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गौरैया की चीं चीं बोली, सबको बड़ी सुहाती है

प्रातः काल मधुर बेला में, गीत मनोहर गाती है

फुदक फुदक कर दाने चुगती, मन को बड़ी लुभाती है

खिड़की और झरोखों से नित, हर पल आती जाती है ll

खेत बाग वन घर आँगन को, गौरैया चहकाती है

घरों और चौबारों में नित, अपना नीड़ बनाती है

घर की शोभा उजड़ गयी है, गौरैया के जाने से

नव युग का मानव वंचित है, गौरैया के गानें से ll

विकास की अंधी दुनिया मे, पंछी गुम हो जाते हैं

बढ़ा प्रदूषण इतना ज्यादा, सबके सब खो जाते हैं

घर के आँगन में गौरैया, निशदिन खुशहाली लाये

आओ कर्म करें हम ऐसा,गौरैया रानी आये ll 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 27, 2018 at 8:49am

आद0 डॉ छोटेलाल भैया जी सादर नमन। बढिया ताटंक छंद में प्रस्तुति दी आपने गौरैया के ऊपर। बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on March 27, 2018 at 8:27am
आदरणीय मो आरिफ साहब सादर अभिवादन आपने हौसलाफजाई किया लेखनी सफल हुई दिल से शुक्रिया
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on March 27, 2018 at 8:25am
आदरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ दिल से शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on March 27, 2018 at 8:16am

आदरणीय छोटे लाल जी आदाब,

                             गौरैया की मासूम हरकतोंं को रेखांकित करती बहुत ही बेहतरीन छंद । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on March 26, 2018 at 12:37pm

जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छे लगे आपके छन्द,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।

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