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सतविन्द्र कुमार राणा's Blog – January 2017 Archive (3)

निराशा को आशा बनाता रहेगा(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा

122 122 122 122

बिना बात बातें बनाता रहेगा

शरारत से सब को छकाता रहेगा।



निराशा को आशा बनाता रहेगा

तेरा दिल ये तुझको सिखाता रहेगा।



हमेशा ही मन काला जिसका रहा है

वो नजरें सभी से चुराता रहेगा।



मजा जिसको आता चिढ़ाने में सबको

चढ़ाता रहेगा गिराता रहेगा।



नहीं भूल ये,नूर तुझमें बसा है

तू तारों सा ही टिमटिमाता रहेगा।



फरेबों में जिसकी चली जिंदगानी

वो हरदम किसी को सताता रहेगा।



रहे जुल्म होते जो जनता पे… Continue

Added by सतविन्द्र कुमार राणा on January 30, 2017 at 10:41am — 10 Comments

तरही गजल/सतविन्द्र कुमार राणा

1222 1222 1222 122

चला दुनिया को समझाने जो घर तकरार रखता है

नहीं हैं पूछते अपने वो क्या अधिकार रखता है?



चला है जीतता वो जो,खुदा से प्यार रखता है

भले ही जीत मिलती याद फिर भी हार रखता है



जमीं अपनी नहीं कोई यही लेकिन गुमाँ दिल में

*वो अपनी मुठ्ठियों में बांधकर संसार रखता है!*



लगा क्यों दब गया है वो सभी जुल्मों से अब डरकर?

खमोशी सी है चहरे पे मगर ललकार रखता है।



हमेशा चाहता अच्छा जो भी अपने ही बच्चों का

दिखे है सख्त ऊपर से वो… Continue

Added by सतविन्द्र कुमार राणा on January 6, 2017 at 4:43pm — 9 Comments

तरही गजल/सतविन्द्र कुमार राणा

तरही गजल

बह्र:122 122 122 122

काफ़िया:अर

रदीफ़:देख लेना

---

गरीबों के दिल में है डर देख लेना

अमीरों की तिरछी नजर देख लेना।



नहीं तीरगी की हमें फ़िक्र कोई

नए हौंसलों की सहर देख लेना।



जरूरत नहीं है अभी बोलने की

खमोशी जो लाए ग़दर देख लेना।



मुहब्बत को मेरी भुला क्या सकेंगे?

*वो आएँगे थामे जिगर देख लेना।*



मेरा दर्द ही दर्द उनका बना है

मेरे अश्क उन गाल पर देख लेना।



सहारा बनोगे तभी फल वो देंगे

जरा… Continue

Added by सतविन्द्र कुमार राणा on January 1, 2017 at 10:30am — 28 Comments

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