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पाहुन जी चली मुँह हाथ धोइ गोड़ सोड़ पोंछी
राउवे खातिर बनवले बानी करी बरी फुलौरी आ मोछी

भात दाल आ तरकारि बा आलू कटहल के
आम के चटनी भुजिया चोखा (जिम्मे) जिमाइ चल के

चुप चाप खाईब हिलाईब जान मूड़ी
चाप के खाई दम मालपूआ खीर आ पूड़ी

बस बस मत करब लेत जाएब अउरी
कहे की बनल बा पकौडी कचौडी दानौरि तीसौरि चरौरि

लाज छोड़ खाई अब सुतहि के न काम बा
रोटी लिट्टी आ घी के भी आज इंतज़ाम बा

धीरे धीरे मत खाइ खाई गैब गब जी
सामने आ रहल बा राजमा साग आ पनीर के सब्जी

खाए में सोचीं मत आज खियावहि के बिचार बा
अब परोसाएवाला हलुआ पापड़ रायता दही आचार बा

कम कम मत (खसे) खाई खाई गैब गब जी
होखे वाला बा छोला आ समोसा से भेट जी

पेट भरी तब नींद आई मीठी मीठी
आँख मुंद के दबाई खिचड़ी पराठा दलपिठि

नखड़ा छोड़ी देखि ढेर मत पहुनाई
अभी टी बाकी बा रसगुल्ला छेना कलाकंद आ रासमलाइ

महाराज आदमी बानी की बानी लहेडा
कहे उठतानि छोड़ राजभोग बर्फी आ पेडा

सोची हेतना मंहगाई में कैसे फेकाइ
लड्डू इमरती खोवा आ पापड़ी पेट में पहुचाई

बड़ी दिन पर कर कृप्आ हमरा घरे आईनि
एहिसे जवन जुरल आंटल रावा के खियावानी

जाके कही हमर करब जान सिकाइत
कुछ अउर खाए के मन होई त हमरा के बताएब

.
मौलिक और अप्रकाशित

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