For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – June 2020 Archive (5)

लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२



पाँवों में  छाले  देख  के  राहें नहीं खिली

दिनभर थकन से चूर को रातें नहीं खिली।१।

**

सुनते हैं  खूब  रख  रहे  पहलू में अजनबी

यार ए सुखन से आपकी आँखें नहीं खिली।२।

**

थकते  न  थे  जो  दूरी  का  देते  उलाहना

उनकी ही मुझको देख के बाँछें नहीं खिली।३।

**

लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर

कहता  है  कौन  घर  मेरे  रातें  नहीं खिली।४।

**

लाया करोना  दर्द  तो राहत भी साथ में

ताजी हवा में कौन सी साँसें नहीं…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 29, 2020 at 9:20am — 4 Comments

गेहूँ रहा अलीक न यूँ ही गुलाब से

२२१/२१२१/१२२१/२१२



मारा करे हैं  लोग  जो गम को शराब से

लाते खुशी को देखिए कितने हिसाब से।१।

**

खुशबू है भारी भूख पे सुनते जहान में

गेहूँ रहा  अलीक  न  यूँ  ही  गुलाब से।२।

**

लाता नहीं है होश भी अपने ही साथ क्यों

शिकवा है हमको एक ही यारो शबाब से।३।

**

साधी है हमने यूँ नहीं हर एक तिश्नगी

गुजरा है अपना दौर भी यारो सराब से।४।

**

उनको तो कुर्सी चाहिए पापों की नींव पर

मतलब न रखते आज भी सेवक सवाब…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 8, 2020 at 11:11am — 2 Comments

राजन तुम्हें पता - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



छलकी बहुत शराब क्यों राजन तुम्हें पता

उसका नहीं हिसाब क्यों राजन तुम्हें पता।१।

**

हालत वतन के पेट की कब से खराब है

देते नहीं जुलाब क्यों राजन तुम्हें पता।२।

**

हम ही हुए हैं गलमोहर इस गम की आँच से

बाँकी हुए गुलाब क्यों राजन तुम्हें पता।३।

**

हर झूठ सागरों सा है इस काल में मगर

सच ही हुआ हुबाब क्यों राजन तुम्हें पता।४।

**

सुनते थे इन का ठौर तो बस रेगज़ार में

सहरा में भी सराब क्यों राजन तुम्हें…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 5, 2020 at 10:30am — 13 Comments

गंगादशहरा पर कुछ दोहे

...............

गंगा जी ने जिस दिवस, धरे धरा पर पाँव

माने गंगा दशहरा, मिलकर पूरा गाँव।१।

**

विष्णुपाद से जो निकल, बैठी शंकर भाल

प्रकट रूप में फिर चली, गोमुख से बंगाल।२।

**

करती मोक्ष प्रदान है, भवसागर से तार

भागीरथ तप से हुआ, हम सबका उद्धार।३।

**

गोमुख गंगा धाम है, चार धाम में एक

जिसके दर्शन से मिटें, मन के पाप अनेक।४।

**

अमृत जिसका नीर है, जीवन का आधार

अंत समय जो ये मिले, खुले स्वर्ग का द्वार।५।

**

अद्भुत गंगाजल कभी, पड़ें…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 1, 2020 at 1:39pm — 4 Comments

उम्मीद क्या करना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल)

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२



रहेगा साथ सूरज यूँ  सदा  उम्मीद क्या करना

जलेगा साँझ होते ही दिया उम्मीद क्या करना।१।

**

जो बरसाता रहा कोड़े सदा निर्धन की किस्मत पर

करेगा आज  थोड़ी  सी  दया  उम्मीद  क्या करना।२।

**

बनाये  दूरियाँ  ही  था सभी  से  गाँव  में  भी  जो 

नगर में उससे मिलने की भला उम्मीद क्या करना।३।

**

चला करती है उसकी जब इसी से खूब रोटी सच

वो देगा छोड़ छलने की…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 1, 2020 at 5:00am — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
yesterday
Sushil posted blog posts
yesterday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
yesterday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service