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अमित पूजा करने के बाद अपनी पत्नी व बच्चों के साथ पटाखे फोड़ने के लिए घर के बाहर आ गया । बच्चों को कुछ फुलझड़ियाँ जला कर दे दी और वह भी पटाखे फोड़ने लगा । सभी पटाखों मे व्यस्त थे । एक पाँच छह वर्ष का बालक पोल के नीचे चुपचाप खड़ा देख रहा था । शायद वह अकेला था । धीरे धीरे चलता हुआ वह उन पटाखों के समीप पहुंचा और एक फुलझड़ी का डिब्बा उठा लिया और भागने लगा । उस बालक को पटाखे चुराते देख अमित का बेटा नंदू उसके पीछे हो लिया । थोड़ी दूर पर झुग्गी बस्ती मे उसका घर था वह घर के बाहर से ही चिल्लाया , ‘गुड़िया देख मै तेरे लिए पटाखे ले आया ।‘ ‘और मिठाई !’ कहती हुई गुड़िया दौड़ कर बाहर आने लगी कि रास्ते मे किसी चीज से टकरा कर गिर पड़ी । वह देख नहीं सकती थी । ‘ मिठाई तो नहीं मिली’ , थोड़ा ठहर कर वह बालक बोला ।  ‘हम आज फिर भूखे ही रहेंगे’ ,  रुआसी होकर गुड़िया बोली । नंदू को समझते देर न लगी कि वह बालक जो उसके पटाखे उठा कर लाया है वह चोर नहीं है और  बहन गुड़िया के लिए उसने ऐसा किया है जो देख नहीं सकती  । नंदू घर गया अपने माता पिता को सारी बात बताई । कुछ पटाखों मिठाइयों दीयों के साथ वे सब उस बालक के घर पहुंचे और मिठाइयाँ और नए कपड़े बच्चों को दिये और सबने मिलकर दिवाली मनाई , पटाखे फोड़े मिठाई खाई । आज गुड़िया बहुत खुश थी उसके अंधेरे जीवन की ये सबसे अच्छी दिवाली थी ।    

अप्रकाशित एवं मौलिक 

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Replies to This Discussion

भावनाओं से ओतप्रोत रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें.... 

आपका हार्दिक आभार आ० श्याम नारायण जी । 

आदरणीया अन्नपूर्ण जी

मानवता से परिपूर्ण आपकी रचना पर आपको  भूरि भूरि  बधाई i

आपका हार्दिक आभार , आ० गोपाल नारायण जी । 

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