SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on siyasachdev's blog post तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion प्रतियोगिता परिणाम: "चित्र से काव्य तक" अंक-११ in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तक
siyasachdev replied to Ambarish Srivastava's discussion 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -११' in the group चित्र से काव्य तकPosted on October 11, 2011 at 10:29pm 4 Comments 0 Likes
जो सीने में धड़कता दिल न होता
तो कोई प्यार के क़ाबिल न होता॥
अगर सच मुच वह होता मुझ से बरहम
मिरे दुःख में कभी शामिल ना होता॥
किसी का ज़ुल्म क्यूँ मज़लूम सहता
अगर वह इस क़दर बुज़दिल न होता॥
नज़र लगती सभी की उस हसीं को
जो उसके गाल पर इक तिल न होता॥
ज़मीर उसका अगर होता न मुर्दा
तो इक क़ातिल कभी क़ातिल न होता॥
:सिया: महफ़िल में रौनक़ ख़ाक होती
अगर इक रौनक़े महफ़िल न होता॥
Posted on October 6, 2011 at 10:05pm 0 Comments 0 Likes
Posted on October 4, 2011 at 8:03pm 5 Comments 0 Likes
तू ज़रा सोच कभी अपनी अदा से पहले
कहीं मर जाये न इक शख्स क़ज़ा से पहले
इस लिए आज तलक मुझ से ख़ताएँ न हुईं
रोक देता है ज़मीर आ के ख़ता से पहले
हो सके तो कभी देखो मेरे घर में आकर
ऐसी बरसात जो होती है घटा से पहले
ग़मे जानां की क़सम अश्के मोहब्बत की क़सम
थे बहुत चैन से हम दौरे वफ़ा से पहले
वह फ़क़त रंग ही भर्ती रही अफसानों में
सब पहुंच भी गए मंजिल पे सिया से पहले
Posted on October 2, 2011 at 4:59pm 13 Comments 1 Like
सब को मीठे बोल सुनाती रहती हूँ
दुश्मन को भी दोस्त बनाती रहती हूँ॥
कांटे जिस ने मेरी राह में बोये हैं
राह में उस की फूल बिछाती रहती हूँ॥
अपने नग़मे गाती हूँ तनहाई में
वीराने में फूल खिलाती रहती हूँ॥
प्यार में खो कर ही सब कुछ मिल पाता है
अक्सर मन को यह समझाती रहती हूँ
तेरे ग़म के राज़ को राज़ ही रक्खा है
मुस्कानों में अश्क छुपाती रहती हूँ॥
दिल मंदिर में दिन ढलते ही रोज़ "सिया"
आशाओं के…
neeraj said… आपकी सभी रचनाए सराहनीय है नीरज
Sanjay Rajendraprasad Yadav said… बहुत खूबसूरत हैं ...........!!!!!!
mohinichordia said… कांटे जिसने राह में .....बहुत खूब
mohinichordia said… खूबसूरत अशआर हैं आपके | |दबे जख्म फिर उभर आयेंगें
mohinichordia said… bahut khoob ashaar haen aapke
Ganesh Jee "Bagi" said…
Admin said…
योगराज प्रभाकर said… ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है सिया जी !
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिककर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करेऔर फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँक्लिक करे |
वीनस केसरी replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Laxman Prasad Ladiwala commented on Laxman Prasad Ladiwala's blog post व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Laxman Prasad Ladiwala commented on Laxman Prasad Ladiwala's blog post व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी
pandurang m deshmukh commented on PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA's blog post बेटी न होती© 2012 Created by Admin.
कुछ आवश्यक लिंक्स
| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचना और विचार उनकी निजी सम्पति है जिससे सहमत होना OBO प्रबंधन के लिये आवश्यक नहीं है | OBO पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप मे प्रयोग बिना लेखक या प्रबंधन के अनुमति के बिना करना वर्जित है |

