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मेरी त्रिवेनियाँ ....

 

1 . ये किसने इनके हाथ में ज़िन्दगी की कठिन किताब पकड़ा दी है 
      नुकीले सबक चुभ जाते हैं और आंसू बहता रहता है
 
      ये मजदूर माँ कब तक बच्चों से मजदूरी करवाती रहेगी !! 
 
 
2 . सोचता रहा सारा दिन हाथ में कागज़ कलम लेकर
     आधी रात दिमाग में एक जुगनू चमका
 
     किरणों की धक्का मुक्की में गम हो जायेगा कहीं |
 
 
3 . तिनका तिनका जोड़कर सपनों का महल सजाया था उसने  
     एक तूफ़ान आया और आशियाना उजड़ गया
 
     अब वह पंछी ईंट-पत्थर जोड़कर अपना मकान बना रहा है |
 
 
4 . वो बच्चा सुबह से गुल्लक ढूंढ़ रहा है, सब जगह देखा 
     आटे के डिब्बे में, खाली कनस्तर में, पानी की टंकी में
 
     लगता है शराबी बाप के पास कल फिर पैसे नहीं थे !!!
 
 
5 .  भटकता रहा है सारी शब आवारा चाँद 
      दर-ओ-दीवारों से आसमां की टकराता हुआ 
 
      घर छोड़ आया है कोई पंछी सुबह उसको |  

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Comment by Veerendra Jain on June 21, 2011 at 3:22pm
Neelam ji..bahut bahut aabhar...
Comment by Veerendra Jain on June 21, 2011 at 2:09pm
Arun ji..bahut bahut shukriya...aap logon ka protsahan aage badhne me sahayata pradaan karta hai..
Comment by Veerendra Jain on June 21, 2011 at 2:08pm
Ashish ji..bahut bahut dhanyawad... rachna pasand karne ke liye..
Comment by Veerendra Jain on June 21, 2011 at 2:07pm
Sharda ji..thank u very much... for appriciating ...
Comment by Neelam Upadhyaya on June 21, 2011 at 12:12pm
bahut hi sunder rachna. Isake liye badhayee swikar kare.
Comment by Abhinav Arun on June 21, 2011 at 7:22am
bahut badhiya aur prashasti yogy rachna !!! aapkee paripakwata jhalaktee hai virendra jee haardik badhai !!
Comment by आशीष यादव on June 20, 2011 at 9:21pm
virendra ji ek baar fir aapki kalam se jaadoo nikla. badai swikaar kare|

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