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siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
" ChiRKuT Bangali saheb ..bahut bahut shukria housla aafzayi ka salamati ho"
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"तह ए दिल से बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय तिलक राज जी सलामती हो "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
" आदरणीय योगराज प्रभाकर  जी आपका आशीर्वाद मिल गया ग़ज़ल को ग़ज़ल सफल हो गयी बहुत बहुत शुक्रिया सलामत रहिये "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"या तो काजल का टीका लगाया करो या मुझे इस क़दर तुम न भाया करो (२)लाजवाब जब निखारा सदा ही बदन धूप से छाँव से मत पसीना सुखाया करो (३)उम्दा बचपने की पनीरी न सूखे कभी सायबाँ से बनो उनपे साया करो (४)बेहतरीनभागती मंजिलें हाथ ना…"
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
" विवक मिश्र जी, .लाजवाब बहुत उम्दा ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
" लाजवाब बहुत उम्दा ग़ज़ल से नवाज़ा है बहुत खूब जवाब नहीं दिली दाद हाज़िर है "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"  आदरणीय आलोक सीतापुरी जी वाह बेहद उम्दा लाजवाब अशआर से आरस्ता लाजवाब ग़ज़ल से नवाज़ा है बहुत खूब जवाब नहीं दिली दाद हाज़िर है "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"ग़ज़ल २ सब्र को अपने यूं आज़माया करो शिद्दत ए ग़म में भी मुस्कुराया करो  दूरियां सब दिलों की मिटाया करो तुम चराग़ ए मोहब्बत जलाया करो हम बुजुर्गों से सुन कर भी समझे नहीं दीन ए हक़ के लिए सर कटाया करो आइना तुमने देखा नहीं आज…"
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"WELL SAID "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"आदरणीय तिलक राज जी आपका आशीर्वाद मिल गया ग़ज़ल को ग़ज़ल सफल हो गयी बहुत बहुत शुक्रिया सलामत रहिये "
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"... देखो अपने गिरेबान में झांक कर  उंगुलियां यूं न सब पर उठाया करो ..आदरणीय गणेश जी बागी .नमस्कार ....मैंने कहा था गिरह का शेर पोस्ट भी किया पहले मगर ऐसा ही शेर किसी और का भी हो गया  मुझे इस मिसरे पर यहीं मिश्रा सही लग रहा था ..मैंने हटा…"
Aug 28, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"गर बनानी है पहचान तुमको नई, लीक से हट के रस्ते बनाया करो॥ आंधियों और तूफान में हूँ पला, ऐ हवाओं न मुझको डराया करो॥ दोस्ती प्यार औ सब्र ईमान को, ज़िंदगी में ज़रूर आजमाया करो॥ आजकल शहर का हाल अच्छा नहीं, शाम ढलते ही घर…"
Aug 27, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"आइना मत बनो सबके चेहरों का तुम खुद का चेहरा भी सबको दिखाया करो --लाजवाब..... उम्दा अशआर  से सजी बहुत ही खूबसूरत और लाजवाब ग़ज़ल दिली दाद हाज़िर है "
Aug 27, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"गर हकीकत पसंदी के शौक़ीन हो  आइने से नज़र मत हटा या करो ३ ....बहुत ही खूबसूरत जोश ये होश को लूट ले जायगा उंगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो ४...  बेहतरीन  . रूप की धूप की रौशनी आरज़ी रूह की चांदनी में नहाया करो ५…"
Aug 27, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
"शाइरी है नियामत ख़ुदा की हमें बात ये शायरो ! मत भुलाया करो दैर का घंट भी तुम बजाओ मगर पाँव पहले पिता के दबाया करो ..... बेहतरीन ग़ज़ल कही हैं  खूबसूरत आला फिक्र से कहे उम्दा अश'आर से आरस्ता…"
Aug 27, 2012
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६
" बेहतरीन ग़ज़ल कही हैं  उम्दा अश'आर से आरस्ता सभी शेर एक से बढ़ कर एक बहुत खूब दिली दाद हाज़िर है"
Aug 27, 2012

