For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,163)

ऐसे ही बनेगा सशक्त समाज

भारत जैसे विशाल देश का समाज भी उतना ही बड़ा है। ऐसे में हर किसी का दायित्व बनता है कि वे स्वच्छ समाज के निर्माण में सकारात्मक योगदान दें। देखा जाए तो आधुनिक समाज में कई तरह की अपसंस्कृति हावी हो गई है, इन्हीं में से एक है, नशाखोरी। यह बात आए दिन कई रिपोर्टों से सामने आती रहती है कि नशाखोरी से व्यक्ति और समाज को किस तरह नुकसान है। बावजूद, लोग अपसंस्कृति के दिखावे में ऐसे कृत्य कर जाते हैं, जिससे समाज शर्मसार तो होता ही है, खुद उस व्यक्ति का भी भविष्य दांव पर लग जाता है। नशाखोरी की प्रवृत्ति के…

Continue

Added by rajkumar sahu on December 14, 2010 at 11:25am — No Comments

आचार्य विनोबा भावे

संत विनोबा भावे का वास्‍तविक नाम था विनायक नरहरि भावे। उनकी समस्‍त जिंदगी साधु संयासियों जैसी रही, इसी कारणवश वह एक संत के तौर पर प्रख्‍यात हुए। वह एक अत्‍यंत विद्वान एवं विचारशील व्‍यक्तित्‍व वाले शख्‍स थे। महात्‍मा गॉंधी के परम शिष्‍य जंग ए आजा़दी के इस योद्धा ने वेद, वेदांत, गीता, रामायण, कुरान, बाइबिल आदि अनेक धार्मिक ग्रंथों का उन्‍होने गहन गंभीर अध्‍ययन मनन किया। अर्थशास्‍त्र, राजनीति और दर्शन के आधुनिक सिद्धांतों का भी विनोबा भावे ने गहन अवलोकन चिंतन किया। गया। जेल में ही विनोबा ने 46…

Continue

Added by prabhat kumar roy on December 14, 2010 at 7:30am — 2 Comments

विराम चिह्न !! मेरे तुम्हारे नाम का ::: ©

विराम चिह्न !! मेरे तुम्हारे नाम का ::: ©



मैं जानती हूँ के साथ मिला..

कह दी मुझसे तुमने हर बात..

यत्र-तत्र-सर्वत्र करा दिया भान..

मुझ ही को मेरे होने का..



नाव पतवार के बहाने..

तो कभी..

तप्त ओस भाप-बादल के बहाने..



सूखे से जीवन में हरियाली सा..

ढाक-पत्तों…

Continue

Added by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on December 14, 2010 at 1:00am — 1 Comment

मुक्तिका: ख्वाब में बात हुई..... संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:



ख्वाब में बात हुई.....



संजीव 'सलिल'

*

ख्वाब में बात हुई उनसे न देखा जिनको.

कोई कतरा नहीं जिसमें नहीं देखा उनको..



कभी देते वो खलिश और कभी सुख देते.

क्या कहें देखे बिना हमने है देखा किनको..



कोई सजदा, कोई प्रेयर, कोई जस गाता है.

खुद में डूबा जो वही देख सका साजनको..



मेरा महबूब तो तेरा भी है, जिस-तिस का है.

उसने पाया उन्हें जो भूल सका है तनको..



उनके ख्यालों ने भुला दी है ये दुनिया…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on December 13, 2010 at 7:34pm — 4 Comments

कथ्य-शिल्प गोष्ठी-०२ एक रपट

कथ्य-शिल्प गोष्ठी-०२ एक रपट
बनारस की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा कथ्य शिल्प गोष्ठी का आयोजन रविवार १२ दिसंबर को चेतगंज स्थित मंशाराम फाटक सभागार में किया गया |अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार और 'सोच-विचार'के संपादक डॉ.जीतेंद्र नाथ मिश्र ने की |विषय प्रवेश दानिश जमाल ने किया |
इस बार चयनित युवा रचनाकार अभिनव अरुण (अरुण कुमार पाण्डेय अभिनव)ने अपनी चुनिन्दा दस रचनाओं का पाठ किया | इस पर…
Continue

Added by Abhinav Arun on December 13, 2010 at 1:54pm — 4 Comments

विधि का विधान : प्रो. सत्यसहाय दिवंगत.....

