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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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पूर्ण समर्पण

ईश्वर अनुभूति का विषय है न की वाद विवाद का अतः ईश्वर तक पहुँचने का सर्वोत्तम मार्ग है पूर्ण समर्पण का भाव। पूर्ण समर्पण केवल प्रेम से ही सं…

Started by ASHISH KUMAAR TRIVEDI

2 May 4, 2013
Reply by केवल प्रसाद 'सत्यम'

आज नवरात्री के प्रथम दिन माँ भगवती के चरणों में ये शब्दान्जली....

           तोरे भुवन माई आए हैं....                         कर दो, कर दो दया महारानी ||     [१] तुमने दुखियों के दुःख तारे,              …

Started by डॉ. नमन दत्त

1 Mar 13, 2013
Reply by Dr.Prachi Singh

तरस गईयाँ

तरस गईयाँ   मेरी अखियाँ तरस गईयाँ घर आ जा ओ सांवरिया-3 तेरी याद च बरस गईयाँ घर आ जा ओ सांवरिया मेरी अखियाँ तरस ------ (1) दुनियाँ  कैहंदी त…

Started by Deepak Sharma Kuluvi

1 Jan 16, 2013
Reply by rajesh kumari

असां जोगी हो जाणा

असां जोगी हो जाणा रास न आयी दुनियांदारी,झूठा ठौर ठिकाणाअसां जोगी हो जाणा साईँ असां जोगी हो-2 रास न आयी दुनियांदारी ------------------ (1) त…

Started by Deepak Sharma Kuluvi

2 Dec 18, 2012
Reply by Deepak Sharma Kuluvi

यमद्वितीया-चित्रगुप्त पूजन पर: चित्रगुप्त भजन --संजीव 'सलिल'

यमद्वितीया-चित्रगुप्त पूजन पर:चित्रगुप्त भजन संजीव 'सलिल'*तुम हो तारनहार*तुम हो तारनहार, परम प्रभु तुम हो तारनहार... *निराकार तुम, चित्र गु…

Started by sanjiv verma 'salil'

2 Dec 4, 2012
Reply by sanjiv verma 'salil'

तेरे खेल नराले

बाबा बालकनाथ भजन तेरे खेल नराले   तेरे खेल नराले ओ बाबा पौणाहारियापौणाहारिया बाबा दूधाधारिया-2तेरे खेल निराले ओ बाबा पौ----(1) धौलगिरी ते…

Started by Deepak Sharma Kuluvi

2 Nov 26, 2012
Reply by Deepak Sharma Kuluvi

हरिगीतिका

बलवंत, भय-संकटहरण प्रभु, पवनसुत हनुमान हैं। श्रीराम को उर में धरे तप, वीरता के प्राण हैं॥ शिवरूप, दाता ज्ञान के कपि, आप ही गुणवान हैं। से…

Started by कुमार गौरव अजीतेन्दु

5 Nov 12, 2012
Reply by Saurabh Pandey

माता दुर्गा ये वरदान दे

तुझसे शक्ति मिले, तेरी भक्ति मिले,माता दुर्गा ये वरदान दे | माता हम तेरे बेटे अज्ञानीतेरी पूजा का ढंग नहीं जानें,तूने ममता से पाला है हमको…

Started by कुमार गौरव अजीतेन्दु

6 Nov 12, 2012
Reply by कुमार गौरव अजीतेन्दु

हनुमान आराधना (रोला छंद पर आधारित)

जय जय श्री हनुमान, शरण हम तेरी आये |हे अंजनि के लाल, कुसुम श्रद्धा के लाये ||जग में सारे दीन, एक तुम ही हो दाता |तेरा सच्चा भक्त, सदा सुख…

Started by कुमार गौरव अजीतेन्दु

25 Nov 12, 2012
Reply by कुमार गौरव अजीतेन्दु

भजन

भजन  तेरी किरपा जिसपे माता दौड़ा दौड़ा आये  चरण रज माथे लगा जीवन सफल बनाये  तू दयालू रक्षा करती दारिद्र दुःख सारे हरती  तू जगदम्बा तू भवानी…

Started by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA

0 Nov 8, 2012

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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
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"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
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"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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