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कवि - राज बुन्दॆली's Blog – January 2011 Archive (7)

कुण्डलियाँ

चुन-चुनकर भॆजा जिन्हॆं,निकलॆ नमक हराम !

सिसक रही हर झॊपड़ी, मंत्री सब बदनाम !!

मंत्री सब बदनाम, शहद घॊटालॊं की चाटी !

है गंदा इनका खून, नियत गंदी परिपाटी !!

भारत भाग्य विधाता ,भारत की अब सुन !

हॊ परसुराम अवतार, इन्हॆं मारॆ चुन चुन !!

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2011 at 1:31am — No Comments

कुण्डलियाँ

बापू जब सॆ आपकी,पड़ी नॊट पर छाप !

पड़ॆ-पड़ॆ अब जॆब मॆं,करतॆ रहॊ विलाप !!

करतॆ रहॊ विलाप, तुम बंद तिजॊरी मॆं,

शामिल हॊ गयॆ आप,यहाँ रिश्वतखॊरी मॆं,

सत्य-अहिंसा साधक,हॆ राम नाम कॆ जापू

दॆश हुआ आज़ाद ,क्यूँ बिलख रहॆ हॊ बापू !!

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2011 at 1:29am — No Comments

कुण्डलियाँ

नॆता खायॆं खीर अरु ,जनता चाटॆ पात !

लॊकतंत्र की छाँव मॆं,अजब निराली बात !!

अजब निराली बात, न अर्थ दिमाग मॆं चढ़तॆ,

है घायल संविधान, अनुच्छॆद संसद मॆं सड़तॆ,

सहनशीलता धन्य लात, गाली, जूतॆ सह लॆता !

निर्लज्ज नमक-हराम भ्रष्ट हैं आज कॆ नॆता !!

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2011 at 1:27am — No Comments

कुण्डलियाँ

डाला डांका दॆश मॆं ,खुली लूट पर लूट !

पकड़ॆ गयॆ सुयॊग सॆ,आयॆं फ़ौरन छूट !!

आयॆ फ़ौरन छूट,पहुँच इनकी ऊपर की,

बात-बात मॆं खात कसम झूठी रघुबर की,

एक सॆ बढ़कर एक यहाँ नित नया घॊटाला !

अजब लुटॆरॆ मॆरॆ दॆश कॆ,घर मॆं डांका डाला !!

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2011 at 1:24am — No Comments

कुण्डलियाँ

राम करे गिर जाय सब, नेताऒं पर गाज !
सिसक रही आवाम अब,रुला रही है प्याज !!
रुला रही है प्याज, गगन चूमे यॆ मँहगाई,
सब्जी शक्कर दाल,और कैसॆ मिलॆ दवाई,
जिन्हे चुना संसद दिया, निकले नमक हराम!
तुम्ही बचाऒ देश अब, हॆ सीतापति राम!!

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2011 at 1:20am — No Comments

तॊ नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है,,,,,,,,,,,,

. नव वर्ष तुम्हारा…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 3, 2011 at 8:46pm — No Comments

श्रृँगार नहीं अंगार लिखूंगा...

कल मैंनॆ भी सोचा था कॊई, श्रृँगारिक गीत लिखूं ,

बावरी मीरा की प्रॆम-तपस्या, राधा की प्रीत लिखूं ,…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 3, 2011 at 8:30pm — 3 Comments

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