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ग़ज़ल - छोड़ देते हैं

1222--1222--1222--1222

ख़ला की गोद में लाकर हमेशा छोड़ देते हैं

तसव्वुर के परिंदे साथ मेरा छोड़ देते हैं

 

अँधेरी रात हमने तो ब मुश्किल काट ली यारों

तुम्हारे वास्ते उजला सवेरा छोड़ देते हैं

 

ग़मों का साथ हमने तो निभाया है वहाँ तक भी

जहाँ अच्छे से अच्छे भी कलेजा छोड़ देते हैं

 

हमारा नाम लेकर अब न रुसवाई तेरी होगी

मुसफ़िर हम तो ठहरे शह्र तेरा छोड़ देते हैं

 

लड़कपन में जिन्हेँ चलना सिखाया थामकर उँगली

वही बच्चे बुढ़ापे में अकेला छोड़ देते हैं

 

फ़ना अरमान होते हैं तो होती है ग़ज़ल कोई

दिये बुझकर धुएँ की एक रेखा छोड़ देते हैं

 

बहुत ‘खुरशीद’ जी घूमे बहुत देखे तमाशे भी

चलो घर अब हुई अब साँझ मेला छोड़ देते हैं 

.

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by khursheed khairadi on February 3, 2015 at 10:16am

आदरणीय गुमनाम सर , आदरणीय हरिप्रकाश सर, आदरणीय विजयशंकर सर ,आप सभी के स्नेह का हृदय तल से आभार हूं |सादर  

Comment by khursheed khairadi on February 3, 2015 at 10:14am

आदरणीय कबीर साहब ,आपकी ग़ज़ल पर मौजूदगी से दिल शाद हो गया |तहेदिल से शुक्रिया |

Comment by Poonam Matia on February 3, 2015 at 2:39am

फ़ना अरमान होते हैं तो होती है ग़ज़ल कोई

दिये बुझकर धुएँ की एक रेखा छोड़ देते हैं// वाह बहुत उम्दा अशआर 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 2, 2015 at 8:06pm

आदरणीय खुर्शीद सर, बेहतरीन ग़ज़ल, शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाए 

मक्ता में अब दो बार आ गया है - चलो घर अब हुई अब साँझ मेला छोड़ देते हैं 

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 2, 2015 at 7:35pm
अँधेरी रात हमने तो ब मुश्किल काट ली यारों
तुम्हारे वास्ते उजला सवेरा छोड़ देते हैं
बहुत सुन्दर ग़ज़ल बानी है आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी , बधाई, सादर।
Comment by Hari Prakash Dubey on February 2, 2015 at 7:15pm

आदरणीय ख़ुरशीद जी, शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई !

ग़मों का साथ हमने तो निभाया है वहाँ तक भी

जहाँ अच्छे से अच्छे भी कलेजा छोड़ देते हैं........सुन्दर 

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 2, 2015 at 6:34pm
हमारा नाम लेकर अब न रुसवाई तेरी होगी

मुसफ़िर हम तो ठहरे शह्र तेरा छोड़ देते हैं



लड़कपन में जिन्हेँ चलना सिखाया थामकर उँगली

वही बच्चे बुढ़ापे में अकेला छोड़ देते हैं

वाह सर जी खूब ग़ज़ल हुई है बधाई
Comment by Samar kabeer on February 2, 2015 at 4:36pm
भाई ख़ुरशीद जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़बूल करें

कृपया ध्यान दे...

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