For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 यह कैसी हवा ज़हरीली,

नफ़रत से भरी

विषकन्या क्या पुनः जीवित हो उठी है

आतंकी गलियारों में

वो वहाँ ख़ूनी होली खेली किसीने

संतुष्ट हुआ होगा  क्या वह

अपने कर्तव्य को पूर्ण कर

घर जाकर क्या सुकूँ से सोया होगा!

ये कैसे धर्म ?

कैसा आचरण ?

कैसी शिक्षा ?कैसा प्रण?

मृत्यु अटल सत्य है

क़त्ल-ए-आम!

यह कैसा कृत्य है?

क्या औलाद ऐसी होती है?

जो माँ की छाती छलनी करती है

और वे माताएँ जिनकी

ऐसी सन्तान

खूनी दरिंदे जिनकी पहचान

मारो मारो मिलकर सब मारो

बेकसूरो को जो मारे

उनको मारो दूर करो इनको

यहाँ से छोडो इनको मरुस्थलों में

चील गिद्ध इनको नौचों

इनको खाकर पेट भरो ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 131

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on March 4, 2019 at 2:53pm

आदरणीया कल्पना दीदी सादर नमन! उत्तमाभिव्यक्ति!

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 4, 2019 at 11:52am

उम्दा भावप्रण कविता के लिए बधाई आदरणीया

Comment by Samar kabeer on March 1, 2019 at 4:36pm

बहना कल्पना भट्ट रौनक़ जी आदाब,कविता का अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'वो वहाँ ख़ूनी होली खेली किसीने'

इस पंक्ति में 'किसी ने' की जगह "जिसने" कर लें ।

'ये कैसे धर्म ?'

इस पंक्ति में 'कैसे' की जगह "कैसा" कर लें ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 28, 2019 at 11:43pm

आप सभी पाठकों को सादर धन्यवाद| 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"नवीन जी सम सामयिक अच्छी रचना के लिए बधाई। "ये नीलामी ये पी एस यू का नाटक बंद भी कर दो  …"
4 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

नक़्श-ए-पा

मुझको पता नहीं है, मैं कहाँ पे जा रही हूँ तेरे नक़्श-ए-पा के पीछे,पीछे मैं आ रही हूँउल्फत का रोग है…See More
4 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, इतनी कमज़ोर हुई मेरी रचना फिर भी आप बधाई देकर मेरा प्रोत्साहन बढ़ा रहे हैं।…"
6 hours ago
Manju Saxena posted a blog post

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है दिल पे गुज़री हुई हर बात का आईना है।देखते हो जो ये गुलनार तबस्सुम…See More
6 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय महेंद्र साहब, समर कबीर साहब का हर सुझाव मेरे लिए मान्य है। मैं प्रयासरत हूँ कि अच्छा कर…"
6 hours ago
Usha posted a blog post

ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)

शोहरतों का हक़दार वही जो,न भूले ज़मीनी-हकीक़त, न आए जिसमें कोई अहम्,न छाए जिसपर बेअदबी का…See More
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर। हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।पानी…See More
7 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, आपके सभी सुझाव सर मेरे लिए सुखद हैं। इसी प्रकार सीखकर बेहतर कर पाऊँगी। अभी…"
7 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएँ कही हैं। हार्दिक बधाई, मित्र सुशील जी।"
18 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पानी पर चंद दोहे :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही…"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का…"
21 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service