For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भोजपुरी ग़ज़ल

ठेस जब दिल पर न लागल, मन अकुलाईल काहे |
बात जब कुछुओ न रsहल, आँख लोराईल काहे ||

फांस लालच के फईलल बा, मना ओहर ह जाइल |
बात सभके समझ आइल, लोग अझुराईल काहे ||

सबुर से बड़हन नईखे, केवनो दउलत जहां में |
मिलल एगो रोटी जे कम, मन झुझूआईल काहे ||

ऊ करेले प्यार तहरा से, कहत रहलs सभे से |
बोललs जे आई लव यू, फेर खिसिआईल काहे ||

जनम लेवे से पहिले, मार दिहलs बिटियन के |
अब पतोहू ना मिले, तs मन बघूआईल काहे ||

  • गणेश जी "बागी" 

ग़ज़ल सुने खातिर प्ले (>) बटन पर चटका लगाईं ....

हमार पिछुलका पोस्ट => एगो प्रयोग : भोजपुरी घनाक्षरी

Views: 2610

Replies to This Discussion

गणेश जी, नमस्कार,
भोजपुरी ग़ज़ल के लिए धन्यवाद,
कुछ शब्दों का अर्थ नहीं समझ आया पर, अंतिम शे'र  में आपने जो चोट मारी है काबिले  तारीफ है.
जनम लेवे से पहिले, मार दिहलs बिटियन के |
अब पतोहू ना मिले, तs मन बघूआईल काहे ||
सुरिन्दर रत्ती
मुंबई

आदरणीय सुरिंदर रत्ती जी , नमस्कार,

ग़ज़ल पसंद करने हेतु आभार, कुछ भोजपुरी शब्द जो न समझ आया यदि आप उल्लेख करेंगे तो मैं उसे समझाने का प्रयास करूँगा | अंतिम शे'र मुझे भी बहुत पसंद है |

गणेश भाई,  नमस्कार स्वीकार करें,

इस भोजपुरी ग़ज़ल में विचार के साथ साथ शिल्प भी सुन्दरता से उपयोग हुआ है. इन शब्दों का क्या अर्थ होगा?

 

लोराईल =

अझुराईल = 

 

यह शेर बहुत ही उम्दा है........ 
जनम लेवे से पहिले, मार दिहलs बिटियन के |
अब पतोहू ना मिले, तs मन बघूआईल काहे ||

विनोद भाई, नमस्कार !

ग़ज़ल आपने पसंद किया, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

 

आँसू शब्द को भोजपुरी में लोर कहा जाता है, आँख जब आँसू से भर जाती है तो उसे लोराना / लोराईल (लोर आईल=लोर आना)  कहते है |

फंसने को अझुराना कहते है , उदाहरण - मछली जाल में अझुराईल बीया |

Bagi bhai ap bhojpuri gaurav hain.bahut badhiya ghazal kahi apne ek dam"kareja nikar ke"rakh diye hain.aisi rachnaon se hi apni bhasha ka vikas hoga.

अरुण भाई राउर सराहना सर माथे पर, बहुत बहुत धन्यवाद राउर |

भाई गणेशजी, .. बहुत सुन्नर ग़ज़ल बनल बा.. आसीर्वाद आ इस्नेह मीलो..

 

बात जब कुछुओ न रsहल, आँख लोराईल काहे ||

मन के भीतरी हुदकत भाव छुआओ तऽ भभकि जाले.. तऽ ऊ कबो बोली से ना, लोराइल-पनियाइल आँखि माहें चूए लागेले.. बहुत हृदय लगवले बाड़ऽ भाई.

बात सभके समझ आइल, लोग अझुराईल काहे ||

ई बतिया लोगन के बुझाइये गइल रहित त अइसन दुरगींजन आ अझुरहट काहें भइल रहित, ए भाई? ..मन ना रङाय, रङाय जोगि कपड़ा ...भइला पऽ ईहे नूँ होखी...!
ऊ करेले प्यार तहरा से, कहत रहलs सभे से |
बोललs जे आई लव यू, फेर खिसिआईल काहे

हा हा हा.. मस्त.. बहुत मस्त कऽ दिहलऽ भाईजी.. ऊ बबुआ के कहहीं ना आइअल.होई...

निकहा फल-फूल दिहला के जगहा, ऊ बबुआ, एगो सउँसे कोंहड़ सोझा धऽ देले होइहें उनका, ई कहत, जे  ए बहिनी.. आइ लव यू...!!  :-)))

जनम लेवे से पहिले, मार दिहलs बिटियन के |
अब पतोहू ना मिले, तs मन बघूआईल काहे ||

उहवाँ छुअलऽ भाई.. जहवाँ सबले ढेर पिराला..  ई बतिया कवनो अतिशयोक्ति ना हऽ.

अपना देस के कुछ राज्यन में ई नौबत आ चुकल बा. ..
कवना घर में शिव नइखन?.. कवना घर में पारवती ना होखिहें?  .. बे शिव आ पारवती के ई संसार कइसन??

 

दमगर ग़ज़ल पऽ मन मनसाइल बा.. बहुत स्नेह-दुलार..।

बड़ भाई के पीठ ठोकला पर मन गदगद त होखबे करेला साथ में नाचे, कूदे, फाने के मन होखे लागेला, बड़ा दूर से थाक मान के अईला पर जईसे ek लोटा ठंढा पानी गुड के साथ पी लेला पर महसूस होला, वोईसने कुछ हमरा राउर सराहना से महसूस होत बा, इ सराहना कही न कही हमरा आक्सीजन के काम करत बा |  हमरा गर्व बा कि राउर आशीर्वाद भरल हाथ हमरा कपार पर बा |

बहुत बहुत आभार सौरभ भईया |   

गणेश जी, पहिला शेर पर त, ''रोकले रोकईल न लोर'' आऊर अंतिम शेर भी कमाल के बा...बहुत बहुत शुभकामना आप के,
सादर

आराधना जी, कुछ बात दिल से निकलेला जवन साहित्य के हिस्सा हो जाला अउर दिल के निकलल चीज के तासीर त कुछ प्रभाव जमईबे करी |

बहुत बहुत आभार राउर |


जनम लेवे से पहिले, मार दिहलs बिटियन के |
अब पतोहू ना मिले, तs मन बघूआईल काहे ||

bahut badhia sir ji khali eke aadami na nu mari jab dunu mari ta ghar me bantha rahi

धन्यवाद गुरु जी |

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
2 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
3 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
14 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
19 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service