For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इस बार का तरही मिसरा|
"उन्ही के कदमों में ही जा गिरा जमाना है"
वज्न: १२१२१२१२१२१२२२

काफिये के मामले में आप स्वतंत्र है बस इतना ध्यान रखें कि यह मिसरा पूरी ग़ज़ल में कहीं न कही ( मिसरा ए सानी या मिसरा ए ऊला में) ज़रूर आये|

मुशायरे कि शुरुवात शनिवार से की जाएगी| admin टीम से निवेदन है कि रोचकता को बनाये रखने के लिए फ़िलहाल कमेन्ट बॉक्स बंद कर दे जिसे शनिवार को ही खोला जाय|

विशेष : जो फ़नकार किसी कारण लाइव तरही मुशायरा में शिरकत नही कर पाए हैं
उनसे अनुरोध है कि वह अपना बहूमुल्य समय निकाल लाइव तरही मुशायरे की शोभा बढाएं|

Views: 3612

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

बहुत खूब आशीष भाई, आप के ग़ज़ल का इन्तजार था मुझे, अच्छी ग़ज़ल पढ़ा है आपने, ख्यालात भी अच्छे है,
Thank you baagi ji. Aap logo ka sneh bna rhe bs.
आशीष भाई ..आपकी इस दीवानगी भरी अदायगी के सब कायल हो चले है|
बड़े खूबसूरत शेर कह गए है आप

दफ अतन ही कभी मोहब्बत हो नहीं जाती|
प्यार की शमा को धीरे-धीरे जलाना है||

गैर हाज़िर में बसंत भी लगे उजाड़ जिनके|
साथ में मौसम-ए-खिंजा लगे सुहाना है||
rana ji yah to aap logo ki hi den hai ki mai bhi kuchh likh leta hu. aap log apna aashirwaad banaaye rakhe. mai aage bhi koshish karunga.
इक दीद से उनकी छलका हर पैमाना है.
उफ़ सनम की आँखें हैं या पूरा मयखाना है--

राह चलते जो देखें कभी वो पलटकर.
उन्ही के क़दमों में ही जा गिरा ज़माना है--

अपने रुख से दरबान हटा भी दे पर्दानशीं .
हम भी तो देखें जो कारुन का खजाना है--

'ताहिर' क्या बताएं क्यूँ नम हैं अरसे से.
उनकी आँखों में रहता बादल दीवाना है--
इक दीद से उनकी छलका हर पैमाना है.
उफ़ सनम की आँखें हैं या पूरा मयखाना है--

क्या बात कही है विवेक भाई, वाकई मजा आ गया, तरही शुरू होने के समय मुझे भी नहीं पता था कि इतना मजा आने वाला है, बढ़िया ग़ज़ल निकाला है आपने , दाद कबूल कीजिये ,
ताहिर भाई बहुत खूब ...बड़ी प्यारी ग़ज़ल से मुशायरे में पदार्पण किया है आपने...
हर शेर खूबसूरत है ....
taahir ji kya khoob sher kah gaye aap.
अपने रुख से दरबान हटा भी दे पर्दानशीं .
हम भी तो देखें जो कारुन का खजाना है-
बड़े भैया पिछली तरही में एक शेर कहा था

मुझे डर लगता है धरती का स्वर्ग नर्क ना हो
आज लोगो ने वहा पत्थर उठा रखा है
जिन्होंने आदमी को आदमी ना जाना है !
उन्हीं के कदमों में ही जा गिरा जमाना है !

कोई साकी है ना मीना है ना पैमाना है
तेरा वजूद सर से पाँव तक मैखाना है !

तू है दानिश तेरा अंदाज़ फलसफाना है
मैं कलंदर मेरा अंदाज़ सूफिआना है !

तेरी शतरंज,. तेरी चाल, मगर जिद मेरी
तेरे वजीर को पैदल से ही हराना है !

जमाना आ गया है अपने दरमियाँ, वर्ना
वो ही सर है तुम्हारा, वो ही मेरा शाना है !

उसको हैवानियत का दैत्य ही ना छोड़ेगा,
उसने इंसानियत को बरगुजीदा माना है !
,
इसी गरज में छोड़ पाऊँ न टूटे घर को,
कोई फकीर कह गया यहाँ खज़ाना है !

हाथ कंधे पे रख अर्जुन के कृष्ण जी बोले,
तुझे तो खून अपने खून का बहाना है !
हाथ कंधे पे रख अर्जुन के कृष्ण जी बोले,
तुझे तो खून अपने खून का बहाना है !

वाह वाह गुरुदेव, कमाल कह गये, खून अपने खून का बहाना है, बहुत ही उम्द्दा कारीगरी, बेहतरीन ग़ज़ल,
योगी सर आपकी ग़ज़ल के बिना तो यह मुशायरा सूना सूना सा था|

जिन्होंने आदमी को आदमी ना जाना है !
उन्हीं के कदमों में ही जा गिरा जमाना है !
वाह!!!!...मैंने कहीं पढ़ा था की ग़ज़ल सादगी की भाषा जानती है .....इससे सीधी सादी बात कोई क्या कहेगा......

इसी गरज में छोड़ पाऊँ न टूटे घर को,
कोई फकीर कह गया यहाँ खज़ाना है !

अद्भुत ख्याल .....बड़ी मासूमियत छुपी है इस शेर में....

दूसरा शेर पूरी तरह से सूफियाना रंगत लिए हुए है ...........

और तीसरे शेर में अपने खुद ही कबूल लिया है
बेहतरीन

अंत में गीता का सार निकल कर रख दिया है आपने.....
आपकी इसी चीज के तो हम कायल हैं|

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service