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अरुन 'अनन्त''s Blog – January 2014 Archive (3)

दोहे : अरुन 'अनन्त'

बद से बदतर हाल है, नाजुक हैं हालात ।

बोझिल लगती जिंदगी, पल पल तुम पश्चात ।१।



बरसी हैं कठिनाइयाँ, उलझें हैं हालात ।

हर पल भीतर देह में, जख्म करें उत्पात ।२।



दिन काटे कटते नहीं, मुश्किल बीतें रात ।

होता है आठों पहर, यादों का हिमपात ।३।



रूठी रूठी भोर है, बदली बदली रात ।

दरवाजे पर सांझ के, पीड़ा है तैनात ।४।



आती जब भी याद है, बीते दिन की बात ।

धीरे धीरे दर्द का, बढ़ता है अनुपात ।५।



व्याकुल मन की हर दशा, लिखते हैं हर…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on January 23, 2014 at 11:30am — 16 Comments

ग़ज़ल : अरुन 'अनन्त'

बह्र : हज़ज मुरब्बा सालिम


सदा दिन रात भिनसारे,
गिरें नैनों से अंगारे,

हमें पागल वो कहते हैं,
थे जिनकी आँख के तारे,

समझना है कठिन बेहद,
हकीकत प्यार की प्यारे,

घुटन गम दर्द तन्हाई,
लगें अपने यही सारे,

हमारी रूह तक गिरवी,
वो केवल दिल ही थे हारे,

यही अब आखिरी ख्वाहिश,
जहां पत्थर हमें मारे.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by अरुन 'अनन्त' on January 9, 2014 at 11:00am — 33 Comments

ग़ज़ल : अरुन 'अनन्त'

बह्र-ए- खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
2122 1212 22

इश्क में डूब इन्तहाँ कर ली,
यार मुश्किल में अपनी जाँ कर ली,

भा गई सादगी अदा हमको,
जल्दबाजी में हमने हाँ कर ली,

वश में पागल ये दिल नहीं अब तो,
धडकनें छेड़ बेलगाँ कर ली,

पाँव जख्मी लहू से लथपथ हैं,
राह ने ठोकरें जवाँ कर ली,

नाम बदनाम हो न महफ़िल में,
शायरी मैंने बेजबाँ कर ली..

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by अरुन 'अनन्त' on January 4, 2014 at 4:12pm — 36 Comments

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