विधि का विधान : प्रो. सत्यसहाय दिवंगत.....
संजीव वर्मा 'सलिल' SS Shrivastava.jpg
वयोवृद्ध शिक्षाविद-अर्थशास्त्री प्रो. सत्यसहाय श्रीवास्तव
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ २८.११.२०१०. स्थानीय अपोलो चिकित्सालय में आज देर रात्रि विख्यात अर्थशास्त्री, छत्तीसगढ़ राज्य में महाविद्यालायीन शिक्षा के सुदृढ़ स्तम्भ…
Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on December 13, 2010 at 2:07am — 3 Comments

GHAZAL - 12

                               ग़ज़ल





आ  जाओ  हमारी  बांहों  में,   कुछ   प्यार   मोहब्बत   हो  जाये |

ये    प्यार   इबादत   होता   है,  आओ   ये   इबादत  हो   जाये ||



दुनिया  से  भला  क्या   घबराना, जलता  है  कोई  तो  जलने  दो.

आ  जाओ  मिला  लें  दिल  से दिल,  दुनिया से…

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 13, 2010 at 12:30am — 1 Comment

महल्ला का गुंडा , देश का गुंडा , दुनिया का गुंडा

महल्ला का गुंडा , देश का गुंडा , दुनिया का गुंडा .



देश की सीमा कि तरह गुंडो का भी अधिकार क्षेत्र होता है। जैसे महल्ले का गुंडा ,…

Continue

Added by madan kumar tiwary on December 12, 2010 at 10:00pm — No Comments

विज्ञान के विद्यार्थी का प्रेम गीत

अवकलन समाकलन

फलन हो या चलन-कलन

हरेक ही समीकरन

के हल में तू ही आ मिली



घुली थी अम्ल क्षार में

विलायकों के जार में

हर इक लवण के सार में

तु ही सदा घुली मिली



घनत्व के महत्व में

गुरुत्व के प्रभुत्व में

हर एक मूल तत्व में

तु ही सदा बसी मिली



थीं ताप में थीं भाप में

थीं व्यास में थीं चाप में

हो तौल या कि माप में

सदा तु ही मुझे मिली



तुझे ही मैंने था पढ़ा

तेरे सहारे ही बढ़ा

हुँ आज भी वहीं खड़ा

जहाँ मुझे थी तू…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 12, 2010 at 6:33pm — 3 Comments

