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Manisha Saxena's Blog (9)

लघुकथा उलझन दाखिले की

३ साल की बेटी के नर्सरी क्लास के दाखिले के लिए जाने माने दो स्कूलों  में एडमीशन टेस्ट दिलवाए थे | सोचा ढेरों बच्चों में पास भी होगी कि नहीं| नाम पूछने पर कुछ बताया नहीं और कुछ सुनाया भी नहीं| एक चौकलेट दी गई | बिटिया ने खोल कर वहीँ खा ली और हाथ में रेपर दिखाकर वहीँ बैठी नन से पूछा, आपकी डस्ट बिन कहाँ है और बाहर चली गयी |आज जब रिज़ल्ट देखा तो दोनों स्कूल की लिस्ट में नाम था | किसमें दाखिला लें---- इस पर हम माता पिता सहमत ही नहीं हो पा रहे थे |मां का दिल कहता पास के स्कूल में डालें, आने जाने…

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Added by Manisha Saxena on August 19, 2017 at 11:00am — 8 Comments

लघुकथा दोहरा सुख

दोहरा सुख   

“सरकारी नौकरी में रखा क्या है”

“क्यों बहुत परेशान लग रहे हो| इस नौकरी ने तुम्हें क्या नहीं दिया है? अच्छी तन्खवाह ,सरकारी घर, काम करने के तय घंटे, और क्या चाहिये |”

“बंधीबंधाई तनखा से गुजारा कहाँ ?”

“और जो बंगले की ज़मीन, हर मौसम की सब्जी ,फल ----ताज़े का मज़ा ही और है|”

“अपने पोती पोतियों को इन्हीं साग-भाजी की फोटो दिखाना और तो कुछ कमाई तो की नहीं जीवन में|”

“दादा जी आम तोड़ दीजीये ना, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है|”

“पेड़ पर चढ़ कर…

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Added by Manisha Saxena on August 2, 2017 at 12:11pm — 8 Comments

लघुकथा --वो आ गए

बड़े बाबा के जिगरी दोस्त,छोटे चाचा यूँ तो हमारे परिवार की रिश्तेदारी में कुछ नहीं लगते पर रिश्तेदारों से बढ़कर करते हैं |घर पर कोई मौका हो गम का या खुशी का,पिछले चालीस सालों से,वे सदैव उपस्थित रहते हैं|घर के किसी भी सदस्य का जन्मदिन हो या शादी की सालगिरह ,छोटे चाचा गुलाबजामन की हंडिया लेकर आते | ढेरों आशीष तो देते ही थे ,शेरो शायरी सुना कर माहौल को खुशगवार बना देते थे |हम सब भाई बहिन हँसते हुए आपस में कहते “वो आये नहीं ?”या “वो आ गए हैं |” “वो आ रहे हैं|”

आजकल के बच्चों व बहुओं…

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Added by Manisha Saxena on July 25, 2017 at 11:30am — 5 Comments

शुरूआत (लघुकथा)

“भाभी जल्दी आइये देखिये ‘साथी डॉट कॉम’ पर कितने उत्तर आये हैं|”

“अरे क्या करती हैं बड़े लोग देखेंगे,सुनेंगे तो क्या सोचेंगे |”

“खुश होंगे भाभी, सब चाहते हैं कि आप फिर से एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करें |”

“सालों पहले मुझे सफ़ेद साड़ी से रंगीन साडी पहनाने में, कितने पापड़ बेले थे आपने, भूल गयी क्या, जो अब ये नया काम करने जा रही हैं |”  

“पर मैं सफल हुई ना|थोड़ा सा आत्मविश्वास की ज़रूरत है बस |केदारनाथ के हादसे को हुए भी १२ साल बीत गए हैं ,भाई व बच्चों को तो वापिस नहीं ला…

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Added by Manisha Saxena on July 20, 2017 at 11:30pm — 8 Comments

