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Vivek Kumar
  • Male
  • Allahabad, UP
  • India
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Male
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Allahabad (Uttar Pradesh )
Native Place
Vill : Sarfuddinpur, po : selapur Madhoganj Hardoi (241302)
Profession
Student
About me
Poet and Story writer

Vivek Kumar's Blog

चला गया ये बचपन बनके यादों का बराती

शीर्षक : चला गया ये बचपन बनके यादों का बराती



" बचपन. .. के दिन हमने भी.. थे देखे

जवानी की रातें हमने भी.. हैं काटी ..

बलखा के गिरती .. वो लाखों पतंगे ,

डगमगा के चलती हुयी.. ये जवानी... |

फुदकता-उछलता .. मन वो हमारा ..

थिरकती दिलों पे.. ये अब की रवानी ,

कि पापा के कांधे पे गुजरा..वो ऑगन..

तकिये भिगोता अब के रातों का सावन |

माँ के आँचल.. तले बीते हुये वो लम्हें ..

कि कॉलेज.. मे होते वो नयन.. ईशारे ,

कि रंगों से दिवारों पे.. चित्रकारी… Continue

Posted on April 28, 2017 at 1:23pm — 3 Comments

मत भूल तुझमें रक्त का दौड़ता उबाल है

माना तेरा परिचय रूप है श्रंगार है.. पर,

मत भूल तुझमें रक्त का दौड़ता उबाल है |

सब पीर हैं तुझसे तृषित संसार की..

पर कैद सीने मे तेरे भी सहन का भण्डार है |

तू मूर्त है अभिमान की और गर्व भी अपार है,

तोड़ पैरों की बेड़ियाँ ये तेरा भी संसार है |

प्रेम की ओढ़े चुनरिया तू त्याग का गुबार है,

मत भूल तुझमें रक्त का दौड़ता उबाल है ||

गर जमीर तेरा साफ है तो जरूरत नही प्रमाण की,

कि दर्द तेरा हार और परिस्थिति श्रंगार है |

दुनिया ने देखी है तेरी सौंदर्य की…

Continue

Posted on April 27, 2017 at 10:30pm — 2 Comments

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