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Manan Kumar singh's Blog – March 2017 Archive (4)

गजल(जब हवा बदली हुई है)

2122 2122
जब हवा बदली हुई है
साँस उनकी क्यूँ थमी है?1

अश्क के थे रश्कजादे
अब नजर में क्यूँ नमी है?2

क्या हुआ अबतक पता सब
ढूँढ़ ली जाती कमी है।3

ओहदे सेवा की' सूरत
शोहदों का सच यही है।4

आसमां भर तार माफिक
आरजू होती रही है।5

जो किया जाता रहा तब
लग रहा था सच वही है।6

जो सँजोये धन चुराकर
खुल रही उनकी बही है।7
@मौलिक व अप्रकाशित

Added by Manan Kumar singh on March 29, 2017 at 7:31am — 13 Comments

गजल(दूर कहीं से कौड़ी आई)

22 22 22 22
दूर कहीं से कौड़ी आई-
आओ साथ बनाओ भाई।1

बाल बचे जो मुड़ जायें मत
डरता रहता टकलू नाई।2

जीत दिलाने में पिछड़ी हैं
बरबोलों की माई-जाई।3

सहमी जातीं समता-ममता
माया ने सब नाच नचाई।4

खेत चरे क्यूँ बतलायेंगे
चिल्लाते सब 'राम दुहाई'।5

माथा पीट रहे मुँहझौंसे
निज करनी ने लंका ढ़ाई।6

योग लगन ग्रह वार जुटे सब
किसको किसकी बाजी भाई?7
@मौलिक व अप्रकाशित

Added by Manan Kumar singh on March 28, 2017 at 1:30pm — 5 Comments

गजल(कुर्सियाँ किसकी हुईं हैं बोलिये भी)

#गजल#-103

.

कुर्सियाँ किसकी हुई हैं बोलिये भी
गाँठ में क्या-क्या छिपा है खोलिये भी।1

आपको भी क्या न करना पड़ गया है
हो न सकते साथ जिनके,हो लिये भी।2

जानते सब कुर्सियों की कीमतें हैं
हम भुला खुद को जरा-सा तोलिये भी।3

घोलते आये फ़िजां में क्या नहीं कुछ
अब जहर फिरसे यहाँ मत घोलिये भी।4

कुर्सियों के ताव में कुछ कर गये थे
चोट खायी खूब हमने गो लिये। भी।5
@मौलिक व अप्रकाशित)

Added by Manan Kumar singh on March 27, 2017 at 9:30am — 9 Comments

गजल(पूछते लोग सब.....)

212 212 212 212
 लोग सब पूछते,  हम कहाँ जा रहे
आ गये दिन भले या अभी आ रहे।2

कौन क्या कह गया याद अब है कहाँ
रेवड़ी देखकर खूब ललचा रहे।2

कुल जमा देखिये बादलों की कला
हर बरस बूँद में खार बरसा रहे।3

रात के हाथ से बुझ गयीं बत्तियाँ
बोलते भी जरा कौन दिन ला रहे।4

जोर से पीटते ढ़ोर सब ढ़ोल हैं
कोकिला चुप हुई काग बस गा रहे।5
मौलिक व अप्रकाशित@

Added by Manan Kumar singh on March 7, 2017 at 8:00pm — 20 Comments

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