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ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)

2122 -1212 -22


आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

टूट जाए सभी का दिल या रब
दिलजले को बड़ी ख़ुशी होगी।

ज़ह्न हारा हुआ सा बैठा है
दिल से तक़रार हो गई होगी।

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना
शमअ बेइन्तहा जली होगी।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on August 18, 2017 at 5:22am
आद0 गुरप्रीत जी सादर अभिवादन, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बहुत उम्दा, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ
Comment by नाथ सोनांचली on August 18, 2017 at 5:15am
आद0 गुरप्रीत जी सादर अभिवादन, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बहुत उम्दा, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 7, 2017 at 1:25pm
आदरणीय विजय सर सादर आभार
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 3:56pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सौरभ पांडे जी,,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 17, 2017 at 3:03pm

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने 
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना 
शमअ बेइन्तहा जली होगी।.......... 

कमाल .. उपर्युक्त इन दो शेरों ने विशेष ध्यानाकॄष्ट किया है, आदरनीय़ गुरप्रीत जी. 

इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइयाँ 

Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 1:03pm
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलेश जी..
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 1:03pm
शुक्रिया आदरणीय हरी प्रकाश जी...मैं अभी ग़ज़ल सीख रहा हूँ..और चाहता हूँ की मंच पर उपस्थित गुणीजन मेरी रचना की कमियां बताएँ और अगर हो सके तो उन कमियों का समाधान ढूँढ़ने में मार्ग दर्शन करें ..इसी आशय से लिखा था
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 1:00pm
शुक्रिया आदरणीया कल्पना जी
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 17, 2017 at 12:59pm
शुक्रिया आदरणीय खुर्शीद जी
Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 17, 2017 at 9:01am

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना 
शमअ बेइन्तहा जली होगी।... भाई इस शेर के लिये विशेष बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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