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मिथिलेश वामनकर left a comment for siyasachdev
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें.."
Aug 6, 2015
MAHIMA SHREE commented on siyasachdev's blog post तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता
"नज़र लगती सभी की उस हसीं कोजो उसके गाल पर इक तिल न होता॥ ज़मीर उसका अगर होता न मुर्दा तो इक क़ातिल कभी क़ातिल न होता॥:सिया: महफ़िल में रौनक़ ख़ाक होती अगर इक रौनक़े महफ़िल न होता॥...वाह बहुत खूब .आ. सिया जी आप  बहुत ही अच्छी…"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"आशीष जी सुंदर भावों से सजी इस खूबसूरत ग़ज़ल पर दिल से बधाई"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"न बाहर घर के कोई बात आईकभी  गूंगा  कभी परदा रहा हूँ ||बहुत उम्दा...दिल को छूते हुए एहसासों से सजी हुयी अभिव्यक्ति दी है आपने   मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें ..."
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"अकेला रात की बाँहों में छुपकर, निगाहों की नमी छलका रहा हूँ,.........अरुण जी , बहुत सुंदर प्रवाह है आपकी ग़ज़ल में  सभी अशआर अच्छे हुए हैं  पुरजोर बधाई "
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"रवायत इश्क की भाती नहीं है जफ़ा की रस्म में उलझा रहा हूँ हबीबी निभ गई अपनी भी यारों कि चाकू पीठ पर खाता रहा हूँ..............संजू जी वाह बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है बहुत सुन्दर प्रवाह और सुन्दर शब्द संयोजन के साथ सुन्दर व्यंजना की…"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"खूबसूरत मज़ाहिया कलाम कहा है अलबेला जी शानदार लेखन  बेहतरीन ग़ज़ल, सभी अशआर अच्छे हुए हैं आपको हार्दिक बधाई!"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"उन्होंने क़त्ल भी ऐसे किया की !सभी को ख़ुदकुशी बतला रहा हूँ!!.....बहुत खूब दीपक जी,सुन्दर भावपूर्ण सशक्त ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
" सुन्दर सोच और सुन्दर अभिव्यक्ति ... अच्छा कहने का प्रयास हार्दिक बधाई आपको वंदना जी "
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
" केवल प्रसाद जी सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें "
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"चमक फीकी है पर ललचा रहा हूँ , मैं बीते दौर का  सिक्का रहा हूँ ।  . खिलौनों से बहलता हूँ मैं अब भी, कभी मासूम सा बच्चा रहा हूँ ।  . मुझे रस गंध से पहचान लेना ,तेरी आँखों का मैं सपना रहा हूँ ।  मुहब्बत ? हाँ कभी मुझको…"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"बेहद खूबसूरत ख्यालों से सजी  प्रस्तुति ... बहुत बधाई आपको "
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"मै अपनी शर्त पे जीता रहा हूँ यही तो वज्ह थी तनहा रहा हूँ   मेरी बेचैनियाँ तनहाइयों की उदासी, दर्द ये सहता रहा हूँ  ........शिज्जू जी,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है बेहद खूबसूरत ख्यालों से सजी लाजवाब पेशकश  बहुत बहुत बधाई…"
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"गीतिका जी बहुत उम्दा  ग़ज़ल कही है इन खूबसूरत अश’आर के लिए दाद कुबूल करें।  "
Jul 28, 2013
siyasachdev replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-37
"बहुत ही उम्दा भाव सरिता जी.. बहुत बहुत बधाई आपको "
Jul 28, 2013
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" कोमल अहसासों से लबरेज दिलकश ग़ज़ल  राजेश कुमारी जी .बेहद खूबसूरत ख्यालों से सजी लाजवाब पेशकश  बहुत बहुत बधाई आपको."
Jul 28, 2013

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तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता

जो सीने में धड़कता दिल न होता 
तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता॥ 

अगर सच मुच वह होता मुझ से बरहम 
मिरे दुःख में कभी शामिल ना होता॥ 

किसी का ज़ुल्म क्यूँ मज़लूम सहता 
अगर वह इस क़दर बुज़दिल न होता॥

नज़र लगती सभी की उस हसीं को
जो उसके गाल पर इक तिल न होता॥ 

ज़मीर उसका अगर होता न मुर्दा 
तो इक क़ातिल कभी क़ातिल न होता॥

:सिया: महफ़िल में रौनक़ ख़ाक होती 
अगर इक रौनक़े महफ़िल न होता॥

Posted on October 11, 2011 at 10:29pm — 4 Comments

हम तो बेघर हैं किधर जायेगे

जिनके घर हैं वो तो घर जायेगे
हम तो बेघर हैं किधर जायेगे

ये खुला आसमाँ हैं छत मेरी
इस ज़मीन पर ही पसर जायेगे

हम तो भटके हुए से राही है
क्या खबर है की किधर जायेगे

आपके ऐब भी छुप जायेगे
सारे इलज़ाम मेरे सर जायेगे

नाम लेवा हमारा कौन यहाँ
हम तो बेनाम ही मर जायेगे

न कोई हमनवां न यार अपना
हम तो तनहा है जिधर जायेगे

ए 'सिया' मत कुरेद कर पूछो
फिर दबे ज़ख्म उभर जायेगे

Posted on October 6, 2011 at 10:05pm

रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले

तू ज़रा सोच कभी अपनी अदा से पहले
कहीं मर जाये न इक शख्स क़ज़ा से पहले 

इस लिए आज तलक मुझ से ख़ताएँ न हुईं 
रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले 

हो सके तो कभी देखो मेरे घर में आकर 
ऐसी बरसात जो होती है घटा से पहले 

ग़मे जानां की क़सम अश्के मोहब्बत की क़सम 
थे बहुत चैन से हम दौरे वफ़ा से पहले 

वह फ़क़त रंग ही भर्ती रही अफसानों में
सब पहुंच भी गए मंजिल पे सिया से पहले 

Posted on October 4, 2011 at 8:03pm — 5 Comments

मुस्कानों में अश्क छुपाती रहती हूँ॥

सब को मीठे बोल सुनाती रहती हूँ

दुश्मन को भी दोस्त बनाती रहती हूँ॥



कांटे जिस ने मेरी राह में बोये हैं

राह में उस की फूल बिछाती रहती हूँ॥ 



अपने नग़मे गाती हूँ तनहाई में 

वीराने में फूल खिलाती रहती हूँ॥ 



प्यार में खो कर ही सब कुछ मिल पाता है 

अक्सर मन को यह समझाती रहती हूँ 



तेरे ग़म के राज़ को राज़ ही रक्खा है

मुस्कानों में अश्क छुपाती रहती हूँ॥ 



दिल मंदिर में दिन ढलते ही रोज़ "सिया"

आशाओं के…

Continue

Posted on October 2, 2011 at 4:59pm — 12 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 12:38am on August 6, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..

At 1:04pm on December 23, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

बहुत खूबसूरत हैं ...........!!!!!!

At 3:33pm on October 12, 2011, mohinichordia said…

कांटे जिसने राह में .....बहुत खूब 

At 8:34am on October 7, 2011, mohinichordia said…

 खूबसूरत अशआर हैं आपके | |दबे जख्म फिर उभर आयेंगें 

At 8:32am on October 7, 2011, mohinichordia said…

bahut khoob ashaar haen aapke 

At 8:43pm on September 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 8:20pm on September 9, 2011, Admin said…

At 10:00am on September 9, 2011,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है सिया जी !

 
 
 

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