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ज़ेहन मे दीवार जो सबने उठा ली है

ज़ेहन मे दीवार जो सबने उठा ली है,
रातें भी नही रोशन, शहर भी काली है |

मालिक ने अता की है, एक ज़िंदगी फूलों सी,
काँटों से बनी माला क्यूँ कंठ मे डाली है |

कैसी ये तरक्की है , कैसी ये खुशहाली है,
पैसे से जेब भारी, दिल प्यार से खाली है |

दर्द फ़क़त अपना ही दर्द सा लगता है,
औरों के दर्द-ओ-गम से आँख चुरा ली है |

किस-किस को सुनाएँगे अफ़साना-ए-हयात अब,
बेहतर है खामोशी, जो लब पे सज़ा ली है |

  • रावी :-)

 

Zehan me deewaar jo sabne uttha lee hai.......
Raate.n bhi nahi roshan , sahar bhi kaali hai ......

MaaliQ ne ataa ki hai , ek zindagi phoolo.n si ........
Kaanto.n se bani mala kyun kanth me daali hai .......

Kaisi ye tarakki hai , kaisi ye khush_haali hai .......
Paise se jeb bhaari , dil pyaar se khaali hai ........

Dard faqat apna hi dard sa lagta hai ......
Auro.n ke dard - o - gham se aankh chura lee hai .......

Kis - kis ko sunayenge afsaana -e -hayat ab ......
Behtar hai khamoshi , jo lab pe saja lee hai ..............raavi :-)

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Comment

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Comment by prabhat kumar roy on February 12, 2013 at 9:00am

इस दिलकश गजल के लिए प्रभा खन्ना बधाई की पात्र हैं।

Comment by Prabha Khanna on August 14, 2011 at 8:31pm
Shanno didi... It is so nice of you...
Comment by Shanno Aggarwal on August 8, 2011 at 2:40am

प्रभा, बहुत खूबसूरत गजल लिखी है....

 

''किस-किस को सुनाएँगे अफ़साना-ए-हयात अब,
बेहतर है खामोशी, जो लब पे सज़ा ली है |''

Comment by Prabha Khanna on August 7, 2011 at 5:49pm

Sabhi mitrron ka haardik aabhaar... Bahot bahot shukriya !

Comment by mohinichordia on August 7, 2011 at 10:38am

मालिक ने अता की हे एक जिंदगी फूलों सी 

कांटों से बनी माला क्यूँ कण्ठ में डाली हे |.हम सब कंही न  कंही ऐसा ही करते हें . 

 बहुत सुंदर अभिव्यकती,

Comment by Ananda Shresta on August 3, 2011 at 11:54pm

वाह् प्रभा जी ,क्या शेर खुबसुरत गजल है । मुझे जिन शेरमे दिल लगी चुराकर ले गए-
कैसी ये तरक्की है , कैसी ये खुशहाली है,
पैसे से जेब भारी, दिल प्यार से खाली है |

Comment by राज लाली बटाला on August 1, 2011 at 1:24am

कैसी ये तरक्की है , कैसी ये खुशहाली है,
पैसे से जेब भारी, दिल प्यार से खाली है | wah bahut khoob hai Prabha ! g

Comment by Veerendra Jain on July 24, 2011 at 7:54pm

bahut hi umda ...bahut badhai is khubsurat gazal ke liye...

Comment by Prabha Khanna on July 23, 2011 at 7:39pm

मित्रों, सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद... Post को हिन्दी मे कर देने के लिए शुक्रिया :)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 23, 2011 at 5:30pm

//मालिक ने अता की है, एक ज़िंदगी फूलों सी,
काँटों से बनी माला क्यूँ कंठ मे डाली है |//

इस शेर पर दिल से दाद पेश कर रह हूँ. बधाई.

 

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