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टूट कर बिखरते
हौले हौले संवरते
क्या देखा है आपने?
किसी कविता को,
गिरते-संभलते !!
मैंने देखा है--
अगणित बार..
हृदय-तल पर
शब्दो की उंगलियों का
सहारा पा-
किसी नन्हे शिशु की भांति
डगमगाते हुवे
एक एक कदम उठाते !
फिर आहिस्ता आहिस्ता
वाक्यों के लंबे लंबे डग
नापते !
हाँ देखा है मैंने!
कविता को-
टूटते-संवरते,
गिरते-संभलते,
बनते-बिगड़ते !!

मौलिक एवं अप्रकाशित
(अतुकांत कविता)

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Comment by V.M.''vrishty'' on October 14, 2018 at 4:45pm
आदरणीय नीलम जी, प्रणाम! आत्मीय आभार।
Comment by Neelam Upadhyaya on October 13, 2018 at 4:18pm

आदरणीया विष्ट जी, बहुत ही सुन्दर अतुकांत रछ्ना। प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।  

Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 11:30am
आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी, अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!
Comment by नाथ सोनांचली on October 13, 2018 at 10:59am

आद0 वी एम वृष्टि जी सादर अभिवादन। बढिया अतुकांत सृजित किया आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 12, 2018 at 3:48pm

आदरणीय समर कबीर जी! आपके सुझाव के लिए बहुत बहुत आत्मीय धन्यवाद! 

आपका मार्गदर्शन मिलता रहे हमेशा! ....सादर

Comment by Samar kabeer on October 12, 2018 at 1:24pm

पहले आप अपनी कोई ग़ज़ल मंच पर साझा करें,देखते हैं उसमें क्या सुधार की गुंजाइश है, और इसके अलावा आप ओबीओ पर मौजूद समूह "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में उपलब्ध आलेखों का अध्यन करें तो आपकी बहुत सी उलझनें दूर हो सकती हैं ।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 12, 2018 at 12:01pm

आदरणीय समर कबीर जी, दुष्यंत जी के संदर्भ में पूछने का मेरा उद्देश्य  यही था कि मैं ग़ज़ल लिखती तो हूँ,,लेकिन वो ग़ज़ल के पैमाने पर खरे नही उतरते। और ग़ज़ल की जटिलताओ का ज्ञान मुझे अब जा के हुआ है। ग़ज़ल सुनना पढ़ना मुझे किशोरावस्था से ही पसंद है। और मैंने तभी लिखने का प्रयास शुरू कर दिया था। कई सारी रचनाये की मैंने। जिनमे लय और भाव की तो कमी नही मगर बहर बिल्कुल भी सही नही।

अब मेरी उलझन ये है कि इन रचनाओ को नाम क्या दूँ???? 

Comment by Samar kabeer on October 12, 2018 at 11:55am

'वृष्टि 'जी,मैं दुष्यंत कुमार जी का पक्षधर हूँ या नहीं इससे क्या फ़र्क़ पड़ने वाला है?

दुष्यंत कुमार पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है, उसे आप पढ़ सकती हैं,और इस जगह इस पर बात करने से क्या हासिल,यहाँ मैं आपसे सवाल करता हूँ कि क्या आप ग़ज़ल भी लिखती हैं?

Comment by V.M.''vrishty'' on October 12, 2018 at 11:22am

आदरणीय समर कबीर जी, यानी आप दुष्यंत कुमार जी के पक्षधर नही हैं??

उनकी रचनाये आपके मानक पर खरी नही उतरती?

दुष्यंत जी की रचनाये किस विधा पर आधारित है?? क्या नाम दिया जाए उनको?

कृपया मेरी उलझन का समाधान करें।

Comment by Samar kabeer on October 12, 2018 at 10:42am

ग़ज़ल विधा तो बह्र में ही होती है,और अच्छी लगती है,हिन्दी ग़ज़ल जिसे गीतिका कहते हैं वो भी मात्राओं के अधीन ही होती है,इसलिये आज़ाद ग़ज़ल के चाहने वाले भी हैं लेकिन बड़ी संख्या बह्र में कहने वालों की है, और मैं भी उसका समर्थक नहीं हूँ ।

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