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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय गुरुदेव रवि सर उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"परमादरणीय गुरुदेव उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन के लिए दिल से आभार"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"मार्गदर्शन के लिए सादर आभार आदरणीय"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमित जी बेहतरीन गजल के लिए सादर शुभकामनाएं"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी बेहतरीन गजल के लिए सादर शुभकामनाएं"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय आशीष जी बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमीर साहब बहुत ही उम्दा गज़ल के लिए दिली मुबारकबाद "
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दयाराम जी सुंदर गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय गुरुदेव रवि सर बहुत ही आकर्षक गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अनिल जी बहुत ही बेहतरीन गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"मुनीश तनहा जी बेहतरीन गज़ल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया अंजुमन जी सुंदर और बहुत ही आकर्षक गज़ल के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय मनन जी बेहतरीन गज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Dec 29, 2021
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"गज़ल है बहुत अनमोल रिश्ते की निशानी आपकीमैं हुआ सौभाग्यशाली मेहरबानी आपकी ज़िंदगी नैराश्य होकर मौत के मुँह थी पड़ीनित बुलन्दी छू सका हूँ पढ़ कहानी आपकी एकपल होकर जुदा प्रिय जी नहीं सकता कभीसिर्फ़ इतना जान लो ये जिन्दगानी आपकी अब यकीं करना नहीं जगदीश…"
Dec 29, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Posted on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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