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अच्छे दिन व्यापार हुआ करते हैं-- डॉ o विजय शंकर

दुआओं में याद कीजियेगा ,
जब याद कीजियेगा ,
दुआ कीजियेगा।
मिलते हैं तो कहते हैं ,
आपकी सुबह अच्छी हो ,
शाम अच्छी हो ,
रात अच्छी हो,
जितनी बार मिलते हैं , हर बार कहते हैं ।
दिन रहते , विदा होते हैं , तो
आपका दिन अच्छा हो , कहते हैं ।
दुआओं में असर होता है ,
लोग यूँ भी दुआ करते हैं ,
हाथ मिला कर कहते हैं,
सिर को थोड़ा झुका कर कहते हैं ,
मुस्कुरा कर कहते हैं ,
जिसे जानते हैं , उस से कहते हैं ,
नहीं जानते , उस से भी कहते हैं ,
हर किसी से , अजनबी से भी यही कहते हैं ।
आपका दिन अच्छा हो , कहते हैं ,
आपका हर वक्त अच्छा हो , कामना करते हैं.
बस एक शिष्टाचार है, अभिवादन में कहते हैं.
फिर भी कितनों के अच्छे दिन :
कितनों के अच्छे दिन मरीचका होते हैं,
स्वप्न हैं जो कभी पूरे नहीं होते हैं ,
उनसे कोई कहता नहीं ,
उनके लिए कोई दुआ करता भी नहीं,
वादे होते हैं, उनसे अच्छे दिन के वादे होते हैं,
अच्छे दिन के सौदे होते हैं , खूब होते हैं,
इसके बदले , उसके बदले , दो चार
अच्छे दिन मिला करते हैं ,
अच्छे दिन दुआ नहीं , व्यापार हुआ करते हैं,
अच्छे दिन के व्यापार खूब हुआ करते हैं||

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by somesh kumar on January 18, 2015 at 11:21pm

सही का आ. अच्छे दिन व्यापार ही तो हैं |खूब सपने दिखाओं और कमाओं ,बस बेचने वाले नए तरीके ईज़ाद कर रहे हैं |

सुंदर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई |

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 18, 2015 at 9:40pm
प्रिय मिथिलेश जी,
कुछ खुद को , कुछ दुनिया को देखा है, हमारे यहां हर बात बहुत बड़ी होती है, बड़ी मुश्किल से होती है, बड़ी योजना , बड़े संकल्प से होती है, हर बात में असीम त्याग है, बलिदान है, जब कि औरों के यहां वही कुछ नहीं , रोज का काम है, हर सुबह , हर शाम का काम हैं, जीवन का आधार है, जीवन का आयाम है,
देखिये बात ही बात में एक और कविता बन गयी ,
कुछ खुद को ,
कुछ दुनिया को देखा है,
हमारे यहां हर बात बहुत बड़ी होती है,
बड़ी मुश्किल से होती है,
बड़ी योजनाओं , बड़े संकल्प से होती है,
हर बात में असीम त्याग है, बलिदान है,
जब कि औरों के यहां वही कुछ नहीं ,
रोज का काम है,
हर सुबह , हर शाम का काम हैं।
जीवन का आधार है,
जीवन का आयाम है ॥
हमने जीवन ऐसा ही बना रखा है, क्या करें ।
शुभकामनाये , धन्यवाद। सादर।
Comment by Hari Prakash Dubey on January 18, 2015 at 2:53pm

इसके बदले , उसके बदले , दो चार
अच्छे दिन मिला करते हैं ,
अच्छे दिन दुआ नहीं , व्यापार हुआ करते हैं,......आदरणीय डॉ विजय शंकर सर सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 18, 2015 at 1:43pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर बहुत अच्छी कविता है, अच्छे दिन को एक नए दृष्टिकोण से अभिव्यक्त करने में सफल....

अच्छे दिन दुआ नहीं , व्यापार हुआ करते हैं,

कृपया ध्यान दे...

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