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शिक्षिका , प्रथम और अंतिम ( लघु - कथा ) - डॉo विजय शंकर

माँ बच्चे की प्रथम शिक्षिका होती है।
.
.
.
.
और पत्नि , पति की अंतिम शिक्षिका होती है।
.
.
क्योंकि माँ बच्चे को जो सिखाती है वो वह कभी भूलता नहीं।
और पत्नि जो सिखाती है , पति वह भूल सकता नहीं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 18, 2016 at 7:50am

आदरनीय ,  दोनो रिश्तों की अद्भुत व्याख्या के लिये बधाई आपको ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 15, 2016 at 9:56pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी , आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Shyam Narain Verma on January 15, 2016 at 10:03am

बहुत ही सुन्दर , बधाई इस प्रस्तुति के लिए आदरणीय

.सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 14, 2016 at 7:01pm
आदरणीय पवन जैन जी , आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , इसमें व्यंग है भी और नहीं भी , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 14, 2016 at 6:59pm
आदरणीय तेजवीर सिंह जी , आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 14, 2016 at 6:58pm
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 14, 2016 at 6:57pm
आदरणीय शेख सहजाद उस्मानी जी , आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Pawan Jain on January 13, 2016 at 9:40pm

पति वह भुला नहीं सकता। पहले मैं स्वीकारोक्ती,दूसरे में मजबूरी।वाह,बधाई आदरणीय।

Comment by TEJ VEER SINGH on January 13, 2016 at 7:32pm

हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी!इतनी गूढ और गहन बात इतने सूक्ष्म रूप से वर्णन क़माल की बात है!बेहतरीन प्रस्तुति!

Comment by Samar kabeer on January 13, 2016 at 5:51pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,कम शब्दों में इतनी शानदार यथार्थवादी लघुकथा लिखना आपका ही कमाल है,ढेरों बधाई इस रचना के लिये आपको |

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