For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"आया ...आया ... गया!" (लघुकथा)

"लो! एक और गया! .. बह गया बेचारा!"


"वो देखो! एक तो अब आ गया न!" आशावादी दृष्टिकोण वाले युवक ने तेज बहाव वाले जलप्रपात के किनारे वाली चट्टान पर खड़ी भीड़ से आसमान की ओर देखते हुए कहा। रेस्क्यू ऑपरेशन में भेजे गये इकलौते चॉपर हेलिकॉप्टर से लगभग चालीस लोगों को जलसमाधि से बचाना था। घने काले बादलों के अंधकार और रुक-रुक कर हो रही बारिश को झेलते हुए रेस्क्यू दल-सदस्य 'रस्सी की सीढ़ी' से पार्वती नदी के बीच चट्टान में फंसे चार-पांच युवाओं को ही बचाने में सफल हुए। क़रीब तीन सौ मीटर दूर किनारे की चट्टान पर खड़ी भीड़ में "स्वाधीनता-दिवस-पिकनिक" पर मोबाइल और पिकनिक-कैमरों से फोटो व वीडियो लेते हुए युवा कभी रेस्क्यू पर ताली बजा रहे थे, तो कभी बहने और बचने वालों की संख्या गिन रहे थे, लेकिन केवल दर्शक और चश्मदीद गवाह बन पा रहे थे मददगार नहीं!


"अरे... अरे.. एक और गया... बह गया... नहीं बचेगा!" एक युवक चिल्लाया।


""देख ! वो दूसरा वाला तैर गया! अपन भी सीख लो बच्चू तैरना!" दूसरा चिल्लाया और सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने लगा।


"वो देख! एक और चढ़ गया रस्सी की सीढ़ी से  हेलिकॉप्टर पर!"


"अरे..अरे.. वो तो जाने लगा! ज़िला प्रशासन एक ही हेलिकॉप्टर भेज पाया चार घंटों में और वो भी गया!" एक अन्य युवक निराश होकर बोला और दूर की चट्टान में तेज जल-भंवरें झेलते युवाओं की चीखों को सुनने लगा।


"उन लोगों में दो-चार औरतें और दो-तीन बच्चे भी हैं! पिकनिक मनाते समय आधे घंटे तक जलप्रवाह सामान्य था; फिर अचानक ग़ज़ब हो गया! बारह बह गये साहिब ... बारह!" एक युवक ने मीडियाकर्मी और ज़िला-प्रभारी मंत्री जी को बताया! वे और ज़िलाधीश महोदय जाने कहां-कहां फोन करते रहे, लेकिन अंधेरा बढ़ जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रुक गया। दूसरा कोई  भी हेलिकॉप्टर न आ सका।


"जो गया, वो  हेलिकॉप्टर भी न लौट कर आया! अंधेरा बढ़ रहा है! ... बारिश रुक नहीं रही!" दो पीड़ित युवा बेेेटोंं के पिता रोते हुए बोले।


"सुशासन है! जन-जागरूकता है! पिकनिक-मनोरंजन की विदेशी कला का अंधानुकरण है!" दूसरे पीड़ित परिवार के बुज़ुर्ग ने रोते हुए कहा- "हमारे मुल्क में आना-जाना ऐसे ही लगा रहेगा! पंद्रह अगस्त आया और गया! पिकनिक का उन्हें मज़ा आया, पर समझो अब तो सबका प्राण गया!"


"विदेशी मदद आ रही होगी! भगवान बारिश तो रोके पहले!" एक युवक के ये शब्द सुनकर 'आज़ाद विकासशील भारत' का एक युवा उसे आंखें फाड़कर कर देखता रह गया।


(मौलिक व प्रकाशित)

Views: 553

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 18, 2018 at 10:43am

अपने. विचार साझा कर अनुमोदन, विचारोत्तेजक मार्गदर्शन और हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब,  जनाब समर कबीर साहिब, जनाब मोह़म्मद आरिफ़  साहिब।

Comment by Samar kabeer on August 16, 2018 at 10:59pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत ही शानदार लघुकथा,इस बहतरीन प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on August 16, 2018 at 2:14pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                         बहुत ही सामयिक और प्रासंगिक लघुकथा । बेहतरीन और सशक्त आम भाषा में आमजन के संवाद । आधा देश बाढ़ की चपेट में है जिससे हज़ारों ज़िंदगियाँ संकट में फँसी है । राहत और बचाव कार्य नगण्य हैं । राहत सामग्री पर भी गंदी राथनीति का दबदबा देखा जा सकता है । राहत सामग्री के पैकेटों पर भी मुख्यमंत्री और प्रधान सेवक की फोटो और विशेष रंग का इस्तेमाँ देखा जा सकता है । राहत सामग्री के बहाने चुनाव प्रचार । हमारे नेतागण कितने गिर गए हैं सोचा भी नहीन था । 

                                          हमने कल आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ मनाई मगर काल क़िले से देश में बाढ़ में मारे गए हज़ारों भारतवासियों के लिए संवेदना के दो बोल भी सुनाई नहीं दिए ।  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on August 16, 2018 at 1:35pm
आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा। आज हम विदेश का अंधानुकरण कर रहे हैं। सुशासन के नाम पर अगर कुछ बदल पाया है तो वह है सरकार का मुखौटा। आज भी प्राकृतिक आपदा में हालात भगवान भरोसे ही हो जाते हैं। और हर तरह से लापरवाह होकर मस्ती करने वालो के बारे में क्या कहना। बधाई देता हूँ आपको इस लघुकथा पर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
5 hours ago
Admin posted discussions
6 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service