For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 110 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111

विषय - "भ्रम जाल"

आयोजन की अवधि- 11 जनवरी 2020, दिन शनिवार से 12 जनवरी 2020, दिन रविवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 11 जनवरी 2020, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 693

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

आ. भाई सुरेंद्रनाथ जी, दुसरी प्रस्तुति भी अच्छी हुई है । हार्दिक बधाई ।

आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया का कोटिश आभार

आदरणीय सुरेंद्र जी उत्तम सृजन, हार्दिक बधाई!

मीटू माया जाल [ दोहावली ]

मीटू से है फायदा, मिले काम या दाम।

यही सोच कुछ औरतें, होती हैं बदनाम॥

पूछ परख यदि ना हुई, जीना है बेकार।

मान मिले जब मर्द से, लगता जीवन सार॥

गालों पर है झुर्रियाँ, पर है मन में आस।

ज्ञान मिला परदेश से, मीटू पर विश्वास॥

आय अगर कम हो गई, देती सखी सुझाव।

मीटू ऐसा मंत्र है, बढ़ जाएगा भाव॥

मीटू का इस देश में, हुआ खूब विस्तार।

टीवी पर होती बहस, होता मुफ्त प्रचार॥

फाँसो किसी रईस को, मीटू माया जाल।

करो ऐश दिल खोल के, हर दिन सालों साल॥

मीटू ऐसा तीर जो, सीधा करे प्रहार।

हाय हाय सज्जन करे, भ्रम में है परिवार॥

........................

[मौलिक एवं अप्रकाशित ]

 

आद0 अखिलेश कृष्ण जी सादर अभिवादन। क्या बेहतरीन मी टू पर व्यंग किया आपने,, बहुत बहुत बधाई, मजा आ गया पढ़के

आदरणीय  सुरेन्द्र भाईजी

हृदयतल से धन्यवाद आभार आपका।

मी टू के इक पक्ष को, ख़ूब दिया विस्तार

पहलू दूजा भी कहीं, भारी है सरकार!

विषय समेटे लिख रहे,  दोहे आप हमेश

ख़ूब बधाई लीजिए, हे भ्राता अखिलेश!

मिली बधाई आपकी, सतविंदर सुकुमार।

दिल कहता है आपको, धन्यवाद आभार॥

आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिनन्दन। एक से बढ़कर एक दोहे हुए हैं । अनेकों बधाई स्वीकारें ।

नवगीत

थिरक रही है सगरी दुनिया
ता-ता थैया ताल पर,
थिरकन का कारक है जो वह,
नहीं समझती चाल, पर।

अपनी आज जरूरत भूले,
नयनों पर पसरा पटल
बिना काम की चीज़ खरीदें,
भ्रम-जाल घेरे अटल।

खुश है सपने गढ़ने वाला,
खुश सब अपने हाल पर।


दौड़-दौड़ कर जीते दौड़ें,
हिम्मत पर भी नाज़ है
मुस्काकर लब किसके हिलते,
औ किसकी आवाज़ है?

हर घोड़े की गति आधारित,
उसके पग की नाल पर।

भ्रम धूप का घातक,
हरता,
दिख जाता अँधकार भी
मृग तृष्णा में भटके को,
यह,
देती निश्चित मार भी।


ज्ञान बिना बस चकाचौंध का,
सिक्का चलता काल पर।

मौलिक अप्रकाशित

आदरणीय सतविंद्र  भाई इस प्रस्तुति पर हृदयतल से बधाई ।

आ. भाई सतविंद्र जी, सादर अभिवादन । बड़ी प्रतीक्षा कराई पर सुंदर गीत ने इन्तजार को फलित कर ही दिया । कोटि कोटि हार्दिक बधाई ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post महब्बतों में मज़ा भी नहीं रहा अब तो (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"जनाब रवि भसीन शाहिद जी ख़ाक़सार की तनक़ीद को इतना सहज और सकारात्मक भाव से लेने के लिए और हौसला…"
48 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post प्यार से भरपूर हो जाना- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। उर्दू…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बवाई ।"
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल

 मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ कभी रुकना नहीं आया कभी चलना नहीं आया. हमें हर एक साँचें में कभी ढलना…See More
4 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई से अभिभूत हूँ , आपने…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पनघट के दोहे- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । आपको दोहे अच्छे लगे यह मेरे लिए हर्ष का विषय है । उपस्थिति और…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सेज पर बिछने को होते फूल जैसे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति व उत्साहवर्धन से लेखन सफल हुआ । इसके लिए हार्दिक…"
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पनघट के दोहे- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, पनघट पर बढ़िया दोहे हुए हैं बधाई स्वीकार करें। सादर। "
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सेज पर बिछने को होते फूल जैसे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /दूध लस्सी …"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, इस लाजवाब ग़ज़ल पर दाद और बधाई क़ुबूल…"
10 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

बेगम हज़रत महल

बेगम हज़रत महल भारतवर्ष की आज़ादी में कई सारे क्रांतिकारी वीर-वीरांगनाओं ने अपना पूरा योगदान दिया |…See More
11 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post महब्बतों में मज़ा भी नहीं रहा अब तो (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, ग़ज़ल को अपना क़ीमती वक़्त देने के लिए आपका हार्दिक आभार।…"
11 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service