For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-122 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-122 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-122
विषय : रचनाकार अपने मनपसंद विषय पर लिख सकते हैं
अवधि : 30-05-2025 से 31-05-2025
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
.    
यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
.
.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

Views: 169

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

इस पटल के लघुकथाकार अपनी प्रस्तुतियों के साथ उपस्थित हों

 नमन मंच। सादर नमस्कार आदरणीय सर जी। हार्दिक स्वागत। प्रयासरत हैं सहभागिता हेतु।

जंग के मोड़ पर (लघुकथा)- 
"मेरे अहं और वजूद का कुछ तो ख्याल रखा करो। हर जगह तुरंत ही टपक कर तुम मुझ पर हावी हो जाते हो!" संज्ञा ने सर्वनाम से कहा।
"तुम, तुम ही रहती हो। कोई फ़र्क नहीं पड़ता तुम पर मेरे कारण।" तसल्ली देते हुए सर्वनाम ने कहा।
"हॉं, सही कहा सर्वनाम ने। कहते हैं न कि 'नाम में क्या रखा है, काम देखो यारो', है न?" दोनों के बीच क्रिया उछल कर आयी और मुस्कुराते हुए बोली, "कर्म ही पूजा है, प्रिय!"
"....और फ़िर मैं तो आ जाता हूॅं तुम्हारे नज़दीक़ तुम्हारे महत्व को बढ़ाने तुम्हारे धर्म, कर्म और गुणवत्ता अनुसार!" विशेषण चुप न रह सका और संज्ञा के पास आकर बोला, "हम दोनों एक दूजे के लिए, हैं न?"
"....और क्रिया के साथ मैं तुम तीनों के लिए!" क्रिया-विशेषण ने क्रिया के समीप आते हुए कहा।
"सच कहते हो, तुम सबसे मैं हूॅं। तो फिर 'नाम' के लिए लोग क्यों उलझते, लड़ते-झगड़ते और मरते हैं?" संज्ञान लेते हुए संज्ञा उन सबसे बोली।
"ये व्याकरण है। भाषा की ही नहीं, जीवन की, जीवन शैली की, जीने के उद्देश्य की! काश, लोग समझ पाते और तुम्हें भटका न पाते!" क्रिया ने सबको अपनी बाहों से घेरते हुए संज्ञा पर नज़रें टिका कर कहा।
(मौलिक व अप्रकाशित)

आप की प्रयोगधर्मिता प्रशंसनीय है आदरणीय उस्मानी जी। लघुकथा के क्षेत्र में निरन्तर आप नवीन प्रयोग कर इसे नया रूप देने में प्रयासरत है। हम आपकी इस साधना के सतत साक्षी हैं।

सादर 

हार्दिक स्वागत आपका गोष्ठी और रचना पटल पर उपस्थिति हेतु।  अपनी प्रतिक्रिया और राय से मुझे प्रोत्साहित करने हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय अजय गुप्ता जी। आपकी रचनाओं का भी मुझे इंतज़ार रहता है। 

मोर या कौवा

---------------

बूढ़ा कौवा अपने पोते को समझा रहा था। "देखो बेटा, ये हमारे साथ पहले हो चुका है। हमारे एक पूर्वज भी ऐसे ही एक बार गफ़लत में आ  गए थे। उनको भी मोर का एक पंख मिल गया था जिसे उन्होंने अपनी पूँछ में लगा लिया था और..........।"

"और उन्होंने स्वयं को मोर समझना शुरू कर दिया। पर मोरों ने उनका मज़ाक बना कर अपनी बस्ती से भगा  दिया। फिर वो लौट कर वापस आए तो कौवों ने भी उनका अपमान किया और उनको माफ़ी मांगने के बाद ही कौवों की टोली में वापिस लिया गया।......यही ना।"

पोते ने दादा कौवे की बात बीच में ही काट कर किस्सा जल्दी में पूरा कर दिया। और फिर बोला, "दादा जी, ये कहानी आप कितनी ही बार सुना चुके हैं। और हम अच्छे से जान और समझ भी चुके हैं।"

"फिर भी तुम वही काम एक बार फिर करना चाहते हो। गए समय से सीख न लेने वाला सबसे बड़ा मूर्ख होता है बेटा।" दादा कौवे ने समझाया।

“दादा जी, आप की सीख मुझे अच्छे से याद है। और विश्वास कीजिए मैं अगर मोरपंख लगा रहा हूँ और लगाने के लिए कह रहा हूँ इसके कारण हैं। और इस बार इसकी वजह से हमारा मज़ाक़ नहीं बनेगा अपितु सम्मान होगा।“ युवा पोते ने पूरे आत्मविश्वास से कहा।

“वो कैसे?” दादा कौवे के स्वर में उत्सुकता थी।

“दादा जी, पक्षियों में इस बार लोकतंत्र आ रहा है। जंगलसभा के पदाधिकारियों के लिए चुनाव हो रहें हैं। एक मोर भी उम्मीदवार है और उसे हमारे वोट चाहिए। इस बार वो घर आएगा, कुछ न कुछ भेंट भी लाएगा और ख़ुद हमें पंख लगाकर मोरों में शामिल करेगा।“

दादा सोचते रहे फिर बोले, “पर बेटा, उसके बाद हम आपस में अपने को मोर कहेंगे या कौवा।”  

#मौलिक एवं अप्रकाशित   

    

वाह। आप तो मुझसे प्रयोग की बात कह रहे थे न।‌ लेकिन आपने भी तो कितना बेहतरीन प्रयोग कर डाला कौवे और मोर पंख के क़िस्से और तत्संबंधी बिम्बों को लेकर। बेहतरीन सृजन। संकेतात्मक शैली की बढ़िया विचारोत्तेजक रचना। समापन पंच भी शानदार। हार्दिक बधाई आदरणीय अजय गुप्ता जी।

अनेक-अनेक आभार आदरणीय शेख़ उस्मानी जी। आप सब के सान्निध्य में रहते हुए आप सब से जब ऐसे उत्साहवर्धक शब्द मिलते हैं तो मन प्रफुल्लित हो जाता है।

बहुत बहुत धन्यवाद 

जी, ऐसा ही होता है हर प्रतिभागी के साथ। अच्छा अनुभव रहा आज की गोष्ठी का भी।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
22 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
22 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
23 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service