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Dr. Vijai Shanker's Blog – November 2014 Archive (3)

मन-भावक इतिहास - डॉo विजय शंकर

अच्छा लगता है
पुरखों को याद करना ,
उनकीं कथाएं , उनकीं उब्लब्धियाँ ,
सुनना और बयान करना ॥
एक गौरवपूर्ण अतीत और
उसकी सुनहरी स्मृतियाँ ॥
और , सुन्दर सपने देखना ,
फिर कोई भगीरथ आएगा
गंगा क्या , इस बार स्वर्ग ही
धरती पर उतार लाएगा ॥
अभी से दलाल या ठेकेदार
ढूँढ लो , उसके संपर्क में रहो,
स्वर्ग का टिकट वही न दिलाएगा ॥


मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Dr. Vijai Shanker on November 26, 2014 at 10:30pm — 16 Comments

क्षणिकाएँ - 3 - डा० विजय शंकर

भला आदमी है वो ,
भला करता है ,
सौदागरों की तरह ।

रहमदिल है वह
दुआ करता है
भिखारियों की तरफ ।

आशीर्वाद देता है वह
चढ़ावा चढ़ जाने के बाद
पुजारी है वह ।

सब कर देगा वह
सब पा लेने के बाद
वादा है उसका ,
नेता है वह ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Dr. Vijai Shanker on November 19, 2014 at 5:46pm — 26 Comments

गुनाह होना आम हो गया - डॉo विजय शंकर

वो गुनाह को पनाह देते रहे

वो पनपता रहा , वो मौज करते रहे .

गुनाह होना रोज का काम हो गया

ऐसा काम , कि बस आम हो गया ,

जब चाहे , जहां हो जाये ,

कौन जानें , कब , कहाँ हो जाये .

हालात ये हैं कि अब लोग चौंकते नहीं ,

कहीं , कुछ भी , हो जाए बोलते नहीं ,

कहीं , किसी से , कुछ पूछतें नहीं

उस तरफ , उफ्फ … देखते नहीं ,

ये हालात हैं , जो शर्मिन्दा कभी हुए नहीं ,

जब कि गुनाह खुद बेइंतहा शर्मिन्दा है ....

कि लोगो में उसके लिए कोई खौफ नहीं है

इस… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2014 at 10:59am — 22 Comments

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