For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

समय का फेर(लघु कथा)

कभी उनकी खूब चलती थी।कोर्ट-कचहरी सब वही थे।और सरकार तो थे ही।सचिव लोग गाहे-बेगाहे जरूरी फाइलें लेकर उनके आवास जाते,तो झिड़की मिलती।टका-सा मुँह लिए लौट आते।अपने नसीब को रोते कि कहाँ से कहाँ कलक्टर हुए,अर्दली ही रहते तो बेहतर होता।चैता के ताल पर 'रे ठीक से नाच बुरबक' तो न सुनना पड़ता। सुरती ठोंककर हाकिम को तो नहीं खिलानी पड़ती। उन्हें अपने लिए 'हाकिम,साहिब' जैसे शब्द गाली लगने लगे थे।वैसे अब हाकिम-सरकार के लोग इन लोगों को अर्दली जैसे ही समझते थे,आर्डर देते थे।
फिर समय ने करवट बदली। साहब जी घोटालों में फँस गये।कचहरी का चक्कर जारी है।किसी में सजा,तो किसी में सुनवाई चल रही है।कहते सुने गये कि बीमारी का लिहाज कर सजा कम दी जाय।पर यह क्या,उम्मीद से साल,छः माह ज्यादा की ही मुनादी हो गयी।देवी-देवता गुहाराये जा रहे हैं,अपने शरीर का कीचड़ औरों पर फेंका जा रहा है।पर जैसे धूल उड़ाइये तो आप ही पर पड़ती है,वैसे बेचारे कीचड़-कीचड़ हुए जा रहे हैं।खैर वक्त ने तमीज सीखा दिया है,उन्हें 'मीलार्ड' वगैरह कहने आ गया है।लोगों को यह कहते सुनकर कि अपना किया औलाद पर आता है,अधनंगा भिखारी कहने लगा,'सच है, ससुरे की औलादें भी किसी काम की न रहीं।सब झमेले-घोटाले की भेंट चढ़ रही हैं।
-ठीक ही तो कहते हो',गंगूबोला।
-‎अरे इतना ही नहीं न।बहुतों की 'हाय' लगी है। ऊपर वाले के यहाँ देर भले हो,पर हिसाब पक्का होता है',लँगड़ा भिखारी बोला,जो साहब जी के सामाजिक-न्याय के दौर में सच कहने की खातिर अपना एक पाँव गँवा चुका था।उनके गुर्गों ने उसका एक पैर इसलिए काट दिया था,क्योंकि वह अपने जमीर के हिसाब से वोट देना चाहता था।
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 59

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 7:23pm

समय अच्छे-अच्छों का हिसाब कर देता है. अच्छी लघुकथा है आ. मनन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Manan Kumar singh on January 18, 2018 at 7:53pm

शुक्रिया।

Comment by surender insan on January 18, 2018 at 12:45pm

बहुत अच्छी रचना की आपने जी। बहुत बहुत बधाई हो जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post गंगा सूख गयी - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post गंगा सूख गयी - लघुकथा –
"समाज की सड़ी गली मानसिकता पर कड़ा प्रहार करती रचना के लिए हार्दिक बधाई , आ. भाई तेजवीर जी।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2
"आ. भाई आरिफ जी, कश्मीर का दर्द बयाँ करती और टीस जगाती रचना के लिए हार्दिक बधाई । कश्मीर पर इतना ही…"
1 hour ago
Rakshita Singh posted blog posts
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
6 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आपका दिल से शुक्रिया "
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"सुंदर रचना,  हार्दिक बधाई , आ. भाई बसंत जी ।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हिमगिरी की आँखे नम हैं(कविता)
"बहुत खूब..."
10 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post बातें.....
"बनती बातें बिगड़ती बातें नदी के मानिंद उफनती बातें अहसासों में ढलती साँसों में पिघलती  अल्फ़ाज़ों…"
11 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं(6) :
"लाजवाब रचनाए"
11 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2
"हार्दिक आभार आदरणीय सुशील सरना जी । सादर ।"
11 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2
"हार्दिक आभार आदरणीया बबीता गुप्ता जी । सादर ।"
11 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service