Profile Information

Gender
Female
City State
bareilly
Native Place
muradabaad
Profession
free lance writer
About me
very simple down to earth GOD fearing

Siyasachdev's Blog

तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता

Posted on October 11, 2011 at 10:29pm 3 Comments

जो सीने में धड़कता दिल न होता 
तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता॥ 

अगर सच मुच वह होता मुझ से बरहम 
मिरे दुःख में कभी शामिल ना होता॥ 

किसी का ज़ुल्म क्यूँ मज़लूम सहता 
अगर वह इस क़दर बुज़दिल न होता॥

नज़र लगती सभी की उस हसीं को
जो उसके गाल पर इक तिल न होता॥ 

ज़मीर उसका अगर होता न मुर्दा 
तो इक क़ातिल कभी क़ातिल न होता॥

:सिया: महफ़िल में रौनक़ ख़ाक होती 
अगर इक रौनक़े महफ़िल न होता॥

हम तो बेघर हैं किधर जायेगे

Posted on October 6, 2011 at 10:05pm 0 Comments

जिनके घर हैं वो तो घर जायेगे
हम तो बेघर हैं किधर जायेगे

ये खुला आसमाँ हैं छत मेरी
इस ज़मीन पर ही पसर जायेगे

हम तो भटके हुए से राही है
क्या खबर है की किधर जायेगे

आपके ऐब भी छुप जायेगे
सारे इलज़ाम मेरे सर जायेगे

नाम लेवा हमारा कौन यहाँ
हम तो बेनाम ही मर जायेगे

न कोई हमनवां न यार अपना
हम तो तनहा है जिधर जायेगे

ए 'सिया' मत कुरेद कर पूछो
फिर दबे ज़ख्म उभर जायेगे

रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले

Posted on October 4, 2011 at 8:03pm 5 Comments

तू ज़रा सोच कभी अपनी अदा से पहले
कहीं मर जाये न इक शख्स क़ज़ा से पहले 

इस लिए आज तलक मुझ से ख़ताएँ न हुईं 
रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले 

हो सके तो कभी देखो मेरे घर में आकर 
ऐसी बरसात जो होती है घटा से पहले 

ग़मे जानां की क़सम अश्के मोहब्बत की क़सम 
थे बहुत चैन से हम दौरे वफ़ा से पहले 

वह फ़क़त रंग ही भर्ती रही अफसानों में
सब पहुंच भी गए मंजिल पे सिया से पहले 

मुस्कानों में अश्क छुपाती रहती हूँ॥

Posted on October 2, 2011 at 4:59pm 12 Comments

सब को मीठे बोल सुनाती रहती हूँ

दुश्मन को भी दोस्त बनाती रहती हूँ॥



कांटे जिस ने मेरी राह में बोये हैं

राह में उस की फूल बिछाती रहती हूँ॥ 



अपने नग़मे गाती हूँ तनहाई में 

वीराने में फूल खिलाती रहती हूँ॥ 



प्यार में खो कर ही सब कुछ मिल पाता है 

अक्सर मन को यह समझाती रहती हूँ 



तेरे ग़म के राज़ को राज़ ही रक्खा है

मुस्कानों में अश्क छुपाती रहती हूँ॥ 



दिल मंदिर में दिन ढलते ही रोज़ "सिया"

आशाओं के…

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At 1:04pm on December 23, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

बहुत खूबसूरत हैं ...........!!!!!!

At 3:33pm on October 12, 2011, mohinichordia said…

कांटे जिसने राह में .....बहुत खूब 

At 8:34am on October 7, 2011, mohinichordia said…

 खूबसूरत अशआर हैं आपके | |दबे जख्म फिर उभर आयेंगें 

At 8:32am on October 7, 2011, mohinichordia said…

bahut khoob ashaar haen aapke 

At 8:43pm on September 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 8:20pm on September 9, 2011, Admin said…

At 10:00am on September 9, 2011,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है सिया जी !

 
 
 

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