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Dr Ashutosh Mishra's Blog – July 2013 Archive (4)

इक दिया तुमने जलाया होता

इक दिया तुमने जलाया होता 

तम जरा सा ही हटाया होता 

हिन्द में रहते सभी हिंदी हैं 

भेद मजहब का मिटाया होता

 

साथ जीने में मजा आता है 

पाठ सबको ये पढ़ाया होता 

गर खता हमसे हुई माफ़ करो 

वाकया गुजरा भुलाया होता 

कुछ खुदा की यूं इबादत करते 

रोते बच्चे को हसाया होता 

चीरते हो बस मही का सीना 

गुल से आँचल भी सजाया होता 

दूध जिस माँ का पिया है तुमने

कर्ज  कुछ उसका…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on July 31, 2013 at 6:30pm — 12 Comments

खिड़कियाँ घर की तुम खुली रखना

खिड़कियाँ घर की तुम खुली रखना 

नजरें दर पे ही तुम टिकी रखना 

फिर से परवाना न मिटे कोई 

बज्म में शम्मा मत  जली रखना 

दिल मेरा रहता बेक़रार बड़ा  

तुम जरा सी तो बेकली रखना 

कैद मुझको तू कर ले दोस्त मेरे 

जुल्फ की ही पर हथकड़ी रखना 

है हवाओं में अब जहर बिखरा 

तू मगर आदत हर भली रखना 

आरजू दिल में बस मेरे इतनी 

अपने दिल में ही अजनबी रखना 

आशु वो देगा सौं न पीने…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on July 24, 2013 at 1:00pm — 10 Comments

आज फिर हमने पी रखी साहिब

जो नजर है कमाल की साहिब

वो नजर क्यूँ झुकी हुई साहिब

.

आज फिर दिल मेरा बेचैन सा है

आज फिर हमने पी रखी साहिब

.

जुल्फ की छाँव तले गुजरे दो पल

दो घड़ी ज़िंदगी ये जी साहिब

.

मरने में आएगा मज़ा हमको

क़त्ल कर दे हंसी नजर  साहिब

.

जाम हाथों में इक बहाना है

हम कहाँ करते मयकशी साहिब

.

मैं नहीं बज्म में कभी आया

बात उसको ये खल गयी साहिब

.

डूब जायेंगे हम समंदर में

हो समंदर…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on July 11, 2013 at 3:30pm — 3 Comments

याद दिन हम को सुहाने आ रहे हैं

याद दिन  हम  को सुहाने आ  रहे हैं

फिर से उन यादों के बादल छा रहे हैं 

हमने घर अपनें बनाये रेत  पर जब

याद  वो  बचपन के मंजर आ रहे हैं

कोयलों  नें धुन  सुरीली  छेड़  दी है

गीत  भी    दीवानें  भौंरे    गा रहे हैं

कर  दिया है आज टुकड़े टुकड़े दिल

छोड़ कर  हम बज्म  सारी जा रहे हैं

माल  पूआ  खाए मुद्दत  हो गयी थी

ख्वाब में   देखा अभी  हम खा रहे हैं

आशु ये  महफ़िल हसीनो  से भरी…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on July 2, 2013 at 5:00pm — 13 Comments

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