For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

                         चीस बरिस पहिले राजेश्वर सिंह गाँव छोड़ बम्बई के एगो उद्योगपति के दमाद बनि ओहिजे बस गइले. हाइ-फाइ माहौल में जनमल आ पढ़ल-बढ़ल सिंह साहब के बेटा जिद करे लागल जे ऊ होली गाँवे में मनाई. बबुआ केनियो पढ़ लेले रहे जे गाँव में होली मस्त होला.

                          एक हप्ता के बाद बबुआ होली मना के वापिस बम्बई चहुँपल आ चहुँपते अपना डैड आ मॉम के गोड़ धइ के परनाम कइलस. हाय-बाय करे वाला लइका प गाँव के रंग आ बसंती बयार के असर साफा लउकत रहे.

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट ==> भोजपुरी लघुकथा : माई किरिया

Views: 1438

Replies to This Discussion

बहुत बढ़िया लघुकथा भईल भा आ.  Er. Ganesh Jee "Bagi" जी साहिब ,,,आपके धेरकुल बधाई |

लघुकथा सराहे बदे बहुते आभार महर्षि भाई.

बहुतै सुन्दर. बधाई , आदरणीय इंजीo गणेश जी बागी जी , सादर।

बहुते आभार आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, राउर सराहना हमरा खातिर आशीर्वाद बा.

राउर खड़ी बोली  लघुकथा जेतना प्रभावी होला ओतना ई कथा ना लगत बा ,तबो भोजपुरी में आप लिखेलीं अउर एकर प्रसार-प्रचार करे लीं ,ये खातिर बधाई |

सोमेश भाई रउआ एह लघुकथा प अईनी आ आपन विचार दिहनी इहो बहुत बा, निक ना लागल उ त ठीक बा बाकिर रौआ त खुदे एगो नीमन साहित्यकार हई, कुछो सुझाव देहती त औरों निक रहित, आभार आपके.

बढ़िया बा

राउर धन्यवाद बा श्वेतांक जी.

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय दयाराम जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए, मार्गदर्शन तो विद्वान ही करेंगे। धन्यवाद "
4 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए "
7 minutes ago
Manan Kumar singh commented on Admin's group भोजपुरी साहित्य
"गजल आईं एगो नज़्म भइल बादेखीं सब रउए कइल बा।1 हहरल हियरा रउए खातिरइचिको ना एमे मइल बा।2 नयन मटक्का…"
7 minutes ago
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

कुंडलिया

दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।आठ…See More
53 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय शाहज़ाद उस्मानी साहब , नमस्कार। हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया।"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अजय गुप्ता जी, आपका सुझाव भी अच्छा लगा, इस पर विचार करती हूॅं आपने दूसरे मिसरे पर भी ध्यान दिया।…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"आदाब। सत्य और सत्य के चारों ओर के वातावरण, परिदृश्य और हालात शाब्दिक करती रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"बहुत शुक्रिया जी "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाला शे'अर अच्छा लगा जनाब दयाराम मेठानी जी। "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वाह। अंतिम शे'अर में बढ़िया प्रयोग आदरणीय अजय जी।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाले बढ़िया शे'अर के साथ अच्छी कोशिश। कहते हैं ग़ज़ल को पढ़कर या गाकर देखने से दोष…"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी ,  अति सुंदर , हार्दिक बधाई। आम की ज्यादा तारीफ उचित है। आखिर फलों का राजा…"
1 hour ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service