For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहे

दीप जलाएं मौज से, रखें सदा ही ध्यान
आगजनी होवे नहीं, हरपल हो कल्यान ll 1

दीपों की लड़ियाँ जले, हो प्रकाश चहुँओर
ज्ञान पुंज से हर कहीं, होवें सभी विभोर ll 2

घोर तमस मन का मिटे, जीवन हो खुशहाल
भाई भाई सब मिले, कभी न रखें मलाल ll 3

जगमग दीपक सा बनें, तभी बनेगी बात
निरालम्ब को दीजिए, खुशियों की सौगात ll 4

तम आडम्बर का मिटे, मिटे अंधविश्वास
ज्योतिर्मय जग ये करें, दुख ना आये पास ll 5

डॉ. छोटेलाल सिंह

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 554

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 15, 2018 at 8:23am

परमादरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर अभिवादन आप हमारे प्रेरणास्रोत हैं हम आप दोनों विभूतियों के मार्गदर्शन में अनवरत सीख रहे हैं दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 15, 2018 at 8:19am

परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपका मार्गदर्शन मेरे लिए संजीवनी बूटी के समान है हम आपके बहुत बहुत आभारी हैं


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2018 at 2:28pm

आदरणीय छॊटेलाल जी, दोहों पर आपका प्रयास श्लाघनीय है. 

वस्तुतः जिस ओर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाह रहा था, आदरणीय समर साहब ने पहली ही आपको अगाह कर दिया है. चन्द्रबिन्दु और अनुस्वार के प्रति सचेत रहना अत्यंत आवश्यक है. 

शुभातिशुभ

Comment by Samar kabeer on November 11, 2018 at 6:33pm

जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छे दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

' दीप जलाएं मौज से, रखें सदा ही ध्यान
आगजनी होवे नहीं, हरपल हो कल्यान'

दोनों पंक्तियों में "यान" तुकान्तता सहीह नहीं है ।

' दीपों की लड़ियाँ जले'--"दीपों की लड़ियाँ जलें"

'  भाई भाई सब मिले'--"भाई भाई सब मिलें'

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 9, 2018 at 8:34am

आदरणीय उस्मानी साहब आपका उत्साह वर्धन संजीवनी की तरह है दिल से आभार

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 9, 2018 at 8:33am

आदरणीया नीलम जी आपके उत्साह वर्धन से मन खुश हो गया दिल से आभार

Comment by Neelam Upadhyaya on November 8, 2018 at 3:21pm

आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, दीपावली के अवसर पर संदेशपरक सुन्दर रचना की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 8, 2018 at 12:33pm

दीप-चरित्र, दीप-संदेश,  दीपोत्सव-संदेश आदि के साथ शुभकामनाओं और हिदायतों से लवरेज़ दोहावली हेतु सादर हार्दिक बधाई और दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
8 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
9 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service