लघुकथा--बासंती उमंग

                      बासंती उमंग

आज सुबह से ही बहुत भागमभाग रही|भगवानजी को पीले वस्त्रों से सुसज्जित किया ,तोरण, बंदनवार मीठे चावल ,केसरिया खीर बनाकर सरस्वतीजी को भोग लगाया |बच्चों को कई बार याद किया क्योंकि सजावट के ये सारे काम उन्हीं के सुपुर्द  थे ,और वे भी बड़े उत्साह से सारी तैयारी कराते थे | ड्राइंग क्लास ,संगीत क्लास व घर की पूजा |तीनों जगह की पूजा करते करते न तो दम फूलता था ,न ही कोई परेशानी होती थी पर आज तो सुबह से ही थकान लग रही है |काम सब हो रहे हैं पर न तो कोई उमंग है न ही…

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Added by Manisha Saxena on February 10, 2017 at 1:09pm — 9 Comments

हाइकू धूप

                               

राहत देती

घुटने सहलाती

टुकड़ा धूप

पहाड़ स्पर्श

आचमन झीलों का

पधारी धूप

वक्त की छन्नी

बारीक-दरदरा

छानती धूप

थी गुलाब वो

बनी है अब शूल

धूप बबूल

तप के आई

बादलों से लड़ती

साहसी धूप

खेत में सोना

फलियों में मणिका

बो गई धूप

भोर को लाल

संध्या को सुनहरा

रंगती…

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Added by Manisha Saxena on March 19, 2016 at 12:00am — 3 Comments

एक बड़ा सवाल (लघुकथा )

स्कूल में मध्यांतर हुआ |सब बच्चे अपने अपने टिफिन बॉक्स लेकर मैदान में जमा थे |रीना बड़े चाव से दादी के हाथ के बने आलू के पराठे खा रही थी |उसकी सहेली कुहू टिफिन खोल कर चुपचाप बैठी थी|

“कुहू जल्दी से टिफिन ख़त्म करो, घंटी बजने वाली है “

“रीना मुझे गणित का सवाल नहीं आया |देखना, मुझे शून्य अंक मिलेगा और घर पर मम्मी की डांट पड़ेगी| “

“हाँ कल मुझे भी नहीं आ रहा था| तुमने नेट पर सर्च किया था?”

“किया था |अर्जुन अकादमी व मैथ्स ऑन लाइन दोनों पर उदाहरण देखे थे |मैं बार बार गलती…

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Added by Manisha Saxena on August 13, 2015 at 1:30pm — 3 Comments

हाइकू : सीख

    १

सही जगह

बोया सुकर्म बीज

महान फल

    २

दूर करता

अँधेरा व् दारिद्र

कुल दीपक

    ३

बाधाएं होती

परीक्षा आदमी की

जोश बढायें  

     ४

विपत्तियाँ जो

सर पर आ पड़ी

ज्ञान ने काटा

     ५

जंजीरें सभी

बनाती हैं गुलाम

लोहा या सोना

     ६

बनेंगे काम

गुरु व ईश्वर पे

श्रद्धा रखिये

    ७

देता जो स्वयं

अपने को…

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Added by Manisha Saxena on July 20, 2015 at 12:00am — 4 Comments

समझ

हाइकू



मित्र हैं वही

जो न तोड़े विश्वास

शेष तो साथी



दूसरों पर

न करो दोषारोपण

यही बहुत



परोपकार

खुशबू चन्दन

करुना बसी



निराश न हों

असफलता देती

प्रेरणा नई



धन प्राप्ति से

दरिद्रता न मिटे

वित्तेष्णा छोडो



खरीददारी में

खुश होने का भ्रम

पाले रईस



जुंबा पर आये

पुरानी कई यादें

प्यार बढाए



कह के बात

खुले मन…

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Added by Manisha Saxena on July 13, 2015 at 12:12am — 4 Comments

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