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ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की

ग़ज़ल
-----
(फ़ाइलातुन -मफ़ाइलुंन -फेलुंन)

आँधियाँ चल रही हैं नफ़रत की।
शमअ रोशन करो मुहब्बत की।

जिसको तदबीर पर यक़ीन नहीं
बात करता है वह ही किस्मत की।

दुश्मने जान हो गए उमरा
में ने मुफ़लिस की जब हिमायत की।

रहबरी के लिए चुना जिसको
साथ उसने मेरे सियासत की।

होश में आ जा बागबाने चमन
हो गई इब्तदा बग़ावत की।

उनके जलवों से वह नहीं वाकिफ़
बात करते हैं जो कियामत की।

वक़्त तस्दीक़ इम्तहान का है
राह मत छोड़ना सदाक़त की।

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 22, 2017 at 7:14pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और मश्वरे का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on May 22, 2017 at 3:31pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
तनाफ़ुर का ऐब वहाँ मान्य होता है,जहाँ बचने की कोई सूरत न हो,लेकिन जैसा कि निलेश जी ने मिसरे सुझाये हैं उन्हें दुरुस्त करने में गुरेज़ नहीं करना चाहिये ।
'क़ियामत' ये शब्द मैंने मोबाइल से ही लिखा है,इसी तरह 'वाकिफ़',"वाक़िफ़", आप जब q से लिखेंगे तो नुक़्ते नहीं लगेंगे,और 'k'से लिखेंगे तो नुक़्ते लग जायेंगे,kiyamt',wakif' कोशिश करें ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 21, 2017 at 4:14pm
जनाब ब्रजेश कुमार साहिब, गया,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 21, 2017 at 4:12pm
मुहतरम जनाब गिरिराज भाई साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 21, 2017 at 2:33pm
बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आदरणीय..सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 21, 2017 at 2:01pm

आदरणीय तस्दीक भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है , शे र दर शेर  मुबारकबाद कुबूल कीजिये ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 20, 2017 at 9:22pm
मुहतरम जनाब नीलेश साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया,---आपके मश्वरे का शुक्रिया, आपने जिसका ज़िक्र किया उसे ज़्यादा तर शोरा ऐब नहीं मानते ,हमारी तरफ भी नहीं मानते ,मैं शायरी उर्दू में लिखता हूँ ज़ाहिर है हिंदी टाइप में गलती हो जाती है ,यहां बड़े काफ से कियामत टाइप करता हूँ ,मगर कि के नीचे बड़े काफ का नुक्ता मोबाइल टाइप में नहीं आता है ------
Comment by Gurpreet Singh jammu on May 20, 2017 at 9:15pm
शुक्रिया जनाब
Comment by Gurpreet Singh jammu on May 20, 2017 at 9:15pm
शुक्रिया जनाब
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 20, 2017 at 9:06pm
मुहतरम जनाब लक्ष्मण धामी साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया

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