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नादिर ख़ान's Blog – December 2012 Archive (5)

विकास बनाम इंसानियत – दर

रोज़ होती रही चर्चायें

बैठकों पे बैठकें

कार्यालयों से लेकर चौपालों तक

कारखानों से लेकर शेयर बाज़ारों तक

हर जगह

कोशिशें जारी हैं

कैसे बढ़े

कितना बढ़े

कहाँ-कहाँ कितनी गुंजाईशें है

सभी लगे हैं

देश विकसित हो या विकासशील

या हो अविकसित

मगर चिंतायें

सबकी एक है

कैसे बढ़े विकास-दर

कैसे बढ़े व्यापार

बाज़ार भाव

कैसे बढ़े निर्यात

फिर चाहे

मौत का सामान ही क्यों न हो

व्यापार बढ़ना चाहिए

विकास-दर बढ़ती…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 28, 2012 at 11:00pm — 3 Comments

शैतान हँस रहा है

लड़की चीख़ी

चिल्लायी भी

मगर हैवानों के कान बंद पड़े थे

नहीं सुन पाये

उसकी आवाज़ का दर्द

 

वह रोयी बहुत

आँखों से उसके

झर-झर आँसू…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 21, 2012 at 12:24am — 2 Comments

आओ वालमार्ट

आओ वालमार्ट 

स्वागत है आपका

अपनी कमज़ोर हो रही 

अर्थव्यवस्था को

मज़बूत करने

आओ

हमारी मज़बूत होती

अर्थव्यवस्था को

कमज़ोर करने

आओ

 

हमने आपके हथियार नहीं लिए

इस नुक्सान की भरपायी के लिए

नयी संभावनाओं को तलाशने

आओ

किसानों के पसीने निचोड़ने

गरीब जनता का ख़ून चूसने

आओ वालमार्ट

 

यूनियन कार्बाइड की याद

धुंधली पड़ चुकी है

तुम नयी यादें देने…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 14, 2012 at 11:00am — 3 Comments

सब तो यहाँ हैं अजनबी

हाँ प्यार से इकरार है

पर शिर्क से इंकार है

 

अब दिल में वो जज़्बा नहीं

बस प्यार का बाज़ार है 

 

मेरा ठिकाना क्या भला

जब बिक चुका घर-बार है…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 10, 2012 at 5:00pm — 6 Comments

रेत में जैसे निशां खो गए

रेत में जैसे निशां खो गए

हमसे तुम ऐसे जुदा हो गए

 

रात आँखें ताकती ही रहीं

मेहमां जाने कहाँ सो गए

 

सौंप दी थी रहनुमाई जिन्हें

छोड़कर मझधार में खो गए…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 5, 2012 at 4:30pm — 11 Comments

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