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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ,दोहा छंद में लिखी मेरी रचना मान पाकर सफल हुई, आपका दिल से बहुत बहुत आभार"
11 hours ago
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । कृपया रचना के साथ उसकी विधा भी लिखा करें ।"
11 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। समसामयिक विषय पर उत्तम दोहे रचे हैं । हार्दिक बधाई।"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आपको जन्मदिन की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं"
Tuesday
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2आये दिन ही राह में, होता अत्याचार। छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार। सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार। रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5खूनी पंजे कर रहे, रोज घिनौने काम। कुछ बहसी ही देश को, करते हैं बदनाम ।।6ऐसा कड़ा विधान हो, करे स्वप्न साकार। बहन बेटियाँ कब तलक,…See More
Tuesday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी आपने चंद पंक्तियों में जबरदस्त भाव पिरो दिया मन प्रफुल्लित हो गया बहुत बहुत बधाई"
Nov 27
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन आपकी क्षणिकाएं इतनी मनोरम होती हैं कि दिल जीत लेती हैं,इस उत्कृष्ट रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Nov 27
डॉ छोटेलाल सिंह commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"आदरणीय प्रदीप भट्ट जी बहुत बढ़िया भाव पिरोया है आपने, इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
Nov 27
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी को जन्मदिन की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं"
Nov 27
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से और सुझाव से मन प्रसन्न हो जाता है आपका बहुत बहुत आभार"
Nov 10
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
Nov 10
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"भाई सुरेन्द्र जी रचना पर समय देने के लिए दिल से आभार"
Nov 10
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन आपने समय दिया, रचना को मान दिया ,आपके सुझाव मेरे लिए अनमोल हैं ,दिल से आभार"
Nov 9
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"भाई सुरेन्द्र जी विषयानुकूल बहुत बढ़िया कुण्डलिया लिखा बहुत बहुत बधाई"
Nov 9
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बढ़िया सन्देश परक दोहेलिखने के लिए बहुत बहुत बधाई"
Nov 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

जीवन की संध्या

जहाँ बुजुर्गों की सेवा हो, जीवन सुखमय होता है।
जो ठोकर देता बूढ़ों को, भार दुखों का ढोता है।।
अभिवादन नित करने वाले,सौम्य शील गुण पाते हैं।
वृद्ध अनादर करने वाले, खुद पीछे रह जाते हैं।।
रोदन करता जहाँ बुढ़ापा, घर आँगन भी रोते हैं।
इज्जत तार-तार होती जब, बूढ़े भूखे सोते हैं।।
कोमल किसलय को आँचल में, ढँककर दूध पिलाई थी।
अस्थिशेष असहाय निबल तन, झुकी कमर माँ ताई थी।।
पिचके गाल कराल हाल में, खाँस रहे बूढ़े…
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Posted on October 1, 2019 at 1:00pm — 4 Comments

व्यथित हृदय

व्यथित हृदय

अनुपम सृजन सृष्टि की बेटी

बेटी को ना ठुकराएं।

प्यार मुहब्बत की निधि बेटी

हाथ बढ़ाकर अपनाएं।।

बेटी अगर अनादृत होगी

जग कलुषित हो जाएगा।

आन मान सम्मान धरा पर

कहीं नहीं बच पायेगा।।

मृदुल भाव मधु सदृश बेटियाँ

जग रोशन नित करतीं हैं।

अंतर्मन के हर विषाद तम

सुखद अमिय रस भरतीं हैं।।

सस्मित सुरभि लुटाकर हर पल

जग मधुमय कर देतीं हैं।

सदा अंक में प्रदीप्त करके

हर बाधा हर लेतीं…

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Posted on September 27, 2019 at 7:05pm — 7 Comments

मातृभाषा हिन्दी

हिन्दी में हम पढ़े लिखेंगे, हिन्दी ही हम बोलेंगे।
हिन्दी को घर-घर पँहुचाकर, हिन्द द्वार हम खोलेंगे।
सकल हिन्द के हित में हिन्दी,सबको यह बतलायेंगे
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, हिन्दी को फैलायेंगे।।
शर्मसार अपनी हिन्दी को, कभी नहीं होने देंगे।
हिन्दी है सम्भार हिन्द की, इसे नहीं खोने देंगे।
भ्रांत मनुज के गहन तिमिर को,दूर भगाएगी हिन्दी।
कटु विषाद मन जनित व्याधि को,सदा मिटाएगी हिन्दी।।
हिन्दी बिना हिन्द की…
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Posted on September 14, 2019 at 8:15pm — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

At 9:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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"जनाब प्रदीप जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
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Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । कृपया रचना के साथ उसकी विधा भी…"
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"मुहतरमा ऊषा जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें । 'हर राह, एक नया…"
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"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'जुबां…"
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"जनाब स्वस्तिक जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
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Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
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