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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – September 2015 Archive (1)

नहीं मरहम बड़ा कोई ( ग़ज़ल ) - लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

1222  1222  1222   1222

नहीं है धार कोई भी समय की धार से बढ़कर

नहीं है भार कोई भी समय के भार से बढ़कर



भरे हैं   धाव   इसने  ही  बड़े  छोटे  सदा सब के

नहीं मरहम बड़ा कोई समय के प्यार से बढ़कर



उलझ मत सोच कर बल है भुजाओं में जवानी का

न देगा  पीर कोई   भी  समय  की  मार से बढ़कर



अगर दोगे समय को मान…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 12, 2015 at 10:40am — 3 Comments

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