For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naveen Mani Tripathi's Blog – July 2017 Archive (8)

मेरी आबाद मुहब्बत को मिटाने वाले

2122 1122 1122 22

मेरी आबाद मुहब्बत को मिटाने वाले ।

तू सलामत रहे यूँ छोड़ के जाने वाले ।।



चन्द रातों की मुलाकात न् सोने देगी ।

याद आएंगे बहुत नींद चुराने वाले ।।



कितना बदला है जमाने का चलन देख जरा ।

तोड़ जाते हैं ये दिल ,प्यार निभाने वाले ।।



इस तरह रूठ के जाने की जरूरत क्या थीं।

यूँ किताबों में गुलाबों को छिपाने वाले ।।



खास अशआर लिखे थे जो कभी खत में तुझे ।

क्या मिला तुझ को मेरे ख़त को जलाने वाले ।।



आज निकले वो… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 25, 2017 at 2:30am — 8 Comments

हौसला फिर कोई बड़ा रखिये

2122 1212 22



हौसला फिर कोई बड़ा रखिये ।

खुद के होने की इत्तला रखिये ।।



जिंदगी में सुकूँ ज़रूरी है ।

आसमां सर पे मत उठा रखिये ।।

‌

बन्द मत कीजिये दरीचों को ।

इन हवाओं का सिलसिला रखिये ।।



हार जाएं न कोशिशें मेरी ।

मेरे खातिर भी कुछ दुआ रखिये ।।



खो न जाऊं कहीं जमाने में ।

हाल क्या है जरा पता रखिये ।।



दुश्मनी खूब कीजिये लेकिन ।

दिल से जुड़ने का रास्ता रखिये ।।



गर जमाने के साथ है चलना ।मुज़रिमों से… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 18, 2017 at 10:11am — 12 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 1122 22



है कोई तिश्नगी जरूर तेरी आँखों में |

मीठे एहसास का सरूर तेरी आँखों में ||



जब भी देखा गया ये अक्स किसी दर्पण में ।

बे अदब आ गया , गुरूर तेरी आँखों में ||



ख़ास मुश्किल के बाद ही तेरे दर तक पहुँचा ।

कुछ उमीदें दिखीं हैं दूर तेरी आँखों में ।।



मैं तो हाज़िर था तेरीे एक नज़र पर साकी ।

बेसबब क्यो हुआ फितूर तेरी आँखों में ।।



जाम छलके नहीं है आज तलकभी तुझसे ।

है बड़ा कीमती शऊूर तेरी आँखों में… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 16, 2017 at 6:30pm — 11 Comments

कोई हसरत उफ़ान तक आई

2122 1212 22



बात दिल की जुबान तक आई ।

कोई हसरत उफ़ान तक आई ।।



मैं नहीं बन्द कर रहा कोटा ।

यह बहस संविधान तक आई ।।



हौसले फिर जले सवर्णो के ।

रोशनी आसमान तक आई ।।



फायदा क्या मिला हुकूमत से ।

बस नसीहत लगान तक आयी ।।



मिटती हस्ती को देखता हूँ मैं ।

आंख जब भी रुझान तक आई ।।



यह नदी इंतकाम की खातिर ।

आज हद के निशान तक आई ।।



हक जो मांगा है,औरतों ने कभी ।

रोज चर्चा कुरान तक आई ।।



बूंद… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 15, 2017 at 2:26pm — 16 Comments

वो हमारा आइना हो जाएगा ।

2122 2122 212



वो हमारा आइना हो जाएगा ।

सच कहूँ दिल का खुदा हो जाएगा ।



हैं विचाराधीन सारे जुर्म क्यों ।

वह इलेक्शन में खड़ा हो जाएगा ।।



देखना तुम भी इसी बाजार में ।

सच भी कोई मकबरा हो जाएगा ।।



फैसले होंगे उसी के हक़ में अब ।

हाकिमों से मशबरा हो जाएगा ।।



इस सियासत में कोई जल्लाद भी ।

जिंदगी का रहनुमा हो जाएगा ।।



फिर कहर ढाने लगा है वह शबाब ।

हुस्न पर कोई फ़ना हो जाएगा ।।



शरबती आंखों की हरकत…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 10, 2017 at 10:00am — 8 Comments

गज़ल

*2122 1122 1122 22*

इस तरह अम्न को बर्बाद करेगी दुनिया ।

फिर नए जुर्म की तादाद करेगी दुनिया ।।



छीन लेती है निवाले भी मेरे बच्चों से ।

कब तलक कर्ज से आज़ाद करेगी दुनियां ।।



जब भी मकसद का शजर बनके नज़र आऊंगा।

मेरी ताक़ीद पे फरियाद करेगी दुनिया ।।



रोज उठता है धुंआ एक कहानी लेकर ।

क्या बताऊँ की किसे याद करेगी दुनिया ।।



है सराफ़त से तेरी बज्म में जीना मुश्किल ।

साफ दामन पे बहुत शाद करेगी दुनिया ।।



कत्ल करने का सलीका भी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 8, 2017 at 11:27pm — 9 Comments

गज़ल

*2122 1122 1122 22*

इस तरह अम्न को बर्बाद करेगी दुनिया ।

फिर नए जुर्म की तादाद करेगी दुनिया ।।



छीन लेती है निवाले भी मेरे बच्चों से ।

कब तलक कर्ज से आज़ाद करेगी दुनियां ।।



जब भी मकसद का शजर बनके नज़र आऊंगा।

मेरी ताक़ीद पे फरियाद करेगी दुनिया ।।



रोज उठता है धुंआ एक कहानी लेकर ।

क्या बताऊँ की किसे याद करेगी दुनिया ।।



है सराफ़त से तेरी बज्म में जीना मुश्किल ।

साफ दामन पे बहुत शाद करेगी दुनिया ।।



कत्ल करने का सलीका भी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 8, 2017 at 11:27pm — No Comments

ग़ज़ल

*221 2121 1221 212*



किस्मत ने उस के साथ करिश्मा नहीं किया ।

जिसने कभी वफ़ा से किनारा नहीं किया ।।



रहना पड़ा उसी के बज़्म में तमाम उम्र ।

जिसने हमारा साथ गवारा नहीं किया ।।



कितनी मिली जफ़ा है मुहब्बत के वास्ते ।

तुमने कभी हिसाब पे चर्चा नहीं किया ।।



कानून पास हो चुके मुद्दों के नाम पर ।

किसने कहा करों में इजाफा नहीं किया ।।



लुटती है आबरू जो सरेआम शह्र में ।

कहते हैं लोग हुस्न पे परदा नहीं किया ।।



शायद कोई ख़ता… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 2, 2017 at 4:15pm — 8 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
yesterday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service