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राहत देती

घुटने सहलाती

टुकड़ा धूप

पहाड़ स्पर्श

आचमन झीलों का

पधारी धूप

वक्त की छन्नी

बारीक-दरदरा

छानती धूप

थी गुलाब वो

बनी है अब शूल

धूप बबूल

तप के आई

बादलों से लड़ती

साहसी धूप

खेत में सोना

फलियों में मणिका

बो गई धूप

भोर को लाल

संध्या को सुनहरा

रंगती धूप

कभी झरोखों

कभी द्वार संदों से

झांकती धूप

टेसू पलाश

दहकें लपटों से

लुभाती धूप

१०

नवीन ख़ोज

नवल आविष्कार

विज्ञान धूप

११

गिरि से कूदी

वृक्ष फुनगी टिकी

फुर्तीली धूप

१२

फूलों में रंग

पत्तों में हरियाली

सुगंधा धूप

मौलिक व अप्रकाशित

मनीषा सक्सेना ,इलाहाबाद |

              

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Comment

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Comment by Manisha Saxena on March 20, 2016 at 6:46pm

एक दर्जन हाइकु एक ही विषय धूप पर | वाह क्या बात है, बहुत सुन्दर  |

सुरेन्द्र वर्मा 

Comment by narendrasinh chauhan on March 19, 2016 at 12:47pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 19, 2016 at 12:40pm
बहुत गहरे भाव लिए शानदार हाइकू सृजन के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया मनीषा सक्सेना जी।

कृपया ध्यान दे...

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