे हमारी बात सुन लो तुम

गिराये आज नफरत की खड़ी दीवार को कैसे

नहीं दिखता जनाजा क्‍या तुझे अब जा चुके है हम

दिखाओगी भला अब तुम किये श्रृंगार को…

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Added by Akhand Gahmari on July 5, 2014 at 5:19pm — 8 Comments

गजल सितम देखो

हमें वो वेवफा कह कर बुलाते है सितम देखो

चुरा कर नीद रातो की सताते है सितम देखो



कभी मै देखता भी तो नहीं था जाम के प्‍याले

कसम दे कर मुझे अपनी पिलाते है सितम देखो



बडे अरमान से जिसने  बनाया आशिया मेरा

वही उस आशिये को अब जलाते है सितम देखो



न रूठे वो कभी हमसे हमारे साथ चलते थे

मगर अब साथ गैरो का निभाते है सितम देखो



खुले जो लब कभी जिनके हमारा नाम ही निकले

न जाने क्‍यो वही हमको भुलाते है सितम देखो

मौलिक व…

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Added by Akhand Gahmari on June 30, 2014 at 8:00am — 19 Comments

बनाया था महल मैनें गजल

1222 1222 1222 122

हमारे प्‍यार को वो अब निभाती भी नहीं है

जलाये क्‍यों हमारा दिल बताती भी नहीं है

लिखा जो गीत उसने वेवफाई पे हमारी

कभी वह गीत हमको तो सुनाती भी नहीं है

बनाया था महल मैनें कभी उनके लिये जो

पड़ा है आज भी सूना जलाती भी नहीं है

बड़े अरमान थे उनसे सजाये जिन्‍दगी में

मगर उनको कभी अब वो सजाती भी नहीं है

करें किससे शिकायत जिन्‍दगी की हम बताओ

कभी भी प्‍यार से मुझको बुलाती भी नहीं है

मौलिक व अप्रकाशित अखंड…

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Added by Akhand Gahmari on June 16, 2014 at 2:09pm — 17 Comments

खोने नही़ं देती

1222   1222  1222   1222



किसी की याद रातो मे हमें सोने नहीं देती

कसम उसने दिया था जो हमे रोने नहीं देती



चली थी साथ मेरे जो कभी इक हमसफर बन कर

न जाने पास अपने क्‍यों हमें होने नहीं देती



सिखाया था हमें जिसने जमाने में रहें कैसे

वही अब प्‍यार भी हमको वहाँ बोने नहीं देती



नहीं है प्‍यार मुझसे अब मगर नफरत जरा देखो

किसी को लाश भी मेरी वो अब ढोने नहीं देती



हमारे गीत में छुपकर हमेशा जो चली आती

बने आवाज दिल की वो हमें खोने…

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Added by Akhand Gahmari on June 15, 2014 at 1:30am — 5 Comments

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