For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर

पढ़े-लिखे हैं आप तो आपको
पढ़े-लिखे दिखना चाहिए।
मोटर कार हो सब ,फिर भी अक्ल से ,
आपको , बिलकुल पैदल दिखना चाहिए।
कपड़े अजीब, चाल अजीब , हाव-भाव अजीब ,
बातचीत में अजीब होना और दिखना चाहिये।
रचनात्मक होना तो बहुत कठिन होता है ,
विध्वंस और क्रान्ति की बात करनी आनी चाहिए।
सबसे बड़ी बात आपको
घर फूंक तमाशा देखना आना चाहिए।
अपनी बुनियाद को निरंतर हिलाना और
मौक़ा लगते ही उखाड़ देना चाहिए।
आपको वो तो लपक लेंगे ही
जो उकसा रहे हैं ,
उनकें यकीन पे मिट जाना चाहिए।
खुद भले आप हमेशा सोये सोये से रहें ,
लक्ष्य अपना जन चेतना को जगाना बताना चाहिए ,
और कुछ आये न आये , नारे लगाना आना चाहिए।
तोड़ - फोड़ में माहिर ,
कन्स्ट्रटिव बिलकुल नहीं , आपको
कम्प्लीट डिस्ट्रक्टिव होना चाहिए।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 799

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on November 14, 2017 at 10:58am
//इस लघुकथा के माध्यम से मैंने अपने ही प्रवेश में व्याप्त उस समस्या की और ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है//
लेकिन मुहतरम ये लघुकथा तो किसी भी ज़ाविये से नहीं लगती?,इसका अंदाज़ कविता जैसा है,और मैंने इसे कविता की तरह ही पढ़ा भी है, ये तो अब पता चला कि ये लघुकथा है, और आपने शीर्षक के साथ विधा का उल्लेख भी नहीं किया,इसी कारण से मैंने लिखा कि ये आपके स्तर की रचना नहीं है,थोड़ा ग़ौर कीजियेगा ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 14, 2017 at 10:34am
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , रचना के प्रति आपकी बधाई हेतु ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद। इस लघु-कथा के माध्यम से मैंने अपने ही प्रवेश में व्याप्त उस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है जिसे हम identity cricis कहते हैं। वैसे तो यह समस्या विश्व स्तर की है पर हमारे अपने परिवेश में कुछ अधिक ही उभरी हुयी है। हम यह तय ही नहीं कर पाये हैं कि हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं ? हमें शिक्षा चाहिए या नहीं चाहिए। चूँकि सम्राट अशोक और अकबर कौन से स्कूल गए थे अतः स्कूल जरूरी है या नहीं। काम तो सब ठीक ही चल रहा है। स्कूल है तो टीचर चाहिए ? क्यों? काम तो सब चल ही रहा है और ठीक चल रहा है। पढ़े - लिखे को काम देना है , क्यों , बगैर पढ़े - लिखे भी तो अच्छा काम कर रहे हैं। नतीजा यह है कि पढ़ा- लिखा आदमी पीछे हुआ जा रहा है , पढ़ लिख कर भी वह पढ़ा- लिखा दिखना नहीं चाहता है। व्यवस्था में यह समस्या नहीं एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप बना चुकी है। हम एक ऐसा परिवेश बना चुके हैं जिसमें पढ़-लिख कर युवा वर्ग स्वयं को ठगा हुआ पा रहा है। .... भी बहुत कुछ है। शायद मैं इस तथ्य को सही स्वरुप दे नहीं पाया , फिर प्रयास करूंगा। सादर।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 14, 2017 at 8:16am

आ विजय शंकर जी ,आदाब , सामयिक एवं करारा तंज लिए रचना के लिए हार्दिक बधाई |

Comment by Mohammed Arif on November 13, 2017 at 6:33pm
आदरणीय विजय शंकर जी आदाब, बहुत ही कटाक्षपूर्ण रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on November 13, 2017 at 5:11pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,कविता अच्छी है,और तंज़ के तीर भी चला रही है,फिर भी ये मुझे आपके स्तर की नहीं लगी,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
5 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service