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रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़

यारों में जब रंजिश होने लगती है
चुपके चुपके साज़िश होने लगती है

आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है

तुम जब मेरे साथ नहीं होते जानाँ
मुझ पर ग़म की यूरिश होने लगती है

मुझसे कोई काम अटक जाता है जब
उनको मेरी काविश होने लगती है

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

बच्चे ग़ुरबत को क्या समझें उनकी तो
रोज़ नई फ़रमाइश होने लगती है

मुझसे कोई भूल "समर" हो जाये तो
महशर जैसी पुरसिश होने लगती है

---

रंजिश :- दुश्मनी
साज़िश :- षडयंत्र
सोज़िश :- जलन
पैमाइश :- माप (नपती)
यूरिश :- हमला
काविश :- तलाश
लरज़िश :- कम्पन्न
ग़ुरबत :- ग़रीबी
महशर :- महाप्रलय के बाद ईश्वर जिस मैदान में हर इंसान से उसके कर्मों का हिसाब लेगा ।
पुरसिश :- पूछताछ (जवाब तलबी)
___

समर कबीर
मौलिक/ अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 8, 2017 at 4:29pm
आ. भाई समर जी सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 7, 2017 at 3:21pm

नमस्कार आदरणीय 

अधिकतर हुमकवाफी शब्द मेरे लिए नए ही थे अर्थ देख देख ही समझ आये सब अशआर 
सभी अशआर बेमिसाल हुए है 

पर मकते के शेर में तो आनंद आ गया

बहुत बहुत दाद पेश है आपकी ग़ज़ल पर और दिल से बधाई 

सादर 

Comment by vijay nikore on July 7, 2017 at 12:31pm

 मोहतरम समर कबीर साहब, आपकी गज़ल इतनी अच्छी कि इसके हर शेर पर रुक गया हूँ .. उसे बार-बार पढ़ने के लिए।

आपके लिखने का अंदाज़ ही कुछ और है, भाव मुझको कहीं से कहीं ले जाते हैं। इसे कहते हैं न अच्छी गज़ल ! 

दिल की गहराई से आपको दाद देता हूँ, भाई समर कबीर जी।

 

Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 6:04pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 6:02pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 6:00pm
जनाब बृजेश कुमार'ब्रज'साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 5:58pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 5:57pm
जनाब विनय कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 5:55pm
जनाब नरेंद्र सिंह चौहान साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 5:53pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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