For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog – December 2015 Archive (4)

चिता पर हूँ लेटा, जला क्यूँ न देती---ग़ज़ल (पंकज के मानसरोवर से)

122-122-122-122

.
मैं रूठा हूँ तुमसे, मना क्यूँ न लेती।
अदाओं का जादू, चला क्यूँ न लेती।।

गज़ब का नशा है जो,तेरी नज़र में।
तो हाला ये तू, आज़मा क्यूँ न लेती।।

पता है मुझे सिर्फ़, धोखाधड़ी है।
हक़ीक़त पता तू,लगा क्यूँ न लेती।।

जो डरती है हासिल,गँवाने से ग़र तू।
तो इन आंसुओं को छिपा क्यूँ न लेती।।

सुना है तेरे जिस्म में दामिनी है।
चिता पर हूँ लेटा,जला क्यूँ न देती।।

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 30, 2015 at 10:30pm — 10 Comments

तो कुछ देखूँ- ग़ज़ल (पंकज)

1222 1222 1222 1222



तुझे मैं चित्त से अपने मिटा पाऊँ तो कुछ देखूँ।

तेरे अवधान को मन से घटा पाऊँ तो कुछ देखूँ।।



हे प्रियतम रूप रस तेरा मनस पर इस कदर हावी।

ये दृग रस पान से तेरे हटा पाऊँ तो कुछ देखूँ।।



ये पर्वत पेड़ ये नदिया, ये शीतल सी हवाएँ भी।

अलग तुमसे हैं ये खुद को बता पाऊँ तो कुछ देखूँ।।



कि मन्दिर चर्च मस्ज़िद और गुरुद्वारे बहुत हैं पर।

तेरे छवि धाम से मन को बुला पाऊँ तो कुछ देखूँ।।



ये पंकज खिल भी सकता है हाँ जी… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 22, 2015 at 12:15am — 8 Comments

गरीब जमने लगा उनको अब तपायेगी क्या? ग़ज़ल द्वारा पंकज मिश्र

1212 1122 1212 112
कि जिनके पास नहीं छत उन्हें सतायेगी क्या?
ये सर्द रात भला उनको अब सुलायेगी क्या?

बहुत अगन है सुना है श्मशान घाटों पर।
गरीब जमने लगा उनको अब तपायेगी क्या?

मिला था शाम में जो चीथड़े लपेटे हुए।
उसी को शीत लहर साथ में ले जायेगी क्या?

बहुत ही ऊँचा है रुतबा अगर तुम्हारा तो फिर?
तुम्हारे नाम की बन्दूक उसे बचायेगी क्या?

हमेशा साध रहे स्वार्थ नाम लेके तेरा।
ज़रा तू पूछ दरिंदों को भी उठाएगी क्या?

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 9, 2015 at 4:00pm — 4 Comments

खुद को सौंपा काज बहुत-पंकज मिश्र

खुद से हूँ नाराज़ बहुत।

दुःख में हूँ मैं आज बहुत।।

वर्ग भेद की नीति मुल्क में।

सच में आती लाज बहुत।।



झूठ कांठ का झण्डा ऊँचा।

पद पाता है गुण्डा ऊँचा।

संविधान में कई छेद हैं।

सच पर गिरती गाज़ बहुत।।



चोर सिपाही मिले हुए हैं।

इक धागे में सिले हुए हैं।

किसको हार समर्पित कर दूँ।

किस पर कर लूँ नाज़ बहुत।।



जात पात का देते नारा।

मज़हब का लेते हैं सहारा।

समता का अधिकार दिखावा।

राजनीति में राज… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 6, 2015 at 11:32pm — No Comments

Monthly Archives

2022

2021

2019

2018

2017

2016

2015

1999

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
5 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
19 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
19 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
20 hours ago
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Mar 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service