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MAHIMA SHREE's Blog – March 2012 Archive (4)

इन्तजार की अवधि

मृत्यु जब तक तुम्हे

वरण नहीं कर लेती

तब तक करो इन्तजार

रखो अटल  विश्वास

गले लगा लो

सारी  प्रवंचनाएं

मत ठुकराओ

दुनियावी…

Continue

Added by MAHIMA SHREE on March 29, 2012 at 10:17pm — 16 Comments

निजत्व की खातिर

निजत्व की खातिर

कर्तव्यो की बलिवेदी से

कब तक भागेगा इन्सान

ऋण कई हैं

कर्म कई हैं

इस मानव -जीवन के

धर्म कई हैं

अचुत्य होकर इन सबसे

क्या कर सकेगा

कोई अनुसन्धान

कई सपने हैं

कई इच्छाये हैं

पूरी होने की आशाये हैं

पर विषयों के उद्दाम वेग से

कब तक बच सकेगा इन्सान

भीड़-भाड़ है

भेड़-चाल है

दाव-पेंच के

झोल -झाल है

इनसे बच कर अकेला

कब तक चलेगा…

Continue

Added by MAHIMA SHREE on March 15, 2012 at 4:30pm — 60 Comments

चेहरे.....

चेहरे के पीछे

चेहरे है

उन पे कसे नकाब

बड़े तगड़े है..

मीठे बोलो के भीतर

तीखेपन का खंजर है..

घावों पे मरहम तो है

पर दाग बने गहरे है

लोग बने मदारी है.. और

समझे हमे जमूरा

मतलब की यारी है और

जमकर सीनाजोरी है

संभल संभल के हँसना है और

नाप तोल के कहना

मन के दुखड़े खोले तो

कहते है रोना धोना

खुल के जीने का

दम भर लो कितना भी

पर बच बच के है रहना

दुनिया गर…

Continue

Added by MAHIMA SHREE on March 12, 2012 at 5:30pm — 16 Comments

अंतस का कोना...

बतकही कितनी भी
कर लूँ
रहता है खाली खाली
अंतस का कोना
ढोल बजा लूँ कितनी भी
रहता है सुना सुना
अंतस का कोना
शब्दों का मायाजाल है
जिंदगी का ख्याल है
कोशिश कितनी भी कर लूँ
रहता उदास है
अंतस का कोना
इश्वर के दरबार में
सब के लिए अरदास है
चलो अक दीप जला लूँ
जुगनुओ को दोस्त बना लूँ
अपनेपन के शोर से
गुंजित कर लूँ
अंतस का कोना.....

Added by MAHIMA SHREE on March 2, 2012 at 5:52pm — 9 Comments

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