For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम ही कहो अब

क्या मैं सुनाऊँ

सरगम के सुर

ताल हैं तुम से

सारी घटाएँ

बहकी हवाएँ

फागुन की हर

डाल है तुमसे

तुम ही कहो .......

तुम बिन अँखियन

सरसों फूलें

रीते सावन

साल हैं तुमसे

तेरी छुअन से

फूली चमेली

शारद की हर

चाल है तुमसे

तुम ही कहो .......

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 739

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 3:01pm

आदरणीय राजेशजी, आप अपनी उक्त रचना पर मेरी टिप्पणी को फिर से देख जायें तथा इस रचना के शिल्प संदर्भ से तुलनात्मक अध्ययन करें. संभवतः बहुत कुछ स्पष्ट हो पायेगा.

सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on December 20, 2013 at 1:23pm

आदरणीय, मेरी पिछली कविता पर आपके एवं आदरणीय प्राची जी द्वारा कुछ मार्गदर्शन प्राप्‍त हुए थे, उसी अनुक्रम में तस्‍दीक करना चाहता था कि इस बार कितना सफल रहा, सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 3:31am

रचना की प्रस्तुति हेतु बधाई 

//इस रचना को मैंनें मात्रिकता एवं गेयता दोनों के लिहाज से सुघड़ एवं गुनगुनाने योग्‍य रखने का प्रयास किया है, इस संबंध में आप सबके स्‍नेह एवं मार्गदर्शन का आकांक्षी हूं,//

आदरणीय, इस उद्घोषणा का अर्थ नहीं समझ पाया मैं. कृपया उन्मीलित करें..

सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on December 19, 2013 at 1:22pm

आप सबका हार्दिक आभार, सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 19, 2013 at 8:37am

सुंदर मनमोहक कविता से मन आनंदित हो गया, आदरणीय राजेश जी हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on December 18, 2013 at 6:20pm

बहुत खूब...

सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आ राजेश मृदु जी..

Comment by राजेश 'मृदु' on December 18, 2013 at 5:56pm

मंच के सुधी जनों से कहना भूल गया था कि इस रचना को मैंनें मात्रिकता एवं गेयता दोनों के लिहाज से सुघड़ एवं गुनगुनाने योग्‍य रखने का प्रयास किया है, इस संबंध में आप सबके स्‍नेह एवं मार्गदर्शन का आकांक्षी हूं, सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on December 18, 2013 at 5:00pm

आप सबका हार्दिक आभार, सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 18, 2013 at 12:37pm

राजेश जी

मधुर भावनाओ से सजी इस कविता के लिए आपको साधुवाद i

Comment by savitamishra on December 18, 2013 at 11:48am

sundar

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
Friday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service