For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2026 Blog Posts (10)

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस



बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।

कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।



घास घूस की भा रही, हर बाबू को आज ।

जेब दनादन भर रहे, लेकिन रखते राज ।।



जिसको देखो घूस का, अजब लगा है रोग ।

घूसखोर समझे नहीं, पाप पंक के भोग ।।



बिना घूस होता नहीं, कोई भी हो काम ।

छोटे आते जाल में, बड़े रहें गुमनाम ।।



बाँछें खिलतीं मेज पर, जब भी  आता काम ।

बाबू भरता घूस से, अपने घर गोदाम ।।



खुलेआम अब घूस का,…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 18, 2026 at 8:00pm — 5 Comments

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यार

प्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।

आपस का विश्वास ही, इसका है आधार ।।

प्यार नाम समर्पण का, इसके अन्तर त्याग ।

इसकी सच्ची लाग का, है सच्चा  अनुराग ।।

प्यार ईश की वन्दना, प्यार जगत् का सार ।

प्यार दिखावे से परे, प्यार मौन शृंगार ।।

निहित नहीं है प्यार में, नफरत की दुर्गंध ।

इसके भावों में छुपे, प्रेम गीत के बंध ।।

प्यार रूह इसरार की, प्यार नहीं इंकार ।

गहरा होता प्यार में, प्यार भरा अभिसार…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 16, 2026 at 7:47pm — No Comments

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में

आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१।

*

अवसर समानता का कहे सम्विधान तो

पर  लोकतंत्र  व्यस्त  हुआ  भेदभाव में।२।

*

करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को

फिर से जिला  दिया  है  उसे  ताव-ताव में।३।

*

खतरा नहीं है घाव से मरहम से है मगर

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में।४।

*

सम्पन्न देश हो न हो इतना तो हो मगर

जीवन…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 14, 2026 at 5:09pm — 2 Comments

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 

अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध ।

मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।।

 

प्रेम लोक की कल्पना, जब होती साकार ।

काबू में कैसे रहे, मौन मिलन संसार ।।

 

अधरों की मनुहार का, अधर करें अनुवाद ।

शेष कपोलों पर रहे, वेगवान उन्माद ।।

 

अभिसारों की आँधियाँ, अधरों के उत्पात ।

कैसी बीती क्या कहें, मदन वेग की रात ।।

 

बातें बीती रात की, कहते आए लाज ।

लाख छुपाया खुल गए, सुर्ख नयन से राज ।।

 

सुशील…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 8, 2026 at 9:00pm — 3 Comments

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

******

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये

उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१।

*

गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली

उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२।

*

घर में बहार नल से जो आयी गरीब के

पनघट हर एक गाँव  के वीरान हो गये।३।

*

भारी हुए जो उनके ये व्यवहार कर्म पर

सारे ही फर्ज, कौम को अहसान हो गये।४।

*

हाथों अपढ़ के देखते शासन की डोर है

पढ़ लिख गये जो देश में दरवान हो…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 7, 2026 at 6:23am — 1 Comment

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिल

रात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।

फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।

उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान ।

सोच रहा वह  इश्क में, क्या पाया नादान ।।

आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।

नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।

ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार ।

जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।

कैसी ख्वाहिश कर रहा  , पागल दिल नादान ।

आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।

सुशील…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 4, 2026 at 8:30pm — No Comments

दोहा सप्तक. . . .नैन

दोहा सप्तक. . . . नैन

नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।

नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।

नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।

हृदय पृष्ठ पर प्रेम के,  अंकित होते छन्द ।।

नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।

नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।

नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।

नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।

बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।

नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।

नैन उदधि में प्रेम का, जब…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 3, 2026 at 8:02pm — No Comments

ग़ज़ल

2122    1212    22

 

आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में

क्या से क्या हो गए महब्बत में

 

मैं ख़यालों में आ गया उस की

हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में

 

मुझ से मुझ ही को दूर करने को 

आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में

 

तुम ख़यालों में आ जाते हो यूं

चीन ज्यूँ आ गया तिब्बत में

 

चाट कर के अफीम मज़हब की

मरते हैं क्यूँ ग़रीब ग़फ़लत में

 

ए ग़रीबी है शुक्रिया तेरा

जो भी सीखा है सीखा ग़ुर्बत…

Continue

Added by Jaihind Raipuri on February 3, 2026 at 10:30am — 7 Comments

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२
**
अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमी
एक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।
*
आदमीयत जहाँ खूब महफूज हो
एक ऐसा कवच मढ़ सके आदमी।२।
*
दूर नफ़रत का जंजाल करले अगर
दो कदम तब कहीं बढ़ सके आदमी।३।
*
खींचने में लगे  पाँव अपने ही अब
व्योम कैसे सहज चढ़ सके आदमी।४।
*
तब मनुज देवता हो गया जान लो
लोक मन में अगर कढ़ सके आदमी।५।
**
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 1, 2026 at 11:24pm — No Comments

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

मिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।

निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।

लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ ।

वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।

पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में  संबंध ।

आती है अपनत्व में , स्वार्थ भाव की गंध ।।

वाणी कर्कश हो गई, भूले करना मान ।

संबंधों को लीलती , धन की झूठी शान ।।

रिश्तों में माधुर्य का, वक्त गया है बीत ।

अब तो बस पहचान की ,निभा रहे हैं रीत ।।

सुशील…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 1, 2026 at 4:00pm — 2 Comments

  • ❮ First
  • Next ❯

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service