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Jaihind Raipuri
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Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत के लिए फ़िक्र करिये न कभी आप तो क़ीमत के लिए है ये दावा वो करे काम बहुत हम सब से क्या कहूँ उनकी ला हासिल सी मशक़्क़त के लिए तेरी यादों ने मेरा वो भी…"
Apr 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग नहीं मजबूर नफरती आग से भला, ईंधन क्या हुजूर पहली मार ग़रीब को, पड़ती है सरकार लकड़ी लेकर जा रहा, भारत अपने द्वार लकड़ी देखो ढ़ो रहा, साइकिल पर जवान भारत…"
Apr 19
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की वजह से दूसरे आपके उपनाम को मैं कई बार शाहिद की जगह त्रुटिवश शहीद लिख दिया था! अतः आप मुझे क्षमा कीजियेगा आपने वक़्त निकाल कर ग़ज़ल पर अपनी टिप्पणी दी बहुत…"
Apr 7
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती पास उनके जो सुनहरा दिल है/ जनाब सुनहरा का वज़्न 122 है, आप चैक कीजियेगा। /ताज इक सब के मन के अंदर भी और ये शह्र आगरा दिल…"
Apr 3
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इश्क़ तो है मगर ये इतनी भी शा'इराना नहीं कि तुझ से कहें साफ़ गोई सुनोगे क्या तुम ये अहमकाना नहीं कि तुझ से कहें मौलिक एवं अप्रकाशित "
Mar 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म पुराना नहीं कि तुझ से कहें  ग़म तो संजीदा होता है ये कोई मुस्कुराना नहीं कि तुझ से कहें थी सारी काइनात झूठी मगर दिल ने माना नहीं कि तुझ से…"
Mar 25
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
Mar 25
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें अधिकाधिक सीखने को भी मिलेगा जितनी जल्दी शुरुआत हो उतना अच्छा "
Mar 12
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बातीपास उनके जो सुनहरा दिल हैताज इक सब के मन के अंदर भीऔर ये शह्र आगरा दिल हैदिल लगी दिल्लगी नहीं होतीइक ग़ज़ब का मुहावरा दिल हैदेखकर उनकी मदभरी आँखेंखो गया मेरा मदभरा दिल हैयाद मुद्दत से वो नहीं है 'जय'आज फिर क्यूँ भरा भरा दिल हैमौलिक एवं अप्रकाशित See More
Mar 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल है ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती पास उनके जो सुनहरा दिल है ताज इक सब के मन के अंदर भी और ये शह्र आगरा दिल है दिल लगी दिल्लगी नहीं होती इक गज़ब का…"
Mar 3
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Feb 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया भूलकर याद मुझको आया है तुझ से मिल के सभी को भूल गया जाने क्या था निगाह ए साक़ी में मय भी मय- ख़ानगी को भूल गया याद तो मौत सी मुअय्यन…"
Feb 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन इस्लाह से नवाज़ा है कि ग़ज़ल निखर गयी है बहुत शुक्रिया आपका! इस्लाह के बाद संशोधित ग़ज़ल तुरंत पोस्ट करता हूँ "
Feb 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी जनों के इस्लाह से सुधार हो जायेगा बहुत शुक्रिया आपका "
Feb 26
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला अफ़ज़ाई की दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका "
Feb 26

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Male
City State
Raipur
Native Place
odisha
Profession
Busi
About me
Think a lot

Jaihind Raipuri 's Blog

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है

कितने दुःख दर्द से भरा दिल है

ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती

पास उनके जो सुनहरा दिल है

ताज इक सब के मन के अंदर भी

और ये शह्र आगरा दिल है

दिल लगी दिल्लगी नहीं होती

इक ग़ज़ब का मुहावरा दिल है

देखकर उनकी मदभरी आँखें

खो गया मेरा मदभरा दिल है

याद मुद्दत से वो नहीं है 'जय'

आज फिर क्यूँ भरा भरा दिल है

मौलिक एवं…

Continue

Posted on March 4, 2026 at 10:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल

2122    1212    22

 

आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में

क्या से क्या हो गए महब्बत में

 

मैं ख़यालों में आ गया उस की

हो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में

 

मुझ से मुझ ही को दूर करने को 

आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में

 

तुम ख़यालों में आ जाते हो यूं

चीन ज्यूँ आ गया तिब्बत में

 

चाट कर के अफीम मज़हब की

मरते हैं क्यूँ ग़रीब ग़फ़लत में

 

ए ग़रीबी है शुक्रिया तेरा

जो भी सीखा है सीखा ग़ुर्बत…

Continue

Posted on February 3, 2026 at 10:30am — 7 Comments

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At 7:31pm on August 14, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.erica@aol.com)Thanks.

 
 
 

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