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डॉ छोटेलाल सिंह
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पण्डे जी आपकी रचना चित्रानुरूप उम्दा भाओं से ओतप्रोत है इस आकर्षक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
16 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन आपकी रचना चित्रानुरूप आकर्षक भाओं समाहित किये हुए मन को जीतने वाली रचना है इस मनोरम रचना…"
16 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदणीय मो आरिफ साहब सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप…"
23 hours ago
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"आदरणीय आरिफ साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से लेखनी सफल हुई आपको दिल से साधुवाद"
23 hours ago
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"आदरणीय खान साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ बहुत बहुत धन्यवाद"
23 hours ago
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपकी रचना चित्रानुरूप उम्दा भाव को समेटे बहुत ही बेहतरीन हैं दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए"
yesterday
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"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप बहुत उच्च कोटि की रचनाएँ है…"
yesterday
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"शक्ति छन्द बड़े चाव से नार नहला रही गिराती सदा नीर सहला रही जमीं पर बिठाई न सुविधा मिले अकेले विचारी न शिक़वे गिले गिराती उठा मग वहाँ जल भरे सुनाई पड़े चीख मन ये डरे हरी रंग चूड़ी कलाई कसी सजाने चली प्यार दिल मे बसी खुली हसरतों में न चाहत…"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख सहजाद साहब आपकी रचना बहुत बेहतरीन है चित्रानुरूप आपकी कोशिश लाजबाब है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
yesterday
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"भाई सुरेन्द्र जी आपकी रचना चित्रानुरूप बहुत बेहतरीन है भाव सम्प्रेषण उम्दा है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये "
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छन्द बड़े चाव से नार नहला रही गिराती सदा नीर सहला रही जमीं पर बिठाई न सुविधा मिले अकेले विचारी न शिक़वे गिले गिराती उठा मग वहाँ जल भरे सुनाई पड़े चीख मन ये डरे हरी रंग चूड़ी कलाई कसी सजाने चली प्यार दिल मे बसी खुली हसरतों में न चाहत…"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहब आपको रचना पसन्द आयी ,आपने उत्साह वर्धन किया दिल से शुक्रिया"
Jan 19
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"आदरणीय आरिफ साहब हौसलाफजाई के लिए दिल से आभार सादर"
Jan 19
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आपकी रचना चित्रानुरूप बहुत ही मार्मिक है इस मनोहारी सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 19
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"भाई सुरेन्द्र जी चित्रानुरूप बहुत ही मार्मिक रचना आपने लिखी है इस मनोरम सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 19
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"आदरणीय सौरभ पांडेय जी आपका भी तहे दिल से हार्दिक स्वागत वन्दन और अभिनन्दन है"
Jan 19

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Male
City State
Varanasi
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Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परिवर्तन (सरसी छन्द)

परिवर्तन (सरसी छन्द)



प्रचंड लीला परिवर्तन की, सभी झेलते मार

पुष्प सदा जो खिलते रहते, कम्पित होती डार।1।



भृंग मधुर रव तान सुनाते, करते वे मदहोश

गम में सभी सहन करते हैं, परिवर्तन आक्रोश।2।



हरित पर्ण पर हिमकन शोभित, नर्तन करती रोज

परिवर्तन का तांडव पल में, धूमिल करता ओज ।3।



सदा बाग का माली हँसता, सुषमा देख अपार

पतझड़ में नित रुदन करे वह, दिखता हाहाकार।4।



परिवर्तन की विषम ज्वाल में, जलता राज समाज

चीख पुकार सुनाई देती,… Continue

Posted on November 27, 2017 at 6:57pm — 7 Comments

धुँआ (सरसी छन्द)

*धुआँ (सरसी छःन्द)*



आसमान में धुआँ धुआँ है, हुए सभी बेहाल |

व्याकुलता बढ़ती जाती है, जीना हुआ मुहाल ||



काली धुंध सड़क पे छायी, मुश्किल चलनी राह |

नर नारी सबके ही मुख से, निकल रही है आह ||



अस्त व्यस्त सारा जन जीवन, सुनता कौन पुकार |

आपस में कर खींचातानी,बढ़ा रहे तकरार ||



जिम्मेदारी भूल गए हैं, सभी बजाते गाल |

दिल के भीतर कालापन है, बिगड़ गयी है चाल ||



धुँधलायी नित बढ़ती जाती,उठता रोज सवाल |

फिक्र नहीं है यहाँ किसी… Continue

Posted on November 13, 2017 at 5:51pm — 12 Comments

बेहाल जिन्दगी

बेहाल जिन्दगी



बिखरे सूखे पत्तों के बीच

फूस की झोपड़ी में

बेहाल जिन्दगी

अटकी साँसे

दुहाई दे रही थीं

सिर्फ जीने के लिए

दूर स्थित खेत में

कुछ काले श्वान

दूषित मटमैले

चेहरों पर भौंक रहे थे

बार बार गूँजती आवाज

सहमा डरा चेहरा

बहुत निराश

कम्पित भयावहता के बीच

कुछ टूटे फूटे बर्तन

बिखरे पड़े इधर उधर

बहते अश्रुओं के बीच

कोस रहे थे

अपनी बदनसीबी पर

निरीह आँखे निहार रही थी

ऊँचे मुंडेर… Continue

Posted on October 31, 2017 at 12:23pm — 18 Comments

दीवाली (सरसी छन्द)

दीवाली (सरसी छन्द)





दिल से दिल के तार मिलाएं, दीवाली के नाम

खाएं और खिलाएं सबको,दें अच्छा पैगाम



एक दीप सा बन जीवन में, करें सदा उल्लास

मन मंदिर में ज्ञानदीप से,नित ही करें प्रकाश



झूम झूमकर खुशी मनाएं,बैठें सबके संग

कर्म सुगम पथ सब अपनाएं,सीख हुनर औ ढंग



बोलें मीठी वाणी सबसे,करें नहीं विद्वेष

दुनिया में है सबसे न्यारा,प्यारा भारत देश



एक बनेंगे नेक बनेंगे,ऊँचा होगा नाम

सुन्दर समाज अपना होगा,नेक करेंगे… Continue

Posted on October 25, 2017 at 3:31pm — 9 Comments

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