मैंने लिखना छोड़ दिया

जब शब्द पड़ गए कम तो मैंने लिखना छोड़ दिया

जब आँखें न हुई नम तो मैंने लिखना छोड़ दिया

पूछा गया के तुमने महफिल में दिखना छोड़ दिया

हम बोले की हमने बिकना छोड़ दिया

न लडखडाये उस वक्त जब राहों में रुकना छोड़ दिया

उड़ने लगे जो आसमां में हम तो कदमों ने दुखना छोड़ दिया

पीते थे जिस जाम में उस जाम को मैंने तोड़ दिया

लिखते लिखते लिख पड़ी कलम के मैंने लिखना छोड़ दिया

Added by Bhasker Agrawal on December 12, 2010 at 4:31pm — 2 Comments

GHAZAL - 10

                           ग़ज़ल





महबूब   मेरे   सूरत   तेरी,   मुझे   इतनी   प्यारी   लगती   है |

सौ  जन्मों  से  भी  पहले  की,  तेरी  -  मेरी   यारी   लगती   है ||



तेरा  प्यार  मेरी रग़ - रग़ में बसा है, बन के नशा हमराज़ मेरे,

एक  पल  की   भी  तन्हाई  मुझे,  कातिल …

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:30pm — No Comments

GHAZAL - 4

                                   ग़ज़ल



छोटे  से  दिल  में  दुनिया  का,   दर्द   छुपाये  फिरता  हूँ |

आंसू  के   फूलों  से   अपनी,   लाश   सजाए   फिरता  हूँ ||



अपना  बनकर  दिल  को  लूटना,  है  दस्तूर ज़माने का,

मैं  ऐसे  ही  कुछ  रिश्तों  पे,  खुद  को  लुटाये फिरता हूँ…

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:00pm — 1 Comment

GHAZAL - 3

                                 ग़ज़ल



हर  पल  दिल  ने  तुझे  पुकारा  है यूँ अय हमराज़ मेरे |

भींग   गए   हैं   रोते-रोते   आंसू   से   हर   साज़   मेरे ||



जी  करता  है -   इन  रश्मों  की  दीवारों  से  लड़ जाऊं,…

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 12:30pm — 1 Comment

GHAZAL - 9

                                  ग़ज़ल



मित्रों , हमें ज्ञान का दीपक  घर-घर  आज  जलाना  होगा |

भटक  गयी है जो  मानवता ,  उसको  राह  दिखाना  होगा ||



दिल  से  दिल  को आज जोड़ना होगा हमको आगे बढ़कर,…

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 2:00am — 1 Comment

GHAZAL - 2

                                ग़ज़ल



यारों ,   पापों  के  हिंडोले  की  यह  डोली   बहुत   बुरी   है |

होली  खेलो   मगर   खून  की  होली  यारों  बहुत  बुरी  है ||



तन से मानव बहुत मिलेंगे पर तुम बनना मन से मानव,

गोली  बनो  दवा  की …

Continue

Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:30am — 2 Comments

कविता : हवाई जहाज

हवाई जहाज को

दुनिया और ख़ासकर शहर

बड़े खूबसूरत नजर आते हैं

सपाट चमचमाती सड़कों से उड़ना

रुई के गोलों जैसे

सफेद बादलों के पार जाना

हर समय चमचमाते हुए

हवाई अड्डों पर उतरना या खड़े रहना

दरअसल

असली दुनिया क्या होती है

हवाई जहाज

ये जानता ही नहीं

वो अपना सारा जीवन

असली दुनिया से दूर

सपनों की चमकीली दुनिया में ही बिता देता है



हवाई जहाज भी क्या करे

उसका निर्माण किया ही गया है

सपनों की दुनिया में रहने के लिए

वो रिक्शे या साइकिल…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 11, 2010 at 8:20pm — 1 Comment

पल : जो तुम संग बिताये..

आँखों में तुम बसे हो ऐसे ..

कोई अधुरा ख्वाब हो जैसे !

वो तुम्हारा कुछ पलों का साथ

और उन पलों में तुम्हारा असीमित प्यार

तमाम उम्र के लिए अपनी पलकों में

कैद कर के रख लिया ...

वो हसीन से लम्हे

शरीर से लम्हे .

जिन लम्हों को तुम संग जिया

सम्हाल के उनको रख लिया ...

न जाने क्या बात हुई

खफा हो गए मुझसे तुम

यूँ मुंह फेरे बैठे हो

'जैसे'

मैं 'हूँ' , कोई बीता हुआ पल

कोई गुजरा…

Continue

Added by Anita Maurya on December 11, 2010 at 4:25pm — 4 Comments

बड़े भोले हम भारत वासी ,

बड़े भोले हम भारत वासी ,

जादू तो हमपे चल जाता हैं ,

कोई लूटे लाखो काटे चाँदी ,

मेहरबानी हम कर जाते हैं ,

ये सब हुई अब पुरानी बाते ,

खुल रही हैं अब अपनी आँखे ,

अब चोरो को मार भगायेंगे ,

जो कम करेंगे आगे जायेंगे ,

वो भी अब ना बच पायेंगे ,

जो बने उनका रहम वाली ,

बड़े भोले हम भारत वासी ,

अब जो भी लूट मचाएगा ,

वो एक दिन पकड़ा जायेगा ,

उसकी कुशल नही अब यारो ,

कानून अपना चक्कर चलाएगा ,

जो कानून को धोखा दे जाये ,

तब गुरु…

Continue

Added by Rash Bihari Ravi on December 11, 2010 at 11:30am — 2 Comments

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता........

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता,


किसी नन्हे से दिल--दिमाग़ को रोशिनी…
Continue

Added by Lata R.Ojha on December 11, 2010 at 2:00am — 2 Comments

रात..........

लिटाया तकिये पे हौले से थपकियाँ देकर .

और परियों की कहानी भी सुना डाली हैं...

उनींदी रात ये जगार की एक जिद सी लिए बैठी है...

चाँद आये तौ मैं कह दूंगा सुला दौ इसको...

तमाम ख्वाब मेरे खिडकियों पे बैठे हैं....…
Continue

Added by Sudhir Sharma on December 10, 2010 at 11:19pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
5 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
5 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
6 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
10 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
10 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
12 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
12 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service