For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मनोज अहसास's Blog – July 2015 Archive (3)

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (मनोज कुमार अहसास)

2122 2122 2122 212



इश्क़ मे बेहाल होकर इतना हासिल हो गया

तेरी आहट से यहाँ हर लम्हा महफ़िल हो गया



फैसला करना मुझे ये आज मुश्किल हो गया

दिल से मुझको गम मिला या गम से यूँ दिल हो गया



रात सी चादर लपेटे बर्फ से वो सामने

आखिरी लम्हा मेरा जीने के काबिल हो गया



यूँ तो उसने बेबसी के सब फ़साने लिख दिए

ये नहीं कह पाया कैसे खुद का कातिल हो गया



डबडबाया कुछ ज़रा फिर जज्ब सब कुछ हो गया

किस कदर महफूज़ उन झीलों का साहिल हो गया…



Continue

Added by मनोज अहसास on July 26, 2015 at 4:00pm — 11 Comments

ग़ज़ल - इस्लाह के लिए

2122 2122 2122 212



या तो चाहत इश्क़ में थी या खुदा पाने में थी

एक समंदर की सी तमन्ना आँख के दाने में थी



बेगुनाही एक जिद इक़बाल जब तेरी ख़ुशी

और मेरी हर सजा तेरे बिछड़ जाने में थी



होश के इस फैसले से क्या मुझे हासिल हुआ

ज़िन्दगी की हर ख़ुशी छोटे से पैमाने में थी



सांस लेता है ये जाने कौन किसका जिस्म है

ज़िन्दगी तो अपनी तेरे गम के वीराने में थी



ये नहीं हासिल हुआ या वो नहीं मुमकिन हुआ

कशमकश ये हर घडी इस दिल को थर्राने में…

Continue

Added by मनोज अहसास on July 13, 2015 at 8:30am — 14 Comments

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल____Manoj kumar ahsaas

सुबह आयी

तेरे इंतज़ार की खुशबू लेकर

फिर तमाम दिन मुझे तेरा इंतज़ार रहा

शाम आयी

तेरे ना आने की मायूसी लेकर

फिर तमाम रात अंधेरो मे ढूढ़ा है तुझे

और बांधी है उम्मीद अगली सुबह से

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल

तू कहाँ था?

आज आया है

तो मेरी आँखों में चमक ही नहीं

बुझ गया है तेरा इंतज़ार

जला कर खुद को

तुझको पाने को लगाया था खुद को दाँव पर

ऐसा लगता है

तुझ को पाया है खोकर खुद को

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल

तू कहाँ था?

साथ लेकर… Continue

Added by मनोज अहसास on July 1, 2015 at 1:45pm — 13 Comments

Monthly Archives

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद  _______ लड्डू चिवड़ा रेवड़ियों से,सजा हुआ है थाल। मौसम ने ले ली है करवट, परे उदासी…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . .बेटी
"सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।.....मानना क्या यह…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, पतंग के माध्यम से आपने बहुत कुछ कह दिया है. बहुत सुन्दर और सार्थक इस…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, नवगीत का पूरा निचोड़ शीर्षक में आ गया है. जहाँ भी जिसका ज़ोर होता है वह…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, निर्धन की पीड़ा पर सार्थक कुण्डलिया छंद रचा है आपने.हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रथम देरी से प्रतिक्रिया के लिए क्षमा चाहता हूँ. आपकी यह विस्तृत और…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्रानुसार बहुत उत्तम सरसी छंद रचे हैं आपने. मकर…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद * माह जनवरी आए अबकी, एक  साथ दो पर्व। उनकी ख़ुशी मनाता भारत,  देश हमारा…"
2 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटीबेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात । बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे …See More
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

हादिसाते-शायरी (नज़्म) – रवि भसीन 'शाहिद'

दावतनामा हमको आया एक मुशायरे में शिरकत काजिस में अपनी शायरी पढ़ना बाइस था बेहद इज़्ज़त काकिया इरादा…See More
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"  सरसी छंद  : मकर संक्रांति  अनूठे     संस्कार   …"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूप सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
9 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service