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हम पेट भर नहीं सके अख़बार बेचकर।।
वो हो गये अमीर समाचार बेचकर।।।।

अरमान किसके मर रहे हैं,उनको क्या ख़बर,
वो आज कितने खुश हो गये प्यार बेचकर।।

कल उनके हाथों में दे दिये हमने अपने हाथ,
अब मारे-मारे फिरते हैं बाज़ार बेचकर।।।

अब ज़ालिमों को भी सज़ा मिलती नहीं कंही,
भगवान जैसे सो गये संसार बेचकर।।

हालात ने बदल दिया कितना हमें "सुजान"
हम बावकार हो गये किरदार बेचकर।।


सुजान........

Views: 587

Comment

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Comment by सूबे सिंह सुजान on December 19, 2012 at 8:39am

दीप जी शुक्रिया

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on December 10, 2012 at 12:38pm

WAH

Comment by सूबे सिंह सुजान on December 10, 2012 at 7:29am

नादिर ख़ान.............और वीनस जी आपकी दाद मिली शुक्रिया

Comment by सूबे सिंह सुजान on December 10, 2012 at 7:28am

सुमन मिश्रा जी शुक्रिया

Comment by सूबे सिंह सुजान on December 10, 2012 at 7:27am

अन्नत शर्मा ...........शुक्रिया

Comment by सूबे सिंह सुजान on December 10, 2012 at 7:26am

गणेश जी आपका धन्यवाद

Comment by वीनस केसरी on December 10, 2012 at 12:23am

बेहद शानदार ग़ज़ल है
मेरी ओर से ढेरों दाद क़ुबूल फरमाएँ
मतला विशेष पसंद आया

Comment by नादिर ख़ान on December 9, 2012 at 9:59pm

हम पेट भर नहीं सके अख़बार बेचकर।।
वो हो गये अमीर समाचार बेचकर।।।।

सुजान जी बहुत खूब .....

 

Comment by SUMAN MISHRA on December 9, 2012 at 2:07pm

सुजान जी शब्दों में साफगोई ,,,और तारतम्य बहुत सुंदर,,,,

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 9, 2012 at 11:34am

प्रशंसनीय ग़ज़ल कही है मित्र सभी अशआर खूबसूरत हैं दिली दाद कुबूल करें

कृपया ध्यान दे...

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