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Alok Rawat
  • Male
  • Lucknow, Uttar Pradesh
  • India
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Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय मंडल जी  शुक्रिया।  आभारी हूँ. "
Nov 16, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय बृजेश जी आप लोगों की ज़र्रानवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया। "
Nov 16, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय  सुरेन्द्रजी आपका बहुत बहुत धन्यवाद।  आभारी हूँ। "
Nov 16, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आद0 आलोक रावत जी सादर अभिवादन, बढ़िया ख्याल, बढ़िया अशआर,बधाई आपको। आद0 समर साहब के इस्लाह से बहुत कुछ हमे भी सीखने को मिला, सादर"
Nov 16, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..सादर"
Nov 15, 2017
Kalipad Prasad Mandal commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आद आलोक रावत जी ,आदाब बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हुई| बधाई स्वीकार करें | आ समीर कबीर साब की टिप्पणी से मुझे भी शिक्षा मिली  "
Nov 15, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय अजय तिवारी जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया। "
Nov 15, 2017
Alok Rawat commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा
"जिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैले उन चराग़ों को हवाओ से बचाना होगा  आदरणीय  सलीम साहब बहुत अच्छी  ग़ज़ल हुई है।  मुबारकबाद। ये शेर वाक़ई बहुत अच्छा है। "
Nov 15, 2017
Ajay Tiwari commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय आलोक जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं. सादर  "
Nov 15, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय अजय शर्मा जी एवं सालिम साहब आप लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया। ये तो सच है कि हमें एक उम्दा और समृद्ध फोरम मिला है और सभी बहुत प्यार से इस्लाह करते हैं। सभी का ह्रदय से आभारी हूँ। "
Nov 15, 2017
Ajay Kumar Sharma commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"बहुत सुन्दर गजल.."
Nov 15, 2017
SALIM RAZA REWA commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"अलोक जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद, कमिओं को पहले ही बताया जा चुका है, भाई हम सब की ख़ुश क़िस्मती है कि इस ब्लाग में बड़े ही उम्‍दा लोग है जिनके वज़ह से ग़लती सुधार जाती है,.."
Nov 14, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"मोहतरम अफ़रोज़ साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया। आप लोगों की बातों का ख्याल रखूंगा।  "
Nov 14, 2017
Afroz 'sahr' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय आलोक रावत इस रचना पर शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । आदरणीय समर साहिब के मशविरों पर गौ़र करें। आपने नियमानुसार अर्कान नहीं लिखें हैं,,,,,,"
Nov 13, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"aap log yun hi sarparasti karte rahenge to behtar tareeqe se ghazal kah sakoonga..."
Nov 13, 2017
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"janaab mohaammad arif sahab... janaab samar kabeer sahab... aapki hauslaafzaai ke liye bahut bahut shukriya... aur islaah ke liye bhi bahut bahut shukriya..."
Nov 13, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow Uttar Pradesh
Native Place
Lucknow
Profession
Bank Employee
About me
Aahat Lucknowi

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है
ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके
अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है
क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं
ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना
खुद ही खुश रहने की तरकीब निकाली जाए

जब किसी को भी गुनाहों की सज़ा देनी हो
इक नज़र अपने गुनाहों पे भी डाली जाए

मौलिक एवं अप्रकाशित

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At 7:03pm on June 3, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सुखद आश्चर्य . ओ बी ओ में आपका स्वागत है . अब आप ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर के सम्मानित सदस्य है . दादा शरदिंदु जी को इस रत्न की प्राप्ति पर बधाई . मेरी  रचना के पाठको में एक वृद्धि और हुयी . वाह , अति सुन्दर .

 

At 11:58am on June 2, 2017, Alok Rawat said…

कभी डोली सजाते हैं कभी अर्थी उठाते हैं
हम इक दूजे के सुख दुख मे हमेशा काम आते हैं
मैं जिस बस्ती मे रहता हूँ वो हिन्दुस्तान है मेरा
मुसलमान दोस्त हैं बच्चे मुझे चाचा बुलाते हैं

Alok Rawat's Blog

ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए 

आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है 

ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके 

अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है 

क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं 

ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना 

खुद ही…

Continue

Posted on November 13, 2017 at 2:30pm — 17 Comments

 
 
 

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