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राजेश 'मृदु''s Blog – February 2013 Archive (5)

शपथ

अभिचार सा

करता

छिड़कता जल

चला था,

शून्‍य पथ

धर अफीमी

रूप कोई

रात थी

बेहद सुरत

कुछ धुरंधर

मेघ भी तो

कर गए

नि:शब्‍द ही

गलफड़े भर

श्‍वांस भरके

थे खड़े

कुछ दर्द भी

ढह ना पाई

रोशनी पर

ना हुई

पथ से विपथ

करबले की

ओर बढ़ते

पांवों में थी

जो शपथ

Added by राजेश 'मृदु' on February 28, 2013 at 12:31pm — 9 Comments

बोल मेरे अर्पण

बोल मेरे अर्पण

तुझको क्‍या लुभाए

डैनें बांध रहना

या उड़ना जग उठाए

मूड़ता जो माथा

है वह अनादि गाथा

आवर्त की ये रूनझुन

पथ में सभी ने पाए

रोहित न हो तू लोहित

आकर है तू तो शोभित

स्‍वर दे जरा गमक दे

अनहद तुझे बुलाए

इक दृष्टि अपलक दे

सोंधी सी इक धमक दे

यह चक्र जो अनघ है

सबको ही आजमाए

नीरव निशा जो रहती

श्‍यामल सी चोट सहती

भासित उसी से…

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on February 26, 2013 at 10:54am — 4 Comments

जब कामदेव संतप्‍त हुए (चौपाई)

जब शिवजी का ध्‍यान भंग करने के लिए मदनदेव को कहा गया तो वे राजी तो हो गए किंतु उनका मन गहरी सोच में पड़ गया उनकी कशमकश को दर्शाने के लिए चौपाईयां लिखी जिसमें आवश्‍यक सुधार आदरणीय अम्‍बरीष जी ने सुझाया जिसके बाद इसे ओबीओ के पटल पर रखने का साहस कर पा रहा हूं ।…

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on February 8, 2013 at 12:07pm — 5 Comments

बिना किसी अनुरणन के

*मध्‍यमेधा का

एक चम्‍मच सूरज उठाए

कर्मनाशा आहूतियों को

जब भी मढ़ना चाहा

राग हिंडोल के वर्क से

अतिचारी क्षेपक

हींस उठे

पिनाकी नाद से

और डहक गया

सारा उन्‍मेष.......

तकलियां.....

बुनती ही रहीं

कुहासाछन्‍न आकाश

बिना किसी अनुरणन के

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

*मध्‍यमेधा- मध्‍यम वर्ग की मेधा (बांग्‍ला शब्‍दार्थ)

Added by राजेश 'मृदु' on February 6, 2013 at 1:53pm — 10 Comments

फिर भी क्‍योंकर

मन में अक्षय स्‍नेह सभी के

समरस भाव प्रवणता है

फिर भी जाने क्‍योंकर सबने

बांटी कलुष,कृपणता है

छूत-पाक का लावा-लश्‍कर

हुलस चूम कब यम आया

कसक धकेले, सदा अकेले

बूंद-बूंद कब ग़म आया

फंसा जुए में गला सभी का

पगतल अतल विकलता है

जाने फिर भी हर लिलार पर

किसने मली खरलता है

तपिश उड़ेले स्‍वाद कषैले

लिए जागते दीप कहां

रूचिर अधर पर लुटे प्राण को

मिला दूसरा सीप…

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on February 1, 2013 at 11:19am — 10 Comments

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