For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अचानक उसे लगा कि पीछे से किसी ने नाम लेकर पुकारा, उसने साइकिल रोकी और पलट कर देखा. थोड़ा पीछे ही उसके परिचित वकील साहब खड़े थे और उसकी तरफ इशारा कर रहे थे. वह साइकिल धीरे धीरे चलाते हुए वकील साहब के पास पहुंचा और उनको नमस्ते किया.
"क्या बात है मैनेजर साहब, आज साइकिल चला रहे हैं. गाड़ी पंचर हो गयी है या खराब है", वकील साहब ने मुस्कुराते हुए पूछा.
उसे हंसी आ गयी, वह क्या साइकिल सिर्फ तभी चला सकता है जब उसकी गाड़ी खराब हो. फिर उसने हँसते हुए ही कहा "अरे नहीं वकील साहब, गाड़ी ठीक है. बस यूँ ही साइकिल चला रहा था, सेहत के लिए ठीक रहता है".
वकील साहब ने अपना सर हिलाया और कुछ बुदबुदाए जो उसे सुनाई नहीं पड़ा.
"आप भी साइकिल चलाया कीजिये, अब आपकी भी उम्र हो चली है, थोड़ी एक्सरसाइज हो जायेगी", उसने वकील साहब को लक्ष्य करते हुए कहा.
वकील साहब ने इंकार में सर हिलाया, उसे लगा शायद उम्र के चलते वह मन कर रहे हों.
"अरे आपकी इतनी भी उम्र नहीं हुई है कि आप साइकिल नहीं चला सकें, चलाया कीजिये", उसने फिर कहा.
"आप नहीं समझेंगे मैनेजर साहब, मेरे लिए साइकिल चलना संभव नहीं है", वकील साहब ने थोड़ा उदास होते हुए कहा.
उसे लगा कि शायद वकील साहब शर्म के मारे साइकिल नहीं चलाते होंगे, तो उसने फिर पूछ लिया "अरे इसे चलाने में कैसी शर्म, देखिये मैं तो बड़े मजे में चला रहा हूँ".
वकील साहब ने एक लम्बी सांस ली और कहा 'आप नहीं समझेंगे मैनेजर साहब, मैं चाह कर भी साइकिल नहीं चला सकता. आपकी अपनी एक हैसियत है समाज में, आप साइकिल से घूमेंगे तो लोग आपकी तारीफ़ करेंगे कि देखो इतना बड़ा अधिकारी होकर भी साइकिल से घूम रहा है"
वकील साहब थोड़ी देर के लिए रुके और फिर बोले "लेकिन मेरा पेशा ऐसा है कि अगर मैं साइकिल से घूमने लगा तो लोग कहना शुरू कर देंगे कि देखो इस वकील को, एकदम फटीचर हो गया है, लगता है इसकी प्रैक्टिस बिलकुल नहीं चलती. और इसके चलते शायद मेरे यहाँ आने वाले कुछ क्लाइंट भी कम हो जाएं".
इतना कहकर वकील साहब ने नमस्कार किया और आगे बढ़ गए, वह साइकिल पकड़े समाज के इस समीकरण को सोचता रह गया.


मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 610

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on October 9, 2019 at 11:35am

इस उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब

Comment by Samar kabeer on September 29, 2019 at 11:28am

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nita Kasar on September 28, 2019 at 12:07pm

बदलते दौर में समाज के समीकरण बनते बिगड़ते रहते है।एक दौर ऐसा भी रहा कि  सायकिल से चलने वाले वक़ील बहुत आगे तक पहुँचे ,और आज का दौर है जहाँ दिखावा ही मायने रखता है ।कथा के लिये बधाई आद० विनय सिंह जी ।

Comment by TEJ VEER SINGH on September 26, 2019 at 8:08pm

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।बहुत सुंदर तरीके से सामाजिक संरचना को विश्लेषित करती लघुकथा।आजकल समाज में स्टेटस सिंबल एक बड़ा मुद्दा है।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

LONELINESS

LonelinessWrit large,born out of disconnectbetween me and my Self,are slivers of Timewhere there is…See More
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

अपना बबुआ से // सौरभ

 कतनो सोचऽ फिकिर करब ना जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी कवनो नाता कवना कामें बबुआ जइबऽ जवना गाँवें जीउ…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। उत्तम नवगीत हुआ है बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
Wednesday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Dec 30, 2025
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Dec 29, 2025
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Dec 29, 2025
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Dec 29, 2025
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Dec 29, 2025
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Dec 29, 2